भारतीय वायुसेना (IAF) में अत्याधुनिक फाइटर जेट राफेल के शामिल होने के साथ ही चीन और पाकिस्तान की टेंशन बढ़ गई है. इन दोनों देशों की वायु सेना के पास राफेल से मुकाबले लायक कोई फाइटर जेट नहीं जिसकी वजह से दोनों डरे हुए हैं. पाकिस्तान तो राफेल जैसे फाइटर जेट के लिए एक बार फिर अपने चहेते चीन की शरण में जा पहुंचा है. 8 राफेल फाइटर जेट को अब तक भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन 17 में शामिल किया जा चुका है जिससे पाकिस्तान घबराया हुआ है.
राफेल जेट की वजह से पाकिस्तान, चीन से आपातकालीन खरीद के तहत 30 से अधिक जे -10 (सीई) लड़ाकू जेट और मिसाइल खरीदने की कोशिश कर रहा है. सूत्रों के मुताबिक, अक्टूबर में पाकिस्तान की एक टीम ने चीन का दौरा किया और 50 जे -10 (सीई) लड़ाकू जेट खरीदने की चर्चा को अंतिम रूप दिया. अब पाकिस्तान आपातकालीन खरीद के तहत कुल 50 में से 30 जेट और मिसाइल खरीदने की कोशिश कर रहा है.
पाकिस्तान ने चीनी J-10 खरीदने की चर्चा 2009 में शुरू की थी लेकिन JF17 जेट के संयुक्त उत्पादन की बात शुरू होने के बाद इसे रोक दिया गया था. राफेल जेट के भारतीय वायु सेना में आने के बाद, पाकिस्तान ने उस चर्चा को फिर से शुरू किया. सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी अधिकारियों की 13 सदस्यीय टीम 22 अक्टूबर को चीन में इस सौदे को अंतिम रूप देने के लिए गई थी.
J10 (CE) जेट की क्या है विशेषता
J10 (CE) चीनी वायु सेना के J-10 का निर्यात संस्करण है और माना जाता है कि यह 4.5 पीढ़ी का है. J10 को 2006 में चीनी वायु सेना में शामिल किया गया था. यह PL10 और हवा से हवा में मार करने वाली PL15 मिसाइलों से लैस है जो रडार (AESA) की मदद से 250 किमी दूर तक दुश्मन के विमान को निशाना बना सकती है. यह सिंगल-इंजन फाइटर जेट एक बार में 6000 किलोग्राम तक हथियार ले जा सकता है. इस फाइटर जेट में 11 मिसाइल और बम फिट किए जा सकते हैं.
पाकिस्तान की मुख्य चिंताएं राफेल में हवा से हवा में मार करने वाली METEOR मिसाइलें और जमीन पर MICA मिसाइलें हैं. इन मिसाइलों से लैस पाकिस्तानी वायु सेना का कोई फाइटर जेट नहीं है. पाकिस्तानी वायु सेना के पास चेंग्दू जे 7, मिराज 3 और मिराज 5 की सबसे बड़ी संख्या है जो पांच दशक पुराने हैं और इन्हें मिग-21 के समकक्ष माना जा सकता है.
यहां तक कि आधुनिक 110 JF17 और 75 F16 को जोड़ने पर, अच्छे लड़ाकू विमानों की संख्या भारतीय वायु सेना के मिग -29, मिराज 2000 और सुखोई 30 की संख्या के सामने बहुत कम है. राफेल के आगमन के साथ, यह संतुलन पूरी तरह से भारतीय वायु सेना के पक्ष में झुका हुआ है. पाकिस्तानी वायु सेना भी दुनिया की सबसे अच्छे एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर चिंतित है. भारतीय सेना को रूस से 2021 तक एस-400 मिलने की संभावना है.