दूल्हे ने कहा कि बचपन से उसने सोच रखा था कि फिजूलखर्ची से बचा जाए, न पैलेस पर खर्च किया जाए, न गाने बजाने पर, न ही शादी में दहेज लिया जाना चाहिए. बचपन के सपने को अब मैंने साकार कर दिया है. इससे दोनों परिवारों का खर्चा खत्म हुआ और परेशानियों से दूर हुए.