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दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत को खतरा, एवरेस्ट की बालकनी में मिले माइक्रोप्लास्टिक

Microplastic Pollution found near Mount Everest Summit
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दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर अब खतरा मंडरा रहा है. ये खतरा पैदा किया है हम इंसानों ने. जिसने धरती के सबसे ऊंचे, सबसे गहरे और यहां तक कि अंतरिक्ष तक में प्रदूषण फैलाया है. ये प्रदूषण है प्लास्टिक के उत्पादों का. अब माउंट एवरेस्ट के शिखर से कुछ मीटर नीचे ही वैज्ञानिकों को माइक्रोप्लास्टिक मिले हैं. माइक्रोप्लास्टिक कचरे की वजह से एवरेस्ट की बर्फ और सतह को काफी नुकसान होगा. आइए जानते हैं कि आखिर हुआ क्यों और इसका इलाज क्या है?

Microplastic Pollution found near Mount Everest Summit
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आपको पता ही है माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8,848 मीटर है. यानी करीब 29,020 फीट. माउंट एवरेस्ट के शिखर से करीब 400 मीटर नीचे माइक्रोप्लास्टिक कचरा (Microplastic Garbage) मिला है. जो बर्फ के साथ मिला हुआ था. जिस जगह ये माइक्रोप्लास्टिक कचरा मिला है उसे एवरेस्ट की बालकनी (Balcony of Everest) कहा जाता है. ये कचरा 5300 मीटर से लेकर 8440 मीटर की ऊंचाई तक 11 स्थानों से मिला है. 

Microplastic Pollution found near Mount Everest Summit
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द गार्जियन में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा माइक्रोप्लास्टिक कचरा एवरेस्ट के बेस कैंपों के पास मिले हैं. क्योंकि सबसे ज्यादा समय पर्वतारोही यहीं पर बिताते हैं. माइक्रोप्लास्टिक कचरा ज्यादातर पर्वतारोहियों के कपड़ों, टेंट, रस्सियों, बैग्स आदि से टूटकर फैलते हैं. कई बार पर्वतारोहियों के सामान वहीं छूट जाते हैं. हालांकि, स्विस एल्प्स और फ्रेंच पायरेनीस पर्वतों पर भी माइक्रोप्लास्टिक मिले हैं. इससे ऐसा लगता है कि हवा से भी उड़कर वहां तक जा सकते हैं.

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प्लेमाउथ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता इमोजेन नैपर ने कहा कि मैं हमेशा माउंट एवरेस्ट को पवित्र और साफसुथरा मानता आ रहा था. लेकिन माइक्रोप्लास्टिक कचरा और प्रदूषण का सुनकर हैरान हूं. ये हैरानी और दुख की बात है कि हम इंसानों ने दुनिया की सबसे ऊंची जगह को भी प्रदूषित कर दिया है. हमें अब ऐसे सॉल्यूशंस खोजने होंगे जिससे एवरेस्ट पर प्रदूषण कम हो या न हो. 

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इमोजेन ने कहा कि दिक्कत की बात ये है कि आप प्लास्टिक कचरे को खत्म नहीं कर सकते. हमें उसके रिसाइकलिंग की व्यवस्था करनी होगी. लेकिन ऐसा बड़े प्लास्टिक कचरों के साथ हो सकता है. माइक्रोप्लास्टिक कचरे का तो एक ही उपाय है कि वहां ऐसे कपड़े पहने लोग जिनसे धागे न टूटे, बैग्स न फटे, टेंट से धागे न निकले. इसके लिए हमें ऐसे मैटेरियल का उपयोग करना होगा. 

Microplastic Pollution found near Mount Everest Summit
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हर साल लाखों टन प्लास्टिक पर्यावरण से गायब हो जाता है. यानी लापता हो जाता है. कभी हवा में उड़कर तो कभी पानी में बहकर. इनके साथ जुड़े हुए खतरनाक रसायन और माइक्रोब्स किसी भी तरह के स्थान को दूषित कर सकते हैं. वाइल्डलाइफ या खाद्य पदार्थ को नष्ट कर सकते हैं. इतना ही नहीं माइक्रोप्लास्टिक खाने, पीने और सांस के जरिए शरीर के अंदर चले जाते हैं. जो पूरी तरह से नुकसान करता है. 
 

Microplastic Pollution found near Mount Everest Summit
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माउंट एवरेस्ट पर प्रदूषण की बात कई सालों से उठती आ रही है. साल 2019 में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर कुल 880 लोगों ने फतह हासिल की थी. लेकिन नई स्टडी से यह पता चला कि एवरेस्ट पर मौजूद माइक्रोप्लास्टिक 5 मिलीमीटर या उससे भी छोटे हैं, इन्हें खोजकर उठाना या जमा करना नामुमकिन जैसा है. 

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इमोजेन और उनकी टीम का यह अध्ययन वन अर्थ नामक साइंस मैगजीन में प्रकाशित हुआ है. इमोजेन और उनकी टीम ने नेशनल जियोग्राफिक एक्सपेडिशन द्वारा साल 2019 में एवरेस्ट पर उठाए गए सैंपल्स का अध्ययन किया था. वैज्ञानिकों को जो नतीजे मिले वो हैरान करने वाले थे. एवरेस्ट की बर्फ को पिघलाकर जो एक लीटर पानी बन रहा था उसमें 30 माइक्रोस्कोपिक प्लास्टिक कण थे. जबकि सबसे प्रदूषित पानी में 119 माइक्रोस्कोपिक प्लास्टिक कण थे. 

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