प्लास्टिक का कचरा कितना भयावह हो सकता है, इसका अंदाजा लगाना है तो सर्बिया के पॉटपेको लेक की तस्वीरें देखिए. जहां तक नजर जाएगी सिर्फ प्लास्टिक का कचरा. पानी के ऊपर जैसे किसी ने गंदगी की चादर बिछा दी हो. अब आशंका ये है कि यह कचरा वहां मौजूद हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट का काम रोक सकता है. इसलिए सर्बिया की सरकार ने स्थानीय प्रशासन को आदेश दिया है कि इसे तत्काल साफ कराया जाए. (फोटोः रॉयटर्स)
ये कचरा एक दिन में जमा नहीं हुआ, कई सालों से इस लेक में प्लास्टिक का कचरा आ रहा है. पहले थोड़ा था तो डैम पर काम करने वाले लोग या स्थानीय प्रशासन साफ कर देता था. अब इस कचरे इतना विकराल रूप धारण कर लिया है कि पानी दिखता तक नहीं. पूरे लेक के ऊपर अब सिर्फ प्लास्टिक ही प्लास्टिक दिखाई देता है. (फोटोः रॉयटर्स)
इस लेक के पास ही रहने वाली पर्यावरण कार्यकर्ता सिनिसा लाकोविक का अंदाजा है कि पॉटपेको लेक (Potpecko Lake) के ऊपर करीब 20 हजार क्यूबिक मीटर प्लास्टिक का कचरा मौजूद है. ये सारा कचरा लिम नदी से बहते हुए यहां तक आकर जमा हो गया है. (फोटोः रॉयटर्स)
सिनिसा लाकोविक का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है. यह समस्या कई दशकों से हैं लेकिन प्रशासन, सरकार और लोग इसका ध्यान नहीं रखते. स्थानीय निवासी मार्को काराजिक कहते हैं कि यह एक इकोलॉजिकल डिजास्टर है. हालांकि, देश सर्बिया की पर्यावरण मंत्री इरिना वुजोविक ने कहा कि इस हफ्ते के अंत से सफाई का काम शुरू हो जाएगा. (फोटोः रॉयटर्स)
सर्बिया और अन्य बाल्कन देश 1990 में चले युद्ध और आर्थिक मंदी से अब भी उबर रहे हैं. उनके पास पर्यावरण संबंधी समस्याओं को सुलझाने के लिए इतने पैसे नहीं है. इसलिए पॉटपेको लेक (Potpecko Lake) की ऐसी हालत हो गई है. (फोटोः गेटी)
सर्बिया को अपने पर्यावरण संबंधी कानूनों को सुधारना होगा. तब कहीं जाकर यूरोपियन यूनियन से अरबों रुपयों का निवेश मिलेगा. इस निवेश का उपयोग पर्यावरण संबंधी विकास कार्यों में किया जाएगा. फिलहाल, सर्बिया ऐसी हालत में नहीं है कि वह कानून में किसी तरह का सुधार इतनी जल्दी कर दे. (फोटोः गेटी)
पॉटपेको लेक (Potpecko Lake) पर बने हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट से आसपास के कई शहरों में बिजली की सप्लाई होती है. बांध के ऊपरी हिस्से में प्लास्टिक का कचरा जमा है. बांध के दरवाजे थोड़े ही खोले गए हैं ताकि पानी निकल सके. अगर कचरा पानी के साथ टरबाइन तक पहुंच गया तो बड़ा हादसा हो सकता है. इसलिए अब बांध की सफाई बेहद जरूरी हो गई है. (फोटोः गेटी)