कोविड-19 की वजह से केंद्र सरकार और राज्य सरकार की ओर से छह माह पहले बंद किया गया मेहरानगढ़ दुर्ग एक अक्टूबर से पर्यटकों के लिए खुलेगा. इस दौरान लोगों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होंगे. साथ ही ऑनलाइन टिकट की विशेष व्यवस्था रहेगी. डिजिटल थर्मामीटर से जांच, सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के पालन के साथ समय-समय पर परिसर का सैनिटाइजेशन किया जाएगा.
(इनपुट- अशोक शर्मा)
मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट ने भी अपने स्तर पर कई तरह के प्रबंध किए हैं. जिससे लोगों में सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहे. ट्रस्ट के निदेशक करणी सिंह जसोल ने बताया कि अब विजिटर्स मेहरानगढ़ में आने के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग करवा सकेंगे. परिसर में संपर्क रहित व्यवस्था लागू की जाएगी. जसोल ने बताया कि दुर्ग के खुलने से पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों को राहत मिलेगी और पर्यटक भी आ जा सकेंगे.
जोधपुर का ऐतिहासिक मेहरानगढ़ दुर्ग करीब 46 साल बाद 18 मार्च को कोरोना के चलते बंद हुआ था. अब 6 माह बाद एक अक्टूबर को इसे फिर से खोला जा रहा है. म्यूजियम की टिकट ऑनलाइन ले सकेंगे. नए नियमों के बारे में मेहरानगढ़ दुर्ग कर्मचारियों को गाइड बंधुओं को भी इससे संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
राज्य सरकार से मिले दिशा निर्देशों के तहत और कोविड 19 कि गाइडलाइन के तहत ऐतिहासिक दुर्ग फिर आमजन के खुलेगा, जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग के साथ कोरोना संबधित अन्य सभी गाइडलाइन का पालना किया जाएगा. मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के निदेशक कुंवर करणी सिंह जसोल ने बताया कि सरकार की गाइडलाइन अनुसार अनलॉक के दौरान विभिन्न होटल्स, गेस्ट हाउस, सरकारी म्यूजियम व अन्य पर्यटन स्थलों को खोला गया है.
सूर्यनगरी जोधपुर में राठोड़ो द्वारा इस किले का निर्माण करवाया गया, जहां 12 मई 1459 में राव जोधा द्वारा चिड़िया टूक पहाड़ी पर इस किले के निर्माण का कार्य करवाया गया था। तब से लेकर आज तक ये दुर्ग राव जोधा के वंशजों द्वारा अधिपत्य रहा। इसकी बनावट के साथ स्थापत्य कला भी बेजोड़ है
इस किले के अंदर कई भव्य महल, अद्भुत नक्काशीदार दरवाजे और जालीदार खिड़कियां हैं. वहीं, राजपरिवार के साथ आम जन की आस्था का प्रतीक चामुंडा माता के मंदिर भी किले के एक छोर पर बना है, जहां नवरात्रि में राज परिवार से जुड़े लोग ही नहीं बड़ी संख्या में जोधपुरवासी और अन्य स्थानों से भी जनसामान्य पूजा-अर्चना करने आते हैं.