विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization - WHO) के सबसे ज्यादा प्रदूषित 20 शहरों में से 16 शहर भारत और पाकिस्तान में हैं. WHO ने इस मौसम में वायु प्रदूषण बढ़ने के पीछे इन देशों में जलाए जाने वाले फसलों के अवशेष या पराली को भी प्रमुख कारण माना हैं. WHO ने ग्लोबल पीएम 2.5 डेटाबेस को देखें तो भारत और पाकिस्तान में पराली जलाने की वजह से वायु प्रदूषण की मात्रा बढ़ जाती है.
ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की प्रकाशित खबर के मुताबिक करीब 200 साल पहले बेंजामिन फ्रैंकलिन पहले ऐसे साइंटिस्ट थे जो वायुमंडल में चमकती हुई बिजली का अध्ययन करते थे. फिलहाल वायु प्रदूषण की वजह से बिजली के चमकने में भी बदलाव आया है. बिजली चमकने के व्यवहार में काफी अंतर देखा गया है.
साल 1790 में हाइड पार्क में की गई स्टडी के मुताबिक लंदन में उस साल वायु प्रदूषण भारत के आधुनिक शहरों में हो रहे वायु प्रदूषण से आधा था लेकिन साल 1990 तक लंदन की स्थिति और खराब हो गई. वहां की स्थिति भारत के सबसे प्रदूषित शहरों के प्रदूषण के लगभग बराबर हो गई थी.
साल 1920 में लंदन में वायु प्रदूषण की लगातार जांच शुरू की गई. उस समय लंदन के वायु में उतना ही प्रदूषण था जितना भारत में हुआ करता था. उस समय यूनाइटेड किंगडम 4.40 करोड़ लोगों का घर था. तब भारत में 40 करोड़ लोग रहते थे. ये सभी गंगा नदी के किनारे फैले हुए प्रदूषित हवा के शिकार हुआ करते थे.
इसी साल जुलाई के महीने में एक अध्ययन में यह बात सामने आई थी कि भारत में लोगों के जीने के साल कम होते जा रहे हैं. इसकी वजह है प्रदूषण. यह खुलासा किया है अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी ने. उसने बताया है कि वायु प्रदूषण की वजह से भारत के लोगों की लाइफ एक्सपेक्टेंसी (Life Expectancy) यानी जीवन प्रत्याशा 5.2 साल घट गई है. जीवन प्रत्याशा को आसान भाषा में हम कह सकते हैं कि इंसान औसत कितने साल जिएगा.
शिकागो यूनिवर्सिटी के द एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट ने यह अध्ययन किया है. इसमें बताया गया है कि ज्यादा वायु प्रदूषण की वजह भारत के लोगों की जीवन प्रत्याशा बहुत तेजी से कम हो रही है. बांग्लादेश के बाद भारत दुनिया में दूसरा देश है जहां पर लोगों की उम्र घट रही है.
इस स्टडी में बताया गया है कि WHO के प्रदूषण को लेकर बनाई गई गाइडलाइंस के मुताबिक भारत की पूरी आबादी यानी 140 करोड़ लोग प्रदूषण में रह रहे हैं. जबकि, 84 फीसदी लोग भारत के खुद के प्रदूषण की गाइडलाइंस के अनुसार प्रदूषण में जीवन जी रहे हैं. वायु प्रदूषण की वजह से भारत के लोगों की लाइफ एक्सपेक्टेंसी 5.2 साल घट गई है. जो WHO की गाइडलाइंस में बताई गई 2.3 साल की गाइडलाइंस से दोगुनी है.