अपने बच्चे को ब्रेस्टफीड करा रही एक महिला की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. बाद में पता चला कि सिथोंग सोखा नाम की यह महिला कंबोडिया की पुलिसकर्मी है और ड्यूटी पर रहने के दौरान बच्चे को ब्रेस्टफीड करा रही थी. महिला पुलिसकर्मी के सीनियर अफसरों ने उन्हें सार्वजनिक रूप से गलती मानने और खेद प्रकट करने के लिए मजबूर कर दिया. अब इस घटना ने महिला अधिकारों को लेकर बहस छेड़ दी है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सीनियर अफसरों ने सिथोंग सोखा को जबरन खेद प्रकट करने के लिए दबाव डाला. इस दौरान सिथोंग सोखा से लिखवाया गया कि उसने कंबोडिया की महिलाओं और पुलिस फोर्स की प्रतिष्ठा को बदनाम किया है. लेकिन बाद में महिला मामलों के मंत्रालय ने सिथोंग सोखा के साथ किए व्यवहार पर आपत्ति जाहिर की.
महिला मंत्रालय के एक सीनियर अफसर ने कहा कि सिथोंग सोखा के साथ किए गए व्यवहार को लेकर उन्हें काफी निराशा हुई है. असल में सिथोंग सोखा की तारीफ की जानी चाहिए थी. मंत्रालय ने कहा कि ऑनलाइन मीडिया में ध्यान खींचने के लिए सिथोंग सोखा ने अपनी तस्वीर में किसी तरह की कामुकता का इस्तेमाल नहीं किया था.
इस घटना ने दक्षिणपूर्व एशिया के रूढ़िवादी देश में बहस छेड़ दी है. महिला अधिकारों के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि कंबोडिया कामकाजी मांओं के अधिकारियों को सुनिश्चित करे. विभिन्न संगठनों ने कहा है कि कामकाजी मां की जरूरत के लिए दफ्तर में पर्याप्त इंतजाम किए जाने चाहिए.
वहीं, देश के महिला मामलों के मंत्रालय ने अपने ओपन लेटर में सिथोंग सोखा का समर्थन किया है, लेकिन पत्र के आखिरी पाराग्राफ में यह भी लिखा है कि सार्वजनिक जगहों पर ब्रेस्टफीड को महिलाओं की इज्जत को कम करने वाली घटना के तौर पर देखा जा सकता है. इस बात की वजह से महिला मामलों के मंत्रालय की भी आलोचना हो रही है.