दुनिया की सबसे मशहूर पॉर्न वेबसाइट में शुमार पॉर्नहब विवादों में है. इस कंपनी पर 34 महिलाओं ने मुकदमा ठोक दिया है. इन महिलाओं का दावा है कि उनके अश्लील वीडियो को उनकी बिना सहमति के इस वेबसाइट पर अपलोड किया गया था और इससे कंपनी आर्थिक मुनाफा भी कमा रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर/Getty Images)
इन महिलाओं ने पॉर्नहब की पेरेंट कंपनी माइंडगीक पर आरोप लगाया है कि वे एक आपराधिक बिजनेस चला रहे हैं. वही पॉर्नहब ने अपने एक बयान में इस बात को 'पूरी तरह से बेतुका, लापरवाह और सफेद झूठ' बताया है. सीबीएस न्यूज ने इन 34 में से 4 महिलाओं से बात की है. इन महिलाओं का कहना है कि सोशल मीडिया पर इस कंपनी के खिलाफ बोलने पर उन्हें ट्रोल या डिस्क्रेडिट कर उन्हें चुप कराने की कोशिश की जाती है.
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इन महिलाओं ने ये मुकदमा अमेरिका के शहर कैलिफॉर्निया में दायर किया है. बीबीसी के साथ बातचीत में पॉर्नहब वेबसाइट का कहना था कि हमारी वेबसाइट में गैर-कानूनी कंटेंट को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है और हम ऐसे मामलों में कड़ा एक्शन लेते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर/Getty Images)
इन 30 से अधिक महिलाओं में से एक महिला ने सीबीएस के साथ बातचीत में कहा कि वे जब 17 साल की थीं तब उनके बॉयफ्रेंड ने धोखे से उनकी न्यूड वीडियो बना दी थी और पॉर्नहब पर अपलोड कर दी थी. इस महिला को तो इस वीडियो के बारे में काफी समय बाद अपने एक दोस्त से पता चला था. (प्रतीकात्मक तस्वीर/Getty Images)
गौरतलब है कि साल 2019 में इस वेबसाइट पर 42 बिलियन व्यू आए थे और 60 लाख से अधिक वीडियोज को अपलोड किया गया था. सीबीएस के अनुसार, इस साइट पर कंटेंट डालने से पहले यूजर्स को आइडेंटिटी भी वेरीफाई नहीं करनी पड़ती है और ना ही वीडियो में दिखने वाले लोगों की अनुमति की कोई जरूरत पड़ती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर/Getty Images)
इस केस में पॉर्नहब की पेरेंट कंपनी माइंडगीक को आरोपी बनाया गया है. बता दें कि पॉर्नहब फ्री टू यूज वेबसाइट हैं और इस साइट पर इस साइट के कम्युनिटी से जुड़े लोग ही कंटेंट डालते हैं. कंपनी का ये भी कहना है कि इन सभी वीडियो को मॉडरेटर्स बारीकी से रिव्यू भी करते हैं. काफी विरोध के बाद अब इस साइट पर कंटेंट अपलोड करने के लिए एक आईडी देनी पड़ती है लेकिन अब भी वीडियो में मौजूद लोगों से किसी तरह की अनुमति नहीं ली जाती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर/Getty Images)
ये पहली बार नहीं है जब पॉर्नहब पर गंभीर आरोप लगे हों. पिछले साल ही न्यूयॉर्क टाइम्स की जांच में सामने आया था कि इस वेबसाइट पर बाल शोषण और रेप से जुड़े वीडियोज को भी देखा जा सकता है. हालांकि वेबसाइट ने उस समय अपनी वेबसाइट से लाखों वीडियो डिलीट किए थे और फिर इस दावे को पूरी तरह से नकार दिया था. (प्रतीकात्मक तस्वीर/Getty Images)
इनमें से 14 महिलाओं का कहना था कि जब उनके वीडियो अपलोड हुए थे तो वे नाबालिग थीं. इनमें ज्यादातर महिलाएं यूएस, थाइलैंड, कनाडा, कोलंबिया और यूके की हैं. इन महिलाओं का कोर्ट में प्रतिनिधित्व माइकल बोवे नाम के वकील कर रहे हैं. माइकल का मानना है कि इस वेबसाइट ने सैकड़ों महिलाओं की शोषण से भरी वीडियो के सहारे करोड़ो-अरबों रुपयों का बिजनेस किया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर/Getty Images)