ओलंपिक में भाग लेना कहीं ना कहीं हर खिलाड़ी का सपना होता है हालांकि कुछ खिलाड़ियों के लिए ये सपना कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण होता है. टोक्यो ओलंपिक्स 2020 में कुछ खिलाड़ी ऐसे भी हैं जिन्होंने अपने देश में छिड़ रहे युद्ध और सिविल वॉर से भागकर दूसरे देश में शरण ली और ओलंपिक टीम में जगह बनाने में कामयाब रहे. (प्रतीकात्मक तस्वीर/getty images)
ये सभी एथलीट्स केन्या की राजधानी नैरोबी में मौजूद गॉन्ग हिल्स में रहते हैं. तेगला लोरुप पीस फाउंडेशन ने इन सभी खिलाड़ियों को तैयार किया है. कई ऐसे भी एथलीट्स हैं जो ओलंपिक्स में पदक पाने की उम्मीद लगा रहे हैं वही कुछ खिलाड़ी अपने देश से इतर बेहतर हालातों में समय बिताकर ही सुकून महसूस कर रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर/getty images)
इंटरनेशनल ओलंपिक कमिटी ने साल 2015 में एक ओलंपिक रिफ्यूजी टीम का निर्माण किया था. इस टीम के सहारे वे उन शरणार्थियों को ओलंपिक्स के लिए प्रेरित करना चाहते थे जिन्हें युद्ध या सिविल वॉर के चलते अपने देशों को छोड़ना पड़ा लेकिन खेल को लेकर उनके जज्बे में कोई कमी नहीं आई. (प्रतीकात्मक तस्वीर/getty images)
साल 2016 में केन्या के पूर्व डिस्टैंस रनर टेगला लौरुप ने इस टीम का प्रतिनिधित्व किया था. इस बार 55 लोगों के पूल से ओलंपिक के लिए 29 शरणार्थी खिलाड़ियों को चुना गया है. ये खिलाड़ी एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, बैडमिंटन, कराटे, शूटिंग, स्वीमिंग, ताइक्वांडो, वेटलिफ्टिंग और रेसलिंग जैसे खेलों में हिस्सा ले रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर/getty images)
इस ओलंपिक में चार ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें टेगला ने प्रशिक्षण दिया है. इस साल दो महिलाएं एथलेटिक्स के लिए भी चुनी गई हैं. लोकोन्येन और लोहालिथ साल 2002 में केन्या में पहुंची थीं. उस समय दोनों की उम्र 8 साल थी. वे दक्षिणी सूडान में चल रही सिविल वॉर के चलते केन्या भागकर आई थीं. (प्रतीकात्मक तस्वीर/getty images)
लोहालिथ ने वाइस न्यूज के साथ बातचीत में कहा कि मैं ये सिर्फ अपने लिए नहीं कर रही हूं. मैं दुनिया भर के 80 मिलियन शरणार्थियों का भी प्रतिनिधित्व कर रही हूं. गौरतलब है कि हाईस्कूल में इन दोनों ने कई रनिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था जिसके बाद टेगला के फाउंडेशन ने उन्हें अप्रोच किया था.
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