कृष्ण जन्मभूमि से सटा वृंदावन, जहां राधा-कृष्ण रासलीला किया करते थे, वहां यमुना किनारे पावन कुंभ मेले का आगाज हो चुका है. इस मेले में दूर-दूर से साधु महात्मा आये हैं जो अपने तप, आस्था, भक्ति का परिचय देते नजर आ रहे हैं. कोई बाबा धूनी जमा के बैठा है तो किसी ने 2 साल से मौन व्रत रखा हुआ है तो किसी ने एक पैर पर खड़े होने का प्रण ले रखा है.
कुंभ मेले में ऐसे ही 60 साल के मौनी बाबा की खूब चर्चा है, जो केदारनाथ से आये है. इनका नाम श्री हरिओम भारती जी महाराज है. इन्होंने 2 साल से मौन व्रत रखा हुआ है. ये किसी से बोल कर बातचीत नहीं करते. यदि इनसे कोई बात करे तो ये उन सभी बातों का जवाब कॉपी पर लिख कर देते हैं. जब इनसे पूछा गया कि आप कब तक मौन व्रत रखेंगे तो बाबा ने कहा कि ये सवाल तो प्रभु से पूछना.
मौन व्रत की अनोखी साधना के साथ इनके टिक्कर (रोटी) भी चर्चा का विषय है. ये अपने यहां आने वाले सभी भक्तों को अपने हाथ से रोटी बनाकर खिलाते हैं. इनके पास जो भी भक्त जाता है, ये बाबा उसे भूखा नहीं आने देते.
जब मौनी बाबा को उनके मौन व्रत के बारे में और सवाल पूछे तो उन्होंने कोरोना महामारी के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेटर दिया था. मौनी बाबा ने लिखकर बताया कि गाय और सन्तों के आंसू ही कोरोना है. मौनी बाबा ने कहा कि उनके पास तो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आती हैं जब वह कोलकाता में एक महीने के लिए रहते हैं.
कुंभ में महात्यागी मुनिन्दर दास बाबा भी आने वाले श्रद्धालुओं में उत्सुकता का विषय बने हुए है क्योंकि ये बाबा बैठते नहीं है. ये सिर्फ एक पैर पर तब से खड़े हैं जब से बाबरी मस्जिद गिरी है. इन्होंने प्रण लिया था कि जब राम मंदिर बनेगा तब ही ये अपने दोनों पैरों पर खड़े होंगे. ये बाबा कहीं भी आने जाने के लिए खुली गाड़ी का इस्तेमाल करते हैं ताकि ये एक पैर पर आसानी से खड़े होकर जा सके.
वहीं, धूनी जमाने वाले बाबा भी कुंभ में आये लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं. अनन्त त्यागी बाबा और उनके साथी साधु जग कल्याण के लिए वसन्त पंचमी से ज्येष्ठ की गंगा दशहरा तक धूनी जमाते हैं, जिसमें ये हर रोज 7 घंटे अपने आसपास अग्नि के घेरे में बैठते हैं.
वृंदावन में कुंभ 16 फरवरी से 25 मार्च तक चलेगा. कुंभ में स्नान का बहुत महत्व होता है लेकिन यहां भागवत कथा, हवन, भजन और साधुओं के दर्शन का भी काफी महत्व है. जिस वर्ष हरिद्वार में कुंभ लगता है उसकी पूर्व तैयारी हेतु आध्यत्मिक लोग, संत महात्मा वृंदावन में एकत्रित होते हैं, जिसे कुंभ जैसा ही दर्जा मिला हुआ है.
फोटो और रिपोर्ट: समीक्षा चौधरी