एक समय था जब नक्सलियों का गढ़ कहे जाने वाले झारखंड के जमशेदपुर के बगुडिया गांव, 2007 में सुर्खियों में आया. इसी गांव में सांसद सुनील महतो की नक्सलियों ने हत्या कर दी. जहां दिन में सिर्फ जवानों के बूटों की आवाज आती थी. लेकिन नक्सलवाद के खात्मे के बाद विकास की नई किरण सामने आई है, जहां महिलाओं का एक सेल्फ हेल्प ग्रुप लाखों रुपये कमा रहा है.
महिलाओं के सेल्फ हेल्प ग्रुप ने 70 एकड़ की बंजर जमीन पर लेमन ट्री लगाए हैं. इस फसल से महिलाएं अच्छा व्यापार कर रही हैं. उससे लाखों रुपये कमा रही हैं. इस फसल से लेमन ट्री से पहले तेल निकाला जाता है फिर उससे सेन्टेड साबुन और सेंट बनाया जाता है.
दरअसल, ये मामला जमशेदपुर से करीबन 60 किलोमीटर दूर घाटशिला के बगुडिया इलाके का है. जिसे एक समय में नक्सलियों की शरणस्थली माना जाता था. बंगाल और झारखंड का नक्सली दस्ता दिन में भी यहां दिख जाता था. अब समय बदला नक्सलियों के खात्मे के बाद गांव की महिलाओं ने अपना एक एसएसजी ग्रुप बनाया है.
इस ग्रुप ने जेएसपीएल के सहयोग से गांव की बंजर भूमि में लेमन ट्री लगाए हैं. लेमन ट्री की खासियत यह है कि आप एक बार इस पेड़ को लगा दें फिर इस पेड़ की चार से पांच बार कटिंग करके फसल का लाभ पा सकते हैं. यह पेड़ करीब 4 साल रहता है.
लेमन ट्री की फसलों के उत्पादन के बाद इसे कोलकाता और मद्रास के लोग आ कर ले जाते हैं. इस फसल से वहां के लोग तेल निकालते हैं जो कि प्रति लीटर 1000 रुपये के दर से बिकता है. इस तेल से सेन्टेड साबुन और डीओ बनाया जाता है. इसकी मार्केट में काफी मांग है. महिलाओं का ये सेल्फ हेल्प ग्रुप एक बार में एक लाख रुपये की फसल बेचता है.
स्थानीय निवासी अमित महतो का कहना है कि हम लोगों ने गांव की महिलाओं एक समूह बनवाया और बंजर भूमि पर लेमन की खेती करवाई है जिससे हमको काफी लाभ हो रहा है. शिव दास घोष का कहना है कि हम लोगों ने 70 एकड़ बंजर भूमि को खोजा और गांव में करीब 200 महिलाओं को जोड़ कर एक महिला समूह तैयार किया. जिससे अब महिलायें लेमन ट्री की खेती कर रही हैं और लाखों का मुनाफा कमा रही हैं.