कहते हैं ऊपर वाला सर देख कर सरदारी देता है. क्योंकि बड़ी जिम्मेदारियां मजबूत कंधों पर ही अच्छी लगती हैं. अंबाला एयरफोर्स स्टेशन भारतीय वायुसेना के नए राफेल फाइटर जेट का घर होगा. सिर्फ अंबाला ही क्यों चुना गया राफेल जैसे घातक और अत्याधुनिक फाइटर जेट का बेस बनाने के लिए. क्योंकि अंबाला ही वो जगह है, जहां से हमारे देश के दोनों दुश्मनों को कुछ मिनटों पर धूल चटाई जा सकती है. आइए जानते हैं इस स्टेशन के गौरवशाली इतिहास को...
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अंबाला एयरफोर्स स्टेशन भारतीय वायुसेना का वो एयरफोर्स स्टेशन है जिसे पाकिस्तान ने तबाह करने की साजिश रची थी. लेकिन पाकिस्तान कुछ कर पाता उससे पहले हमारे जवानों ने उसकी बदनीयत को जमींदोज कर दिया था. (फोटोः रॉयटर्स)
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अंबाला एयरफोर्स स्टेशन भारतीय वायुसेना के पश्चिमी एयर कमांड के तहत आता है. साल 1965 और 71 की लड़ाई हो या 1999 में करगिल की जंग, अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से उड़े लड़ाकू विमानों ने दुश्मन के छक्के छुड़ाए हैं.
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देश की आजादी के बाद अंबाला में पहली एयरस्ट्रिप बनाई गई. यहां पर उस समय सेपेकैट जगुआर फाइटर जेट्स के स्क्वाड्रन 5 और स्क्वाड्रन 14 थे. यहीं पर उस समय के सबसे खतरनाक फाइटर जेट्स मिस-21बाइसन का भी बेस था. (फोटोः रॉयटर्स)
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1948 में ही फ्लाइंग इंस्ट्रक्शन स्कूल बनाया गया लेकिन 1954 में इसे चेन्नई के पास तम्बरम में शिफ्ट कर दिया गया. अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से भारत-पाक की सीमा सिर्फ 220 किलोमीटर है जबकि, चीन की सीमा यहां से करीब 450 किलोमीटर है. यानी कुछ ही मिनटों पर एक्शन के लिए हमारे फाइटर जेट्स तैयार.
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देश भर में 60 एयर स्टेशन हैं. जिनमें अंबाला एयरफोर्स स्टेशन वायुसेना की लिस्ट में दूसरे नंबर पर आता है. ये सारे एयरफोर्स स्टेशन भारतीय वायुसेना के 7 कमांड्स के अधीन हैं. जो अलग-अलग समय पर जरूरत पड़ने पर काम करते हैं.
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अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से ही वो मिराज फाइटर जेट्स उड़ाए गए थे जिन्होंने पाकिस्तान के बालाकोट में एयरस्ट्राइक की थी. दुश्मन की सीमा में जाकर 30 मिनट में मिशन पूरा करे सारे मिराज फाइटर जेट्स वापस आ गए थे. (फोटोः रॉयटर्स)
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भारतीय वायुसेना के पश्चिमी एयर कमांड में आने वाले अंबाला एयरफोर्स स्टेशन ने 1947-48 में कश्मीर में ऑपरेशन किए, जब पाकिस्तानी घुसपैठियों को भगाया. 1962 में भारत-चीन युद्ध में बहादुरी दिखाई. 1965 और 1971 में पाकिस्तान को धूल चटाई. इसके अलावा इसी कमांड से श्रीलंका में 1986 में ऑपरेशन पवन और 1999 में करगिल में ऑपरेशन सफेद सागर चलाया गया था. (फोटोः गेटी)
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1965 में पाकिस्तान ने जंग के समय अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भी बम गिराए थे. 20 सितंबर 1965 को तड़के 3 बजे पाकिस्तान के फाइटर जेट ने अंबाला एयरबेस को निशाना बनाया. मकसद अंबाला एयरबेस को ध्वस्त करना था लेकिन जो बम गिरा वो चर्च पर गिरा. (फोटोः गेटी)
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सबसे खतरनाक लड़ाई हुई थी 1971 में. इस जंग में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन को उजाड़ने का पाकिस्तान ने पूरा प्रयास किया था. पाकिस्तानी एयरफोर्स ने 3 दिसंबर 1971 को शाम 5 बजकर 47 मिनट पर श्रीनगर पर 12 सेबर फाइटर जेट से, अमृतसर में चार मिराज और पठानकोट पर चार सेबर से हमला किया. शाम 6 बजे से सुबह 4.30 तक पाकिस्तान ने 60-70 सॉ़र्टी मारी.
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पाकिस्तान ने इस दौरान अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर पांच हमले किए. अमृतसर पर दो. अवंतीपुर, फरीदकोट, हलवाड़ा, सिरसा और सरसावा पर भी हमले किए. लेकिन ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाए. सिर्फ अमृतसर के रनवे का कुछ हिस्सा खराब हुआ था. (फोटोः रॉयटर्स)
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इन हमलों के ठीक बाद 14 दिसंबर 1971 को फ्लाइंग ऑफिसर निर्मल जीत सिंह सेखों अपने जीनैट विमान के साथ रूटीन फ्लाइंग पर थे. अचानक उनपर पाकिस्तान के 6 सेबर फाइटर जेट ने हमला कर दिया. निर्मल जीत सिंह सेखों ने दो फाइटर जेट मार गिराए. लेकिन तब भी चार फाइटर जेट्स उन्हें घेरकर हमला करते रहे. (फोटोः भारतीय वायुसेना)
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निर्मल जीत सिंह सेखों ने अंतिम दम तक उन पाकिस्तानी फाइटर जेट्स से संघर्ष करते रहे. सेखों इकलौते वायुसैनिक हैं, जिन्हें परमवीर चक्र मिला हुआ है. (फोटोः भारतीय वायुसेना)
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1971 के युद्ध को एयरफोर्स का फाइनेस्ट ऑवर कहा जाता है. 14 दिन की लड़ाई में वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने 11,549 उड़ानें भरीं. इस दौरान 4509 सिर्फ पश्चिमी एयर कमांड से भरी गईं. हवा से इतने बम और रॉकेट दागे कि पाकिस्तानी फौज को घुटनों के बल आना पड़ा. पाकिस्तानी फोर्स के इंचार्ज लेफ्टिनेंट जनरल एएके नियाजी ने भारतीय सेना के सामने सरेंडर किया. (फोटोः रॉयटर्स)