महाराष्ट्र में बाढ़ और लैंडस्लाइड से त्राहि-त्राहि मची हुई है. सांगली शहर में भी बाढ़ का भारी प्रकोप है. लेकिन यहां के रहने वाले रोहित और सोनाली ने बाढ़ की वजह से अपनी शादी टाली नहीं. तीन-चार दिन से सांगली शहर बाढ़ के पानी से घिरा है. ऐसे में बारात लेकर जाना और दुल्हन को विदा कराकर लाना मुश्किल तो था.
रोहित की बिल्डिंग चारों तरफ से पानी से घिरी थी. लेकिन रोहित ने सोच लिया था कि शादी की तारीख आगे नहीं बढ़ानी. ऐसे में उनकी मदद के लिए आगे आया सांगली का ही बोट क्लब संकल्प फाउंडेशन. बोट से बारात गई और दुल्हन को विदा करा कर ले आई. नई दुल्हन को बांहों में उठाकर किया गया गृहप्रवेश का ये वीडियो आजकल खूब वायरल हो रहा है.
तस्वीरों को देखकर ऐसा लग रहा है कि यह शादी के लिए करवाया गया कोई स्पेशल वेडिंग शूट है, पर ऐसा नहीं है. सांगली शहर में बाढ़ आई हुई है और बाढ़ की वजह से रोहित और सोनाली ने अपनी शादी टाली नहीं. कई दिनों से सांगली शहर बाढ़ के पानी से घिरा है. बोट से बारात गई और दुल्हन भी विदा कराकर लाई.
सोशल मीडिया पर इन अनोखी शादी का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है. सांगली ही नहीं पूरे देश में शादी को लेकर चर्चा हो रही है. जहां रोहित ने देश के युवाओं के लिए एक मिसाल पेश की. अब इस वीडियो को लाखों लोग देख चुके हैं.
दूल्हे रोहित ने बताया कि उन्होंने शादी के लिए घर के पास ही एक वेडिंग हॉल बुक कराया था. लेकिन बाढ़ की वजह से कई इलाकों में पानी घुस गया. फिर वेडिंग हॉल को कैंसिल करना पड़ा. शादी का मुहूर्त हो भी चुका था, इसलिए किसी भी तरह से यह शादी करनी थी हम तारीख को फिर से बढ़ना नहीं चाहते थे. खास मेहमानों के साथ सोनाली के घर पर शादी करने का फैसला किया.
बता दें कि रोहित सूर्यवंशी सांगली में एक सैलून चलाते हैं उनका कहना है कि गर्मियों के दिनों में भव्य शादी की योजना बनाई थी. जिसकी सारी तैयारी और खरीदारी कर ली थी. लेकिन कोरोना की वजह से यह शादी आगे टालना पड़ा. जब नई तारीख निकाली गई तो मैं उसने टालना नहीं चाहता था. इसलिए इस तरह से शादी करनी पड़ी.
सांगली में कृष्णा नदी बहती है जो खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. पिछले साल आई बाढ़ में सांगली में बोट पलटने से 17 लोगों की मौत हुई थी. इस बार सांगली में बारिश या बाढ़ की वजह से कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है. क्योंकि एनडीआऱएफ ने कृष्णा नदी के किनारे बसे गांवों के युवाओं को बोट चलाने की इस साल ट्रेनिंग दी थी. जैसे ही नदी का जल स्तर बढ़ा सभी गांव वालों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिया गया.