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बड़ा खुलासाः मंगल ग्रह खो रहा है अपना संतुलन, धुरी पर लड़खड़ा रहा

Mysterious wobble moving Mars Pole
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आपने देखा होगा कि कार या दो पहिया वाहन का एक टायर का एलाइनमेंट बिगड़ जाता हो गाड़ी चलते समय लड़खड़ाने लगती है. ठीक इसी तरह मंगल ग्रह भी अपनी धुरी पर सीधा नहीं घूम रहा है. वह लड़खड़ा रहा है. इस रहस्यमयी लड़खड़ाहट को लेकर साइंटिस्ट काफी हैरान-परेशान हैं. क्योंकि लड़खड़ाहट की वजह से मंगल ग्रह की अपनी धुरी पर घूमने की गति कमजोर हो रही है. इस बात का खुलासा हाल ही में अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन ने किया है. (फोटोःगेटी)

Mysterious wobble moving Mars Pole
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मंगल ग्रह (Mars) अपनी धुरी पर सीधे नहीं घूम रहा है. यह हिलते-डुलते हुए और लड़खड़ाते हुए घूम रहा है. मंग्रल ग्रह हर 200 दिन पर अपनी धुरी से 4 इंच अलग जा रहा है. इस प्रक्रिया को द चैंडलर वॉबल (The Chandler Wobble) कहते हैं. इसे अंतरिक्ष विज्ञानी सेथ कार्लो चैंडलर (Seth Carlo Chandler) के नाम पर रखा गया था. इन्होंने ही इस प्रक्रिया को करीब एक सदी पहले खोजा था. (फोटोःगेटी)

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हमारे सौर मंडल में इस तरह से लड़खड़ाते हुए घूमने वाला दूसरा ग्रह बन गया है मंगल. मंगल ग्रह से पहले अपनी धुरी पर सीधे न घूमने का रिकॉर्ड सिर्फ धरती के पास था. अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन (American Geophysical Union - AGU) के मुताबिक ये एक ऐसी जियोफिजिकल गतिविधि है जिसमें कोई भी ग्रह अपनी धुरी पर सीधा नहीं घूमता. ऐसे लगता है जैसे उसका एलाइनमेंट यानी सीधाई में बदलाव आ गया है. (फोटोःगेटी) 

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धरती भी लड़खड़ाती है. यह अपनी धुरी से 30 फीट खिसक चुकी है. धरती की लड़खड़ाहट 433 दिनों के बाद एक बार दिखाई देता है. जबकि मंगल ग्रह की लड़खड़ाहट हर 200 दिन पर एक बार दिखता है. दुनियाभर के साइंटिस्ट के लिए ये लड़खड़ाहट एक पहेली है लेकिन कुछ गणनाओं के आधार पर वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि यह कुछ सदियों में अपने आप खत्म हो जाएगा. (फोटोःगेटी)

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हालांकि, धरती की लड़खड़ाहट धीरे-धीरे मजबूत और लंबी होती जा रही है. इसके पीछे वातावरण और समुद्रों के दबाव में होने वाला बदलाव जिम्मेदार हो सकता है. लेकिन मंगल ग्रह की लड़खड़ाहट बेहद रहस्यमयी है. 18 साल के डेटा का विश्लेषण करने के बाद की गई नई स्टडी के मुताबिक साइंटिस्ट सिर्फ इतना पता कर पाए कि मंगल ग्रह लड़खड़ा रहा है. इसके पीछे का कारण पता नहीं कर पाए हैं. (फोटोःगेटी)

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ये स्टडी तीन सैटेलाइट्स से जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर की गई है. ये सैटेलाइट्स हैं- मार्स ओडिसी (Mars Odyssey), मार्स रिकॉनेसेंस ऑर्बिटर (Mars Reconnaissance Orbiter) और मार्स ग्लोबल सर्वेयर (Mars Global Surveyor). साइंटिस्ट्स को एक बार लगा कि ये लड़खड़ाहट अपने आप खत्म हो जाएगा, लेकिन साल-दर-साल और मजबूत होती जा रही है. (फोटोःगेटी)

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मंगल ग्रह पर समुद्र नहीं है, इसलिए ऐसा माना जा रहा है कि वहां के वातावरण के दबाव में होने वाले बदलाव की वजह से मंगल ग्रह की लड़खड़ाहट खत्म नहीं हो रही है. हालांकि इसे लेकर और अध्ययन की जरूरत है. नासा के जेपीएल में काम करने वाले एयरोस्पेस इंजीनियर एलेक्स कोनोप्लिव ने कहा कि इस लडखड़ाहट को सही तरीके से आंकने के लिए सालों तक सही डेटा का एनालिसिस करना पड़ता है. साथ ही सही निगरानी भी करनी पड़ती है. (फोटोःगेटी)

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भविष्य में ऐसी आशंका हो सकती है कि मंगल ग्रह अपनी धुरी पर घूमते समय इतना ज्यादा लड़खड़ाने लगे कि इसकी गति कमजोर होती चली जाए. क्योंकि किसी भी ग्रह की अपनी धुरी पर घूमने की वजह होती है उसके केंद्र में मौजूद मेंटल का बाहरी परत यानी क्रस्ट के साथ सही तालमेल. अगर ये तालमेल बिगड़ेगा तो ग्रह टूट सकता है. (फोटोःNASA)

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