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नाक में डालने वाली इस दवा से कोरोना पर लग सकती है लगाम, रिसर्चर ने किया दावा

कोरोना वायरस की काट
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कोरोना वायरस की काट ढूंढने के लिए दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में वैक्सीन पर रिसर्च चल रही है लेकिन किसी भी देश या संस्था को अपेक्षित सफलता नहीं मिली है. हालांकि इसी बीच ब्रिटेन के स्वानसी यूनिवर्सिटी में समुद्री शैवाल की मदद से बनाई गई नाक में डालने वाली दवा ( बूट नेजल स्प्रे) का परीक्षण किया जा रहा जो संभवतः कोरोना वायरस का मुकाबला कर सकती है. इस पर अभी यूनिवर्सिटी में टेस्टिंग जारी है. (तस्वीर -  यूके मिरर)
 

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शहर में 480 फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं पर परीक्षण के बाद कोरोना की बीमारी को रोकने और इसके लक्षणों की गंभीरता को कम करने में दवा की प्रभावकारिता की जांच हो रही है. इस नेजल स्प्रे (नाक में डालने वाली दवा ) की कीमत 5.99 यूरो यानी की करीब  531.76 रुपये है. इस स्प्रे में कैरेटेलोज, आईओट-कैरेजेनन का एक पेटेंट संस्करण और समुद्री शैवाल का इस्तेमाल किया गया है जो पहले से ही सर्दी और फ्लू जैसे लक्षणों पर गंभीरता से काम करता है. (फाइल फोटो)

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वेल्स ऑनलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक स्वानसी यूनिवर्सिटी के अध्ययन की जांच होगी कि क्या यह वायरस से संक्रमित होने के जोखिम को भी कम कर सकता है. क्लिनिकल ट्रायल की प्रमुख जांचकर्ता डॉ जीता जेसोप ने कहा, 'कोरोना वायरस संक्रमितों की देखभाल करने वाले सहकर्मियों पर इस महामारी के प्रभावों को देखने के बाद, हम फ्रंटलाइन एनएचएस कार्यकर्ताओं की सुरक्षा में मदद के लिए यह रिसर्च करना चाहते थे. (तस्वीर- यूनिवर्सिटी वेबसाइट)

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उन्होंने कहा, 'पिछले अध्ययनों ने कोरोना वायरस के खिलाफ इओटा-कैरेजेनन-आधारित नेजल स्प्रे (नाक में डालने वाली दवा) की प्रभावशीलता पर प्रकाश डाला था जो एसएआरएस-कोव -2 जैसे वायरस के खिलाफ सुरक्षा प्रदान कर रहा था. यही वायरस आगे चलकर कोरोना वायरस संक्रमण का कारण बनते हैं.' (फाइल फोटो)

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प्रमुख जांचकर्ता डॉ जीता जेसोप के मुताबिक अगर इस ​​परीक्षण के परिणाम सकारात्मक रहते हैं तो हम उम्मीद कर रहे हैं कि यह कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में एक अतिरिक्त रोकथाम रणनीति के तौर पर काम करेगा और इस महामारी के खिलाफ हमारी लड़ाई मजबूत होगी. (फाइल फोटो)
 

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बता दें कि  Carragelose दुनिया भर में स्वाभाविक रूप उत्पन्न होने वाला लाल समुद्री शैवाल है. सर्दी और फ्लू वायरस के कणों को बाधित करने के लिए यह एक जेल के रूप में नाक में अवरोधक के तौर पर कार्य करता है. चूंकि इस वजह ऐसे कणों को शरीर में प्रवेश करने में दिक्कत होती है इसलिए संक्रमण की संभावना को इससे कम किया जाता है. शरीर में प्रवेश करने वाले वायरस की मात्रा में भी इससे कटौती हो जाती है जिससे बीमारी की गंभीरता को कम करने में मदद मिलती है. (फाइल फोटो)

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अध्ययन का नेतृत्व कोल्ड और फ्लू विशेषज्ञ प्रोफेसर रॉन एक्लेस कर रहे हैं जबकि कार्डिफ़ विश्वविद्यालय में कॉमन कोल्ड सेंटर के पूर्व निदेशक और स्वानसी विश्वविद्यालय में मुख्य जांचकर्ता प्रोफेसर इयान व्हिटेकर, स्वास्थ्य और देखभाल अनुसंधान के सर्जिकल विशेषज्ञ प्रोफेसर लेले हचिंग्स इस परीक्षण टीम के मुख्य सदस्य हैं. (फाइल फोटो) 
 

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