इस समय ब्रिटेन में एक बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि क्या लंदन के ऐतिहासिक ब्रिज टूट रहे हैं? क्या प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का भविष्य ये ब्रिज तय करेंगे? हुआ यूं है कि लंदन के दो ऐतिहासिक ब्रिजों को बंद कर दिया गया है. क्वीन विक्टोरिया के जमाने में बनाए गए लंदन ब्रिज उर्फ टावर ब्रिज को सुरक्षा का हवाला देते हुए बंद कर दिया गया है. महीने भर पहले भी इसे बंद कर दिया गया था. क्योंकि अब ये जंग से सड़ रहा है. कई जगहों पर टूट गया है.
बिना कोई अन्य रास्ता दिए इस ब्रिज को बंद कर देने से लोग नाराज हैं. क्योंकि ये ब्रिज बार्न्स जिले को सेंट्रल लंदन से जोड़ता है. लंदन के लोग इटली के सरकार की तारीफ कर रहे हैं. वहां कोरोना के समय बनाए गए पुल का हवाला देकर लोग सरकार से कह रहे हैं कि इटली से सीखो कि कैसे पुल बनाया जाता है. लंदन ब्रिज 19वीं सदी का राजसी सस्पेंशन ब्रिज (एक लटका हुआ पुल) है. 104 मीटर लंबा और 32 मीटर चौड़ा है.
इसे बेसकूल ब्रिज भी कहते हैं. यानी ऐसा ब्रिज जो जहाज के आने पर नीचे से खुल जाए और फिर जुड़ जाए. टेम्स नदी पर बने इस पुल को आम जनता के लिए 17 मार्च,1973 में खोला गया था. कास्ट आयरन से बने इस पुल पर कई बार हमले भी हुए. 1996 में आयरिश रिपब्लिकन आर्मी के आतंकियों ने ब्रिज के नीचे दो बम रखे थे, लेकिन विस्फोट से पहले ही उसे डिफ्यूज कर दिया गया था.
टावर ब्रिज लंदन का प्रतीक है. इसके बंद होने से टेम्स नदी में हर साल ऑक्सफोर्ड से कैंब्रिज तक होने वाली नौक दौड़ पर भी रोक लग जाएगी. प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने चुनाव में वादा किया था कि वो यातायात को सुगम बनाने और इसके ढांचे में आई खामियों को दूर करेंगे. इस ब्रिज की मरम्मत के लिए करीब 1360 करोड़ रुपए की जरूरत आएगी. कोरोना की वजह से अब इस राशि पर सवाल उठ रहा है.
लंदन ब्रिज से लगे हैमरस्मिथ पुल की मरम्मत का मुद्दा भी तेजी से जोर पकड़ रहा है. साल 2018 में जेनोआ, इटली में ऐसा ही ब्रिज गिर गया था. 43 लोगों की मौत हो गई थी. इस पर इटालवी समुदाय ने इस ब्रिज के पुनर्निर्माण के लिए देशभर में ऐसा माहौल बनाया कि वहां सरकार ने कोरोना महामारी से जूझते हुए भी पिछले महीने ही इसका निर्माण पूरा करवाया और एक आदर्श स्थापित किया. अब ब्रिटेन में भी यही मांग उठ रही है.