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इन तीन पर 'भगवा आतंकवाद' का आरोप, अब हैं जेल से बाहर

इन तीन पर 'भगवा आतंकवाद' का आरोप, अब हैं जेल से बाहर
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एनआईए की एक विशेष अदालत ने 2007 मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में स्‍वामी असीमानंद सहित पांच आरोपियों को बरी किया जाने के बाद भगवा आतंकवाद शब्‍द फिर से चर्चा में है. हालांकि इस बार बीजेपी हमलावर मुद्रा में है और कांग्रेस पार्टी पर जोरदार प्रहार कर रही है.
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बीजेपी ने कांग्रेस पर हिंदू आतंकवाद के नाम पर हिंदू धर्म को बदनाम करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है. वहीं इस मामले में बरी हुए स्‍वामी असीमानंद अकेले शख्‍स नहीं हैं जिनपर भगवा आतंकवाद का चेहरा होने का आरोप लगा है. 2007 अजमेर दरगाह ब्‍लास्‍ट, 2007 हैदराबाद की मक्का मस्जिद, 2007 समझौता एक्‍सप्रेस ब्‍लास्‍ट, 2008 मालेगांव ब्‍लास्‍ट जैसे कई उदाहरण हैं जिन मामलों में भगवा आतंकवाद होने का आरोप सामने आया है. आइए जानते हैं कौन हैं वे लोग जिनपर भगवा आतंकवाद को आगे बढ़ाने का आरोप है और आज वे कहां हैं...
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साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पर भी भगवा आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप है. 29 सितंबर, 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए ब्लास्ट में 6 लोग मारे गए थे, जबकि 79 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. इस मामले में दायर की गई चार्जशीट में 14 आरोपियों के नाम थे. ब्लास्ट के लिए आरडीएक्‍स देने और साजिश रचने के आरोप में साध्वी प्रज्ञा को गिरफ्तार कर लिया गया था. 15 अप्रैल, 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को पलटकर मकोका को हटा दिया. कोर्ट ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं हैं. 25 अप्रैल, 2017 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सशर्त जमानत दे दी है.
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स्वामी असीमानंद ने 2011 में मजिस्ट्रेट को दिए इकबालिया बयान में स्वीकार किया था कि अजमेर दरगाह, हैदराबाद की मक्का मस्जिद और कई अन्य जगहों पर हुए बम ब्लास्ट में उनका और कई अन्य हिंदू चरमपंथी संगठनों का हाथ है. हालांकि बाद में असीमानंद अपने बयान से पलट गए और कहा कि उन्होंने पिछला बयान NIA के दबाव में दिया था. अब असीमानंद को भी मक्‍का मस्‍ज‍िद केस से बरी का दिया गया है.
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वहीं जतिन चटर्जी उर्फ नबाकुमार सरकार उर्फ स्वामी ओंकारनाथ उर्फ स्वामी असीमानंद. इस आदमी के जितने नाम हैं, आतंक फैलाने के उतने ही मामलों से भी जुड़ा है यह शख्स. 2007 में हैदराबाद में मक्का मस्जिद में विस्फोट हो, इसी साल अजमेर दरगाह में विस्फोट हो या समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट या 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में विस्फोट, आतंक फैलाने की इन सभी वारदातों में स्वामी असीमानंद के ऊपर आरोप लगे हैं. इन्हीं में से मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में आज हैदराबाद में NIA की विशेष अदालत अपना फैसला सुनाने वाली है.
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पुरोहित पर सेना का 60 किलो आरडीएक्स चुराने, अभिनव भारत को फंडिंग करने और संगठन के लोगों को ट्रेनिंग देने का आरोप भी लगा. 5 नवंबर 2008 को  गिरफ्तार कर लिया गया था. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मकोका के तहत लगे सभी धाराओं को हटा लिया था. नौ साल जेल में बिताने के बाद अगस्‍त 2017 में पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है. मालेगांव ब्लास्ट केस में आरोपी कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित नवी मुंबई की तालोजा जेल से रिहा होने के बाद सेना की दक्षिण कमान यूनिट (खुफिया विंग) को रिपोर्ट की थी. पुरोहित के कुछ आवाजाही पर भी प्रतिबंध हैं, बाकी वे पूरी तरह से आजाद हैं.
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वहीं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के साथ कर्नल प्रसाद पुरोहित का नाम भी भगवा आतंकवाद से जुड़ा है. पुरोहित भी 2008 में हुए मालेगांव विस्फोट मामले में मुख्य अभियुक्त हैं. पुरोहित को 1994 में मराठा लाइट इन्फेंट्री में जगह मिली. बाद में उन्हें मिलिट्री इंटेलीजेंस में शिफ्ट कर दिया गया. 2002 से 2005 के बीच आतंक-विरोधी ऑपरेशन के लिए उन्हें एमआई-25 इंटेलीजेंस फील्ड सिक्योरिटी यूनिट में तैनात किया गया. नासिक में वो रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय के संपर्क में आए. मालेगांव विस्फोट मामले में जेल में बंद उपाध्याय के लिए कहा जाता है कि उन्होंने एक अतिवादी हिंदूवादी संगठन अभिनव भारत बनाया, पुरोहित भी इस संगठन में शामिल हुए.
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जमानत पर रिहा हुईं मालेगांव ब्लास्ट मामले में आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने नौ साल तक जेल में रखे जाने और भगवा आतंकवाद की धारणा के लिए पूर्व की यूपीए सरकार पर आरोप लगाए थे. उन्होंने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम का नाम लेकर कहा था कि कांग्रेस सरकार ने षड्यंत्र के तहत उन्हें फंसाया. साध्वी ने खराब सेहत के लिए एटीएस मुंबई की प्रताड़ना को जिम्मेदार बताया था.
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