कुछ दिनों के बाद स्मार्टफोन, लैपटॉप और पैड्स को चार्ज करने के लिए चार्जर या चार्जिंग केबल की जरूरत नहीं रहेगी. वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक इजाद कर ली है जिससे कमरे में रखे आपके फोन, लैपटॉप आदि खुद-ब-खुद हवा से चार्ज हो जाएंगे. आपको वो सिर्फ चार्ज होते दिखाई देंगे लेकिन उनके साथ कोई केबल या चार्जर जुड़ा हुआ नहीं होगा. आइए जानते हैं इस नई तकनीक के बारे में...
वैज्ञानिकों ने आपके कमरे में ऊर्जा की एक ऐसी किरण को व्यवस्थित तरीके से फैलाने की तकनीक खोजी है जिसे एंटी-लेजर (Anti-Laser) कहा जा रहा है. इसका आइडिया बेहद आसान है. जैसे लेजर लाइट में रोशनी के छोटे-छोटे कण निकलते हैं. इन कणों को फोटोंस कहा जाता है. ये फोटोंस एक लयबद्ध तरीके से निर्धारित दूरी तक एकदूसरे के पीछे चलते हुए आगे बढ़ते हैं. इसलिए आपको लेजर लाइट एकदम सीधी दिखाई देती है. जहां पड़ती है उस तय जगह को जला देती है या रोशन कर देती है.
एंटी-लेजर (Anti-Laser) इसका ठीक उलटा करेगा. वह फोटोंस को खीचेंगा और उन्हें उल्टी दिशा में भेजेगा. अब आप सोचेंगे की एंटी-लेजर से इलेक्ट्रॉनिक चीजें कैसे चार्ज होंगी. तो आपको बता दें कि आपके कमरे की दीवारें, पंखें, धातु की वस्तुएं हमेशा ऊर्जा का उत्सर्जन करती हैं. एंटी-लेजर (Anti-Laser) इसी ऊर्जा को एक लयबद्ध तरीके से जमा करके पूरे कमरे में आप जिस स्थान पर चाहें वहां फेंक देगा. फिर वहां रखा हुआ हर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चार्ज होने लगेगा.
इसे तकनीक को ईजाद किया है ली चेन, सैंपिकोस कोटोस और स्टीवन एम अनाल्गे नाम की तीन वैज्ञानिकों ने. इनके इस तकनीक की रिपोर्ट साइंस मैगजीन नेचर कम्यूनिकेशन में 17 नवंबर को प्रकाशित हुई है. ये तकनीक अभी प्रयोगशाला में सफल हुई है लेकिन इसे बड़े पैमाने पर उपभोक्ता के लायक बनाने के लिए काफी समय लग सकता है. इसके लिए वैज्ञानिकों ने कोहेरेंट परफेक्ट एब्जॉर्प्शन (Coherent Perfect Absorption - CPA) सिद्धांत का उपयोग किया है.
कोहेरेंट परफेक्ट एब्जॉर्प्शन (Coherent Perfect Absorption - CPA) के तहत अलग-अलग उपकरणों से निकलने वाली फोटोंस यानी ऊर्जा को एक जगह जमा करके उन्हें जरूरत वाले इलेक्ट्रॉनिक इंस्ट्रूमेंट्स तक पहुंचाना ही एंटी-लेजर टेक्नोलॉजी कहलाती है. यह कुछ ऐसा ही है जैसे किसी समय में भेजी गई लेजर ऊर्जा को वापस लाना. यानी समय को पीछे करना. लेकिन इसे बनाने वाले साइंटिस्ट कह रहे हैं कि इसमें समय को पीछे करने की जरूरत नहीं है.
अलग-अलग उपकरणों को एक यंत्र में जमा करके उन्हें निर्धारित स्थान पर फेंकने से वहां रखी हुई इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं चार्ज हो जाएंगी. कुछ समय बाद हम इसे इस तरह से विकसित कर सकते हैं कि कमरे में जितनी भी चार्जेबल इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं होंगी वो अलग-अलग जगहों पर रखे रहने के बावजूद चार्ज हो सकेंगी. उन्हें एक ही स्थान पर रखकर एंटी-लेजर फेंकने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
वैज्ञानिकों ने समय को बिना पलटे इस तकनीक को विकसित करने की कोशिश की है. इसके लिए उन्होंने फोटोंस और माइक्रोवेव एनर्जी का उपयोग किया है. इस प्रक्रिया में फोटोंस विभिन्न छोटे-छोटे तारों से होते हुए एक छोटे रिसीवर में जाते हैं. ये एक माइक्रोवेव रिसीवर होता है. इसी में लगे माइक्रोवेव एमिटर से फोटोंस रोशनी की तरह बाहर खुले में निकलते हैं. यही रोशनी वहां मौजूद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को चार्ज करती है.
इस तकनीक के बाजार में आने के बाद सबसे बड़ा फायदा होगा ऊर्जा को बिना किसी तार के कितनी भी दूरी तक भेजा जा सकेगा. दूसरा स्मार्टफोन और लैपटॉप जैसे उपकरणों से चार्जर या चार्जिंग केबल की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसके अलावा सुरक्षा के लहजे से देखें तो ऐसे सेंसिंग डिवाइस बनेंगे जो आपके कमरे में होने वाले बदलावों की सूचना आपको घर से दूर भी दे पाएंगे. जैसे कि कोई सिक्योरिटी कैमरा आपके घर में किसी घुसपैठिए की जानकारी आपको देता है.
इन सबके अलावा एक ऐसा मैसेजिंग सिस्टम बन सकता है जो बेहद सुरक्षापूर्ण तरीके आपके संदेश को छिपे हुए रिसीवर तक पहुंचा देगा. CPA के जरिए भेजे गए मैसेज लगातार अपने कोडिंग नंबर्स बदलते रहेंगे. ये मैसेज सिर्फ वहीं व्यक्ति खोल पाएगा जिसके पास रिसीवर होगा और वो रिसीवर के कोड्स को डिकोड कर पाएगा.