लंगूर को पालने वाले शख्स का कहना है कि इस विश्वविद्यालय में बंदरों का आतंक इस तरह था कि स्टूडेंट्स की किताबें, लेख उठाकर ले जाते थे. लैब और क्लास में घुसकर आतंक मचाते थे. बंदरों के आतंक से पूरा विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र काफी परेशान थे इससे निजात दिलाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक लंगूर की नियुक्ति की. इस लंगूर को विश्वविद्यालय प्रशासन एक चपरासी के बराबर वेतनमान देता है. जबसे इसको तैनात किया गया, तब से बंदरों का आतंक कम हो गया है.