अफगानिस्तान में सरकार और तालिबान के बीच पिछले तीन महीनों से शांति वार्ता का दावा किया जा रहा है लेकिन इसके बावजूद लगातार एक्टिविस्ट्स, पत्रकारों और राजनेताओं पर हमले हो रहे हैं. ताजा हमले में वीमेन राइट्स एक्टिविस्ट फ्रेश्टा कोहिस्तानी को काबुल के कापिसा प्रांत में मोटरसाइकिल सवार युवकों ने मार डाला है. कोहिस्तानी के अलावा उनके भाई की भी हत्या की गई है.
कोहिस्तानी अक्सर सोशल मीडिया पर महिलाओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ जागरूकता फैलाती आई हैं. उन्होंने पिछले साल प्रेजीडेंट इलेक्शन में वरिष्ठ लीडर अब्दुल्ला अब्दुल्ला के लिए कैंपेन भी किया था. इसके अलावा उन्होंने काबुल में कई सिविल सोसाइटी इवेंट्स के सहारे अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों पर लगातार बात की है.
इस मामले में अब्दुल्ला ने कहा है कि 29 साल की कोहिस्तानी पर हुआ हमला एक आतंकी हमला था. उन्होंने कोहिस्तानी को एक सच्ची और निडर एक्टिविस्ट बताया. पिछले दो दिनों में काबुल में कोहिस्तानी समेत दो एक्टिविस्ट्स का मर्डर कर दिया गया है. पिछले कुछ हफ्तों में अफगानिस्तान में दिनदहाड़े इस तरह की टारगेट किलिंग्स में इजाफा हुआ है.
कोहिस्तानी ने अपने मर्डर से कुछ समय पहले ही फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर किया था. इस पोस्ट में लिखा था कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं और उन्होंने प्रशासन से प्रोटेक्शन की गुहार लगाई थी. उन्होंने इसके अलावा पत्रकारों और एक्टिविस्ट्स पर हो रहे हमलों की भी कड़ी आलोचना की थी. उन्होंने नवंबर में अपने एक ट्वीट में लिखा था- अफगानिस्तान अब रहने लायक जगह नहीं रह गई है. यहां शांति की उम्मीद नहीं है. अगला नंबर आपका हो सकता है. यहां किसी पर भी हमला हो सकता है.
इससे पहले स्वतंत्र इलेक्शन मॉनिटरिंग संस्था के हेड मोहम्मद यूसुफ रशीद को कुछ समय पहले ही काबुल में गोली मार दी गई थी. इससे पहले भी मोटरसाइकिल सवार कुछ लोगों ने वरिष्ठ पत्रकार रहमतुल्लाह को मार गिराया था. काबुल स्थित अफगान जर्नलिस्ट्स सेफ्टी कमिटी के अनुसार, पिछले दो महीनों में चार पत्रकारों को अफगानिस्तान में मार गिराया गया है वही इस साल सात मीडिया वर्कर्स का अफगानिस्तान में मर्डर हो चुका है.