उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार समेत कई राज्यों में युवा बड़ी डिग्री लेने के बाद भी योग्यता से कहीं कम की नौकरी पाने के लिए संघर्तेषरत रहते हैं. यही हाल देश की राजधानी से सटे हरियाणा के नौजवानों का भी है. यहां के उच्च शिक्षा प्राप्त नौजवान भी छोटी सी नौकरी के लिए आवेदन कर है. आपको जानकर हैरानी होगी कि यहां चपरासी की नौकरी के लिए आवेदन करने को हजारों बीटेक एमटेक पास नौजवान पहुंचे थे.
जहां नौजवानों के कंधे पर भारत का भविष्य बताकर राजनेता सत्ता हासिल करते हैं. वहीं नौजवानों के लिए धरातल की तस्वीर बिलकुल उलट है. हाल ही में आठवीं पास योग्यता वाली चपरासी की ग्रुप डी वाली नौकरी निकली थी. जिसके के लिए कई बीए, एमए, बीटेक पास नौजवानों आवेदन किया और घंटों इंटरव्यू के लिए अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए.
दरअसल, हरियाणा में पानीपत कोर्ट में चपरासी के 13 पद निकले थे. 13 पदों के लिए 27 हजार युवा इंटरव्यू देने पहुंचे. यानी औसत एक पद के लिए 2076 युवा संघर्ष करने पहुंचे. वहीं, देश में हर साल 15 लाख बच्चे इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करते हैं लेकिन दावा है 2.5 लाख को ही योग्यता मुताबिक नौकरी मिल पाती है.
हर राज्य की लगभग ऐसी ही तस्वीर है. युवा अपनी योग्यता से बेहद कम स्तर की नौकरी करने के लिए भी तैयार हैं क्योंकि सरकारी भर्तियां आ नहीं रही हैं. परीक्षाएं वक्त पर नहीं होतीं. रिजल्ट लटक जाते हैं. अगर परिणाम आया तो कोर्ट केस में भर्ती अटक जाती है. बेरोजगारों की संख्या बढ़ती जाती है. आलम ये है कि बेरोजगार ज्यादा हैं और नौकरी कम.