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सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़ खोला चाय का ठेला, नाम रखा 'इंजीनियर चायवाला'

इंजीनियर चायवाला.
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आज के इस दौर में युवा अच्छी जॉब की तलाश में भटक रहे हैं. चाहे वह सरकारी जॉब हो या फिर प्राइवेट. ऐसे में एक युवक ने अपनी अच्छी खासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़कर चाय की दुकान खोल ली. वह हर दिन लोगों को लगभग 300 कप चाय पिलाता है और एक चाय का दाम 8 रुपये है. युवक ने अपनी चाय की दुकान में 'इंजीनियर चायवाला' लिखवाया है.

इंजीनियर चायवाला.
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मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा शहर में नगर निगम योजना कार्यालय के पास एक चाय की दुकान है जो आम चाय की दुकान से हट कर है. चाय की यह दुकान चर्चा का विषय बनी हुई है. चाय का यह छोटा सा ठेला है, लेकिन इसमें बड़े शब्दों में लिखा हुआ है इंजीनियर चायवाला.

इंजीनियर चायवाला.
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इस चाय की दुकान में इसके अलावा बहुत कुछ लिखा हुआ है. दुकान में लिखा हुआ है कि वैसे तो मैं सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूं, मैं कई कंपनियों में काम कर चुका हूं जहां पैसे तो मिलते थे लेकिन सुकून नहीं. मैं हमेशा से ही बिजनेस करना चाहता था. कुछ इस प्रकार चाय की दुकान में लिखा हुआ है.

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दरअसल, सबसे अलग और अनूठे अंदाज में चाय की दुकान चलाने वाले अंकित नागवंशी छिंदवाड़ा के रहने वाले हैं. वो घर में सबसे बड़े हैं और उनसे छोटे 3 भाई-बहन हैं. माता-पिता के गुजर जाने के बाद अब अंकित ही अपने छोटे भाई बहनों का सहारा हैं. 

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अंकित नागवंशी ने महाराष्ट्र के नागपुर में रहकर पढ़ाई की और वहीं पर एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी करने लगे. नौकरी के दौरान अपने साथियों के साथ चाय पीने बाहर जाते थे. बात ही बात में एक दिन उन्होंने चाय वाले से पूछ लिया कि चाय से कितना प्रॉफिट हो जाता है तो चाय वाले ने बताया डेढ़ से दो लाख रुपये कमा लेते हैं. उन्होंने चाय वाले की बात को ध्यान में रखा और चाय की दुकान खोलने का फैसला किया और सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़कर चाय की दुकान खोल ली.

इंजीनियर चायवाला.
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अंकित नागवंशी का कहना है कि वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और कई कंपनी में काम कर चुके हैं लेकिन वह खुद का व्यवसाय करना चाहते थे इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी. 

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चाय की दुकान खोलने से पहले हिम्मत कर परिवार में खाने-पीने के बिजनेस पर चर्चा की. परिवार ने कहा कठिन है, सोच समझकर निर्णय लो. निर्णय लेने में 3 साल लग गए और आखिरकार जॉब छोड़ दी और चाय से ही रिस्क फ्री बिजनेस शुरू किया. 

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अंकित ने कहा कि पहले मुझे लगा कि लोग क्या कहेंगे लेकिन जब बुरा वक्त आता है तो वही लोग मदद करने नहीं आते, सिर्फ नाम रखे जाते हैं. इससे बेहतर यह है कि कोई भी स्किल है, उसे छुपाओ मत. चाय पीने दुकान पहुंचे ग्राहक आशुतोष का कहना है कि दूसरी दुकानों से अच्छा टेस्ट है.

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