लद्दाख की गलवान घाटी में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीनी सेना की कायराना हरकत के बाद पूरे देश में चीन के खिलाफ आक्रोश है. चीनी सेना की चालबाजी का माकूल जवाब देने के लिए एलएसी पर भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान एक-एक हरकत पर नजरें जमाए हुए हैं. मिराज 2000 हो या सुखोई, अपाचे हेलीकॉप्टर हो या फिर चिनूक सबका निशाना अचूक है और भारतीय वायुसेना की पूरी शक्ति इस समय हाई अलर्ट पर है. (सभी तस्वीरें - @IAF_MCC)
LAC के ग्राउंड जीरो पर जमीन से लेकर आसमान तक से नजर रखी जा रही है और चीन को जवाब देने के लिए एयरफोर्स पूरी तरह तैयार है. वायुसेना प्रमुख ने भी हैदराबाद में वायुसेना की पासिंग आउट परेड में कहा था कि भारत किसी भी एक्शन के लिए तैयार है और जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा.
ऐसे में जानना जरूरी है कि अगर विपरीत परिस्थिति बनती है तो भारत और चीन की वायु शक्ति कितनी है और कौन किस पर भारी पड़ सकता है. भारतीय वायुसेना चीन को किसी भी हालत में चौंका सकती है क्योंकि भारतीय वायुसेना के पास ऊंचाई पर उड़ान भरने का ज़बरदस्त अनुभव है.
भारत ने लद्दाख में लड़ाकू विमान मिराज 2000 तैनात कर दिया. ये वही फाइटर प्लेन है, जिसका इस्तेमाल बालाकोट एयरस्ट्राइक में हुआ था . सुखोई-30 भी अलर्ट पर है. भारत के लड़ाकू हेलिकॉप्टर लगातार सीमा की निगरानी कर रहे हैं. अपाचे हेलीकॉप्टर की नज़र भी एलएसी पर हो रही हरकतों पर है. चिनूक से तमाम सैनिक और हथियार फॉरवर्ड फ्रंट पर भेजे जा रहे हैं. जरूरी सामानों के साथ Mi-17V5 हेलिकॉप्टर भी लगातार उड़ान भर रहा है.
भारत की पश्चिमी एयरकमांड के पास 75 फाइटर एयरक्राफ्ट हैं और 34 ग्राउंड अटैक एयरक्राफ्ट हैं. ये श्रीनगर, लेह, पठानकोट, आदमपुर और अंबाला में तैनात हैं. केंद्रीय एयरकमांड यानी बरेली, ग्वालियर और गोरखपुर सेक्टर में 94 फाइटर्स एयरक्राफ्ट और 34 ग्राउंड अटैक एयरक्राफ्ट हैं. इसके अलावा पूर्वी एयरकमांड यानी जलपाईगुड़ी, तेज़पुर और छाबुआ सेक्टर में 101 फाइटर एयरक्राफ्ट हैं.
चीन की बात करें तो चीन की वायु शक्ति अलग-अलग इलाकों में तैनात नहीं है. चीन की पश्चिमी थियेटर कमांड में 157 फाइटर्स एयरक्राफ्ट हैं एकदम सटीक निशाना लगाने वाले 20 यूएवी हैं. 12 ग्राउंड अटैक यूएवी और 8 EA-03 यूएवी है.
चीन के पास 104 न्यूक्लियर मिसाइल हैं जो पूरे भारत पर स्ट्राइक कर सकती हैं वहीं भारत के पास अग्नि 3 लॉन्चर सिस्टम है जो पूरे चीन में कहीं भी हमला कर सकती है.
चीन के पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल भी हैं जिनकी रेंज 11000 और 7000 किलोमीटर है. ये भी भारत पर और यहां तक कि अमेरिका तक पहुंचने की क्षमता रखती हैं.
DF-21 मिसाइल की रेंज 2150 किलोमीटर है और इससे चीन दिल्ली को टारगेट कर सकता है. इसके अलावा चीन के पास पूर्वोत्तर भारत और भारत के पूर्वी तट पर न्यूक्लियर स्ट्राइक करने की क्षमता है.
दूसरी तरफ भारत के पास परमाणु क्षमता वाले 51 विमान हैं जो ग्रैविटी बम से लैस हैं और भारत अपने अग्नि 2 लॉन्चर से भी चीन के कई इलाकों को टारगेट कर सकता है.
भारत और चीन की हवाई शक्ति की बात करें तो चीन एक बार में भारतीय एयर डिफेंस का मुकाबला नहीं कर सकता. चीन के पास चौंकाने वाली मारक शक्ति नहीं है और भारत के पास ज़बरदस्त ऊंचाई पर लड़ाकू विमान और अटैक हेलिकॉप्टर्स को उड़ाने का बेजोड़ अनुभव है. इस मामले में चीन भारत से पीछे नज़र आता है.
यहां ये भी नहीं भूलना चाहिए कि भारत ने अपने सैनिकों को खासतौर पर उत्तरी और पूर्वी बॉर्डर पर चीन से मुकाबले के लिए तैयार किया हुआ है. भारत के पक्ष में रणनीतिक लाभ भी है क्योंकि चीन की सैन्य शक्ति बिखरी हुई है.
चीन के मुकाबले भारत ने ज़मीन, हवा और समुद्र में जिस गुप्त तरीके से अपनी शक्ति का बंटवारा किया हुआ है उससे चीन के लिए चीज़ें मुश्किल हो जाती हैं.
भारत की रक्षा तैयारियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी साफ कर दिया है कि डेवलपमेंट हो, एक्शन हो, काउंटर एक्शन हो, जल-थल-नभ में हमारी सेनाओं को देश की रक्षा के लिए जो करना है, वो कर रही है. आज हमारे पास ये क्षमता है कि कोई भी हमारी एक इंच जमीन की तरफ आंख उठाकर भी नहीं देख सकता. आज भारत की सेनाएं, अलग-अलग सेक्टर्स में, एक साथ मूव करने में भी सक्षम है.