लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अपनी आक्रामकता और भारत की जमीन हड़पने की कोशिश पर चीन अब पूरी दुनिया में घिरता जा रहा है. इस मुद्दे पर अमेरिका खुलकर भारत के साथ खड़ा हो गया है. दो शक्तिशाली अमेरिकी सीनेटरों के एक द्विदलीय समूह ने गुरुवार को इन दोनों एशियाई देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति को बदलने के लिए भारत के प्रति चीन की आक्रामकता की निंदा करते हुए सीनेट में एक प्रस्ताव पेश किया है.
सीनेटर जॉन कॉर्निन और सीनेटर मार्क वार्नर ने यह प्रस्ताव पेश किया. कॉर्निन जहां रिपब्लिकन सीनेट मेजॉरिटी व्हिप हैं वहीं वॉर्नर इंटेलिजेंस पर सीनेट सेलेक्ट कमेटी के सदस्य हैं. उन्होंने अपने प्रस्ताव में चीनी सैन्य बलों का उदाहरण दिया कि कैसे भारतीय गश्ती दलों को रोक कर चीन सैन्य तैनाती और बुनियादी ढांचे के निर्माण में वृद्धि कर रहा है. कॉर्निन और वार्नर सीनेट इंडिया कॉकस के सह अध्यक्ष भी हैं.
कॉर्निन ने कहा, "सीनेट इंडिया कॉकस के सह-संस्थापक के रूप में, मैं पहली बार संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच एक मजबूत रिश्ते के महत्व को जानता हूं." “मैं चीन के विस्तारवाद के खिलाफ खड़े होने और स्वतंत्र और खुले प्रशांत क्षेत्र को बनाए रखने के लिए भारत की प्रतिबद्धता की सराहना करता हूं. यह पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है कि हम अपने भारतीय सहयोगियों का समर्थन करें क्योंकि वे चीनी आक्रमण के खिलाफ मुस्तैदी से खड़े हैं.”
भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर कई क्षेत्रों में 5 मई से ही गतिरोध बना हुआ है. 15 जून को गलवान घाटी में दोनों सैनिकों के बीच झड़प हुई थी जिसमें भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे जबकि चीन ने अपने मारे गए सैनिकों का आंकड़ा जारी नहीं किया.
इस घटना को लेकर वार्नर ने कहा, "चीन और भारतीय सैनिकों के बीच 15 जून का संघर्ष, विवादित क्षेत्र में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के उत्तेजक कार्यों को खतरे की घंटी के तौर पर देखा जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, "यह प्रस्ताव वास्तविक नियंत्रण रेखा को बदलने के लिए चीन के कार्यों की निंदा करता है, विशेष रूप से दोनों देशों के बीच राजनयिक वार्ता में दोनों देशों को एक राजनयिक विकल्प खोजने के लिए प्रोत्साहित करता है जिससे LAC पर अप्रैल 2020 की स्थिति को बहाल किया जा सके. अमेरिका ने लंबे समय से साझा लोकतांत्रिक मूल्यों से मजबूत भारत के साथ साझेदारी की है. वार्नर ने कहा, "यह साझेदारी महत्वपूर्ण है क्योंकि हम एक स्वतंत्र और खुले भारत-प्रशांत क्षेत्र को सुनिश्चित करने के लिए काम करते हैं."