दिल्ली के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों की एक टीम ने 12 साल की लड़की के पेट से दो फुटबॉल के आकार वाला ट्यूमर निकाला है. पिछले चार पांच सालों से लड़की के पेट में दर्द हो रहा था और धीरे-धीरे पेट का आकार बढ़ रहा था जिसकी वजह से उसे सांस लेने में काफी दिक्कत आ रही थी.
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लड़की का इलाज कर रहे सर गंगा राम अस्पताल के डॉ. तरुण मित्तल (लेप्रोस्कोपिक एंड बेरिएट्रिक सर्जन) ने बताया कि जब लड़की इलाज के लिए उनके पास आई तो उन्होंने देखा कि उसका पेट काफी टेढ़ा-मेढ़ा और क्लिनिकल एग्जामिनेशन के दौरान पेट को बहुत भरा हुआ पाया गया. यह देखकर हम सब हैरान थे.
बिना सूजन के पेट का आकार इतना कैसे बढ़ गया फिर जल्दी से सीटी स्कैन किया और पता चला कि मरीज के पूरे पेट में काफी बड़ा ट्यूमर है. जिसका साइज 30x20x14 सेंटीमीटर है जो कि दो बड़े फुटबॉल के बराबर है और इसे सर्जरी के द्वारा ही निकाला जा सकता है.
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सर्जरी के लिए लड़की के माता-पिता को बुलाया गया और एक योजना बनाई गई. पूरी सावधानी के साथ 25/3/2021 को ऑपेरशन किया गया. सर्जरी के दौरान यह पता चल गया था कि एक बड़ा ट्यूमर पूरे पेट में फैल चुका है और खून की नसों और आंत के अलावा शरीर के दूसरे महत्वपूर्ण अंगों के साथ जुड़ा गया.
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डॉक्टर ने बताया कि इस सर्जरी को करने में दो बड़ी चुनौतियां थीं. एक तो ट्यूमर को निकालते समय खून की धमनियों की आंतों को बचाया जाए. दूसरा ट्यूमर को शत - प्रतिशत पूरे पेट से काट कर अच्छी तरह से निकाला जाए. तीन घंटे चले सफल ऑपरेशन में दोनों ही चुनौतियों पर डॉक्टरों ने सफलता हासिल की और ट्यूमर को बाहर निकाला.
इस जटिल सर्जरी के लिए लेप्रोस्कोपिक एंड बेरिएट्रिक सर्जिकल टीम का नेतृत्व डॉ. तरुण मित्तल ने डॉ. आशीष डे और डॉ. अनमोल आहूजा के साथ किया. एनेस्थेटिस्ट टीम में डॉ. जयश्री सूद और डॉ. अजय सिरोही शामिल थे.
ट्यूमर को जटिल ऑपरेशन द्वारा पूरी तरह से सफलतापूर्वक हटा दिया गया. जिसका साइज 32 x 22 सेंटीमीटर नापा गया और इसका वजन 5 किलोग्राम था. ट्यूमर को हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए भी भेजा गया है. लड़की को सफल सर्जरी के कुछ दिनों बाद छुट्टी दे दी गई.
कुछ समय पहले सर गंगा राम अस्पताल में डॉक्टरों ने एक चमत्कार किया था. एक महिला का मुश्किल ऑपरेशन के बाद 30 साल से बंद मुंह को खोला गया था. डेढ़ माह पहले 30 साल की महिला आस्था मोंगिया को सर गंगा राम अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में लाया गया था जहां ये इलाज हुआ था.
उस महिला के जबड़े की हड्डी मुंह के दोनों तरफ खोपड़ी की हड्डी से जुड़ हुई थी. जिसकी वजह से वो अपना मुंह नहीं खोल सकती थी. यहां तक कि वो अपनी उंगली से अपनी जीभ को छू तक नहीं सकती थी. वो सिर्फ तरल पादर्थ पर जिंदा थी.
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