कहा जाता है कि पहला सुख निरोगी काया. इस बात का अर्थ राजस्थान के बाड़मेर जिले में रहने वाले ललित सोनी से ज्यादा अच्छे से कोई नहीं समझ सकता क्योंकि ललित को जो बीमारी है वो करोड़ों लोगों में किसी एक या दो को ही होती है. बीमारी का नाम है पोम्पे रोग. ये बीमारी कितनी गम्भीर है, इसका अंदाजा इस बात से लग सकता है कि इसके इलाज में सालाना 2 करोड़ 75 लाख का खर्चा आता है.
हैरत की बात तो ये है कि ललित का बड़ा भाई भी पोम्पे रोग से ग्रसित था और एक साल पहले इस दुर्लभ बीमारी से जूझते हुए उसकी मौत हो गई. अब ललित अपने मां-बाप का इकलौता सहारा है और वो भी इस बीमारी से ग्रसित है.
सोशल मीडिया पर बाड़मेर के लोग ललित को बचाने के लिए देश के प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री, विधायक हर किसी से गुहार लगा रहे है कि सरकार को ललित को दुर्लभ बीमारी से बचाने के लिए आगे आना चाहिए और इस बीमारी में जो इंजेक्शन अमेरिका से आता है, उसका ख़र्च सालाना 2 करोड़ 75 लाख आता है, उसको खर्च को वहन करना चाहिए.
ललित के परिवार के पास जो भी पैसा था वो सब दोनों बेटों की दवाई, रिपोर्ट में चला गया और अब परिवार के पास कुछ भी नहीं बचा. ललित के पिता चंपालाल निजी कंपनी में काम करते है और बताते है कि बड़े बेटे को भी यही बीमारी थी, उसने तो 8-10 साल निकााल दिए और पिछ्ले साल ही उसकी मौत हुई.
ललित के पिता ने बताया कि ललित के शरीर में ये बीमारी दिन-ब-दिन फैलती जा रही है. इसका एकमात्र उपचार अमेरिका से टीके मंगवा कर लगवाना है. मैंने प्रधानमंत्री से लेकर सभी नेताओं से मदद मांगी है कि मेरा एक बेटा तो पहले ही चला गया, अब मेरा आखिरी सहारा बचा है अगर सरकार चाहे तो बेटा बच सकता है.
डॉक्टर महेंद्र चौधरी बताते है कि ग्लाइकोजन स्टोरेज डिसऑर्डर 2 यानी पोम्पे रोग है. ये करोड़ों में एक को होता है. पोम्पे रोग में शरीर की सेल्स में ग्लाइकोजन नाम का कॉम्प्लेक्स शुगर एकत्रित होता है. शरीर इस प्रोटीन का निर्माण नहीं कर पाता. इसका एकमात्र विकल्प एंजाइम थेरेपी है जिसमें एक साल में 26 इंजेक्शन लगते है.
ललित के मामा नरेश ने बताया कि 6 महीने पहले जब टेस्ट कराया तो पता लगा कि इसको भी वही बीमारी है जो इसके बड़े भाई को थी. इसमें 24 घंटे में से 16 घंटे ऑक्सीजन पर रखना पड़ता है.