ऑस्ट्रेलिया के एक शख्स की एड़ी में पीछे की तरह एक लाल निशान बना. वह ठीक नहीं हो रहा था. तीन हफ्ते में उस जगह पर छेद हो गया. इस छेद को अपने पैरों में लेकर चल रहा शख्स तुरंत मेलबर्न स्थित ऑस्टिन अस्पताल गया. ये बात है पिछले साल अप्रैल के महीने की जब ऑस्ट्रेलिया में कोरोनावायरस तेजी से फैला हुआ था. (फोटोःगेटी)
वहां डॉक्टरों ने बीमार शख्स एडम नोएल्स को बताया कि वह जल्द ठीक हो जाएगा, लेकिन कुछ ही दिनों के बाद वह उस छेद के अंदर हड्डियां दिखने लगी थी. ये छेद बढ़कर टेबल टेनिस के बॉल जितना बड़ा हो गया था. फिर वह ऑस्ट्रेलिया के अत्यधिक आधुनिक अस्पताल सेंट विंसेंट गया. एक हफ्ते की जांच के बाद पता चला कि उसे मांस खाने वाली बीमारी बुरूली अल्सर (Flesh Eating Disease Buruli Ulcer) हुई है. (फोटोःगेटी)
बैक्टीरिया की वजह से होने वाली बीमारी बुरूली अल्सर (Buruli Ulcer) आपके शरीर में घाव पैदा करता है. अगर सही समय पर इलाज न हो तो आपके शरीर के अंग को काटकर निकालना पड़ सकता है. डॉक्टरों ने जब एडम से पूछा कि वह दिन भर में क्या करता है. उसकी दिनचर्या जानी. क्योंकि एडम को ये बीमारी कहां से हुई ये पता करना बेहद जरूरी था. (फोटोःगेटी)
एडम ने बताया कि वह अपने बगीचे में हर रोज बहुत काम करता है. एक शेड बनाने के लिए उसने ढेर सारी मिट्टी खोदी, पेड़ काटे. लेकिन उसे ये अंदाजा नहीं था कि इन्ही पेंड़ों पर रहने वाले पोसम्स (Possums) नाम के जीव के शरीर में पलने वाली बैक्टीरिया उसका ये हाल कर देगी. पोसम्स नेवले की ही एक प्रजाति है, जो ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और अफ्रीका के कुछ इलाकों में दिखती है. (फोटोःगेटी)
पोसम्स (Possums) आमतौर पर रात में घूमते और खाना खाते हैं. अब ये माना जा रहा है कि जिस बीमारी की वजह से एडम का पैर कटने से बच गया. उस बीमारी से पोसम्स (Possums) खउद भी ग्रसित होते हैं. जिस बैक्टीरिया से बुरुली अल्सर होता है उसे माइकोबैक्टीरियम अल्सरान (Mycobacterium Ulcerans) कहते हैं. यह बैक्टीरिया पोसम्स के मल में प्रचुर मात्रा में मिलता है. (फोटोःगेटी)
पोसम्स (Possums) के प्राकृतिक निवास स्थल अब खत्म हो रहे हैं. क्योंकि इंसान पेड़ काट कर उस जगह पर कुछ न कुछ बना रहे हैं. इसकी वजह से पोसम्स (Possums) इंसानों के इलाके में आकर रहने लगे हैं. इनका इंसानों से संपर्क बढ़ गया है. इसलिए इन्हें होने वाली बीमारी जो मांस खाती है, वो अब इंसानों को होने लगी है. यानी अब इंसान भी बुरुली अल्सर से बच नहीं पाएगा. (फोटोःगेटी)
ऑस्ट्रेलिया में मांस खाने वाली बीमारी बुरूली अल्सर (Flesh Eating Disease Buruli Ulcer) के मामले पिछले कुछ सालों में बढ़े हैं. क्योंकि ये बीमारी आमतौर पर वहां सुनाई नहीं देती थी. लेकिन साल 2014 में इसके 65 केस सामने आए थे. साल 2019 में 299 केस और पिछले साल ऑस्ट्रेलिया में बुरुली अल्सर के 218 केस आए थे. यानी अब यह बीमारी लगभग हर साल किसी ने किसी को बीमार कर रही है. (फोटोःगेटी)
एडम जिस इलाके में रहते हैं वहां पर ऐसे मामले पहले कभी नहीं सुने गए. ज्यादातर मामले विक्टोरिया प्रांत से सामने आए हैं. संक्रामक रोगों के डॉक्टर डैनियल ओ-ब्रायन कहते हैं कि वो हर हफ्ते मांस खाने वाली बीमारी बुरूली अल्सर (Flesh Eating Disease Buruli Ulcer) के पांच से 10 मरीज देखते हैं. डैनियल बताते हैं कि बुरुली अल्सर बहुत तेजी से आपके सॉफ्ट टिश्यू का खाना शुरू करता है. (फोटोःगेटी)
मांस खाने वाली बीमारी बुरूली अल्सर (Flesh Eating Disease Buruli Ulcer) का इलाज करने के लिए खास तरह की एंटीबायोटिक दवाइयां, स्टेरॉयड्स दिए जाते हैं. इनकी डोज कुछ हफ्तों तक दी जाती है या फिर जरूरत पड़ने पर कई महीनों तक. अगर यह बीमारी तेजी से फैलने लगी तो आपके शरीर का कोई अंग काटना पड़ सकता है. आमतौर पर यह हाथों या पैर में होता है. कई बार तो इससे पीड़ित लोगों की 20 से ज्यादा सर्जरी करनी पड़ती है. (फोटोःगेटी)
मांस खाने वाली बीमारी बुरूली अल्सर (Flesh Eating Disease Buruli Ulcer) से पीड़ित रह चुकी शेरिल माइकल बताती हैं कि उन्हें यह बीमारी अगस्त 2020 में हुई थी. तब से अब तक वह इसका इलाज करवा रही हैं. स्टेरॉयड्स की वजह से वो काफी डिप्रेशन में रहती हैं. थकी हुई रहती हैं. एंटीबायोटिक्स की वजह से उन्हें पेट संबंधी दिक्कतें होने लगी हैं. कहती हैं कि मैं अपने टॉयलेट से बहुत दूर जाकर नहीं रही सकती. (फोटोःगेटी)
बुरुली अल्सर (Buruli Ulcer) से पीड़ित लोगों को ठीक करने के लिए डॉक्टर दवाइयों और सर्जरी का सहारा लेते हैं. लेकिन इस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए क्या करना चाहिए इसका जवाब डॉक्टरों और साइंटिस्ट्स को नहीं है. अभी तक ये तो पता है कि इस बीमारी का बैक्टीरिया किस जीव में मिलता है. लेकिन वह उस जीव से इंसानों तक कैसे पहुंचता है इसका पता नहीं चल पाया है. (फोटोःगेटी)
WHO ने मांस खाने वाली बीमारी बुरूली अल्सर (Flesh Eating Disease Buruli Ulcer) को नेगलेक्टेड डिजीज (Neglected Disease) की श्रेणी में रखा था. यानी इस बीमारी को नजर अंदाज किया जा सकता है. बुरुली अल्सर के बारे में सबसे पहले 1897 में जानकारी मिली थी. तब यूगांडा के बहुत से गरीब लोगों की इस बीमारी की वजह से जान गई थी. ऑस्ट्रेलिया में यह बीमारी 1948 के विक्टोरिया में पहली बार रिपोर्ट की गई. (फोटोःगेटी)