अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने ऐसा रोवर बनाया है जो अपना आकार बदल सकता है. ये ठीक हॉलीवुड फिल्म ट्रांसफॉर्मर्स की गाड़ियों की तरह है. ऐसे देखने में तो ये चार पहियों का रोवर दिखता है लेकिन इसके हिस्से अलग हो जाते हैं. जाकर अपना काम करते हैं और वापस आकर फिर एक चार पहियों वाला रोवर बन जाते हैं. नासा की योजना इसे मंगल ग्रह पर भेजने की है. फिलहाल इसका परीक्षण मोजावे रेगिस्तान में किया जा रहा है. (फोटोःNASA/DuAxel)
इस रोवर का नाम है डूएक्सल (DuAxel). यह Dual Axel का छोटा नाम है. इस रोवर में दो पहियों वाले रोवर्स का एक जोड़ा है. दोनों एक मुख्य हिस्से के दो तरफ जुड़े हैं. पूरी तरह से जुड़ा हुए होने पर ये चार पहियों वाला रोवर लगता है लेकिन इसके दो पहियों वाला दोनों हिस्सा अलग-अलग दिशाओं में जाकर खोजबीन कर सकता है. (फोटोःNASA/DuAxel)
डूएक्सल (DuAxel) मुख्य हिस्से से अलग जरूर होता है लेकिन इसमें एक लंबा टेथर यानी लंबा तार लगा होता है, जो इसे कहीं भी जाने और वापस आने में मदद करता है. यानी मुख्य हिस्सा अगर किसी पहाड़ी पर स्थित है तो इसके दोनों रोवर एक साथ पहाड़ की गहराई और ऊंचाई पर जा सकते हैं. काम खत्म होने पर मुख्य हिस्सा दोनों रोवर को वापस खींच लेगा. (फोटोःNASA/DuAxel)
टेथर एक तरीके का एंकर है ताकि डूएक्सल (DuAxel) कहीं अलग जाकर फंसे नहीं, खराब न हो या क्षतिग्रस्त न हो. नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) ने इस रोवर की जांच मोजावे रेगिस्तान में की है. यह रेगिस्तान मंगल ग्रह के सतह की तरह है. यहां तीखे पहाड़, नुकीले पत्थर, तेज ढलान, गहरी खाइयां आदि हैं. यहां परीक्षण करने पर रोवर की सही जांच होती है. (फोटोःNASA/DuAxel)
JPL की रोबोटिक्स इंजीनियर इस्सा नेसनैस ने बताया कि डूएक्सल (DuAxel) ने मोजावे रेगिस्तान में जो काम किया, वो काम आजतक किसी रोवर ने नहीं किया. यह किसी भी तरह की सतह पर जाने के लिए तैयार है. कहीं भी चढ़ सकता है, उतर सकता है. तस्वीरें ले सकता है, नक्शे बना सकता है. यह एकदम ट्रांसफॉर्मर की तरह काम करता है. (फोटोःNASA)
इस्सा ने बताया कि हम इसे चंद्रमा, मंगल या किसी भी अन्य ग्रह के पथरीले रास्तों पर उतार सकते हैं. यह लगभग वर्टिकल चढ़ाई को भी पार कर सकता है. पहियों वाले दोनों हिस्सों को अलग-अलग हम एक्सेल बुलाते हैं. जब एक्सेल कहीं जाच करते हैं उस समय मुख्य हिस्सा खुद को जमीन से जोड़ लेता है ताकि एक्सेल कहीं उसे खींचे न. (फोटोःNASA/DuAxel)
एक्सेल एक खुद से चलने वाला रोबोट है, जो एक टेथर के जरिए अपने मुख्य हिस्से से जुड़ा रहेगा. अपना काम खत्म करने के बाद एक्सेल वापस आकर अपने मुख्य हिस्से से जुड़ जाएगा. ऐसे एक्सेल बनाने की वजह से अब रोवर में रोबोटिक आर्म की जरूरत खत्म हो गई है. इससे रोवर का वजन भी कम होगा और यह रॉकेट में जगह भी कम घेरेगा. (फोटोःNASA/DuAxel)
जेपीएल के रोबोटिक टेक्नोलॉजिस्ट और डूएक्सल (DuAxel) रोवर को बनाने वाली टीम के सदस्य पैट्रिक मैक्ग्रे कहते हैं कि इससे अब हमारी ये समस्या खत्म हो जाएगी की हम किसी गलत जगह रोवर को लैंड करा रहे हैं. अगर उस ग्रह की सतह थोड़ी बहुत गड़बड़ भी होगी तो कोई दिक्कत नहीं होगी. डूएक्सल (DuAxel) एक ट्रांसफॉर्मिंग रोबोट है जो स्पेस एक्सप्लोरेशन के लिए ही बनाया गया है. (फोटोःNASA/DuAxel)
वैसे तो डूएक्सल (DuAxel) को मंगल ग्रह के हिसाब से बनाया गया है लेकिन इसके काम को देखते हुए नासा के सांइटिस्ट इस बात से खुश है कि इसे किसी भी ग्रह पर भेजा जा सकता है. यह हमारे सौर मंडल के किसी भी ग्रह पर खोजबीन करने लायक है. यह चंद्रमा, बुध, या बृहस्पति के चांद यूरोपा की बर्फीली सतह पर भी उतारा जा सकता है. (फोटोःNASA/DuAxel)
डूएक्सल (DuAxle) की जांच जमीन पर तो सफल रही है लेकिन अब इसे अपने स्पेस स्टेशन की तलाश है, जहां इसे काम करना है. यानी उस ग्रह की जहां इसे जाकर खोजबीन करना है. नासा में डूएक्सल (DuAxle) रोवर को लेकर काफी ज्यादा उत्साह देखने को मिल रहा है. क्योंकि ये रोवर फ्लिप भी कर सकता है. यानी चढ़ता हुआ रोवर वापस लौट सकता है वह भी बिना संतुलन खोए. (फोटोःNASA/DuAxle)
डूएक्सल (DuAxel) की सबसे अच्छी बात ये है कि यह गड्ढे में भी जा सकता है. अपने रास्ते में आने वाली चीजों को देख कर रास्ता बदल सकता है. इसके अंदर मौजूद कैमरे रास्ता दिखाने और नक्शा बनाने में मदद करते हैं. वहीं कुछ यंत्र ऐसे हैं जो मिट्टी और सतह में मौजूद धातुओं की जांच कर सकते हैं. (फोटोःNASA/DuAxel)