महाराष्ट्र के कल्याण जिले में इन दिनों जिधर भी नजर घूमेगी, उधर पानी का रंग इस कदर नीला दिखाई देगा, जैसे उसमें नील घोली गई है. इतना ही नहीं यहां की सड़कें भी नीले रंग की दिखाई दे रही हैं. नीले पानी की वजह से अब किसानों को डर सता रहा है, कि उनकी खेती में इससे नुकसान न हो जाए. आगे की स्लाइड में देखें क्यों पानी का रंग नीला हो रहा है. (फोटो क्रेडिट/मिथिलेश गुप्ता)
दरअसल कल्याण के 14 गांव में गोषीया मार्केट से बड़ी मात्रा में रासायनिक मिश्रित पानी सीधे सड़कों पर छोड़ा जा रहा है, जिसकी वजह से सड़कें नीली हो गई हैं. इस रासायनिक पानी के कारण किसानों के खेतों की फसलों को बड़ा नुकसान होने की संभावना है. इसलिए अब किसानों को प्रदूषण नियंत्रण मंडल की कार्रवाई का इंतजार है.
कल्याण ग्रामीण के दहिसर, पिंपरी और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में रासायनिक गोदाम स्थापित किए गए हैं. खास बात यह है कि रासायनिक गोदामों का गोषीया बाजार बन गया है. इन गोदामों से बिना किसी प्रक्रिया के सड़कों और नालों में रासायनिक छोड़ा जा रहा है.
ऐसे में कल्याण ग्रामीण क्षेत्र के पिंपरी, नगांव क्षेत्र और दहिसर मोरी में किसानों की धान की फसल फिलहाल खतरे में है. किसानों को डर सता रहा है कि इस प्रदूषित पानी से फसल को नुकसान हो सकता है, जिसकी वजह से वे प्रदूषण नियंत्रण निगम की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं.
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने अभी तक इस क्षेत्र का दौरा नहीं किया है. स्थानीय लोगों ने बताया कि नदियों और नालों में भी बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां मिली थीं. प्रदूषण के कारण कल्याण ग्रामीण के 14 गांव के बोरवेल और कुओं का पानी भी दूषित हो रहा है.वहीं प्रशासन द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिए जाने से ग्रामीणों में आक्रोश है. स्थानीय लोगों ने इस समस्या को लेकर ट्वीट किया है. (फोटो/ स्नैपशॉट ट्विटर)