अमेजन प्राइम पर हाल ही में रिलीज हुआ वेब सीरीज The Family Man 2 इन दिनों चर्चा में है. The Family Man 2 में एक किरदार है भास्करण. भास्करण के किरदार को एक्टर Mime Gopi ने निभाया है. सीरीज में भास्करन की कहानी फिक्शनल है, लेकिन इसे Liberation Tigers of Tamil Eelam (LTTE) के प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरण की रियल जिंदगी से प्रेरित कहा जा सकता है. प्रभाकरण को दुनिया के सबसे ताकतवर गुरिल्ला लड़ाकाओं के प्रमुख के रूप में जाना जाता है.
अमेजन प्राइम पर रिलीज हुआ वेबसीरीज भले ही फिक्शन हो लेकिन उसमें गढ़ा गया पात्र भास्करण वेलुपिल्लई प्रभाकरन से मिलता जुलता है. प्रभाकरन श्रीलंका की राजनीति में बेहद महत्व रखता है. वेलुपिल्लई प्रभाकरन को श्रीलंकाई तमिल गुरिल्ला और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम (LTTE) के संस्थापक के तौर पर जाना जाता है. उसके उग्रवादी संगठन का मकसद श्रीलंका के उत्तर और पूर्व में एक स्वतंत्र तमिल राज्य बनाना था जिसके लिए लिट्टे ने श्रीलंका में 25 साल से अधिक समय तक युद्ध लड़ा.
प्रभाकरन के अगर परिवार की बात करें तो वो अपने माता-पिता के चार बच्चों में सबसे छोटे थे, जिनका जन्म श्रीलंका के जाफना प्रायद्वीप के उत्तरी तट पर वाल्वेटीथुराई में हुआ था. श्रीलंका में तमिल को संस्कृति और साहित्य का दिल माना जाता है, श्रीलंका में जाफना बढ़ते तमिल राष्ट्रवाद के केंद्र में आ गया था.
लिट्टे तमिलों के लिए स्वायत्तता की मांग की पर अड़ा हुआ था. वो सिंहली-प्रभुत्व वाली श्रीलंकाई सरकार और सिंहली नागरिकों द्वारा अपने खिलाफ भेदभाव का आरोप लगाते थे. इसी मांग को लेकर 1976 में प्रभाकरन ने LTTE की स्थापना की जो सशस्त्र संगठन था. इस संगठन ने 1983 में जाफना के बाहर श्रीलंकाई सेना के एक गश्ती दल पर घात लगाकर हमला किया जिसमें 13 सैनिकों की मौत हो गई.
इस हमले के बाद श्रीलंका में भीषण नरसंहार हुआ जिसके परिणामस्वरूप हजारों तमिल नागरिकों की मौत हुई. यहीं से श्रीलंका में गृहयुद्ध की शुरुआत हो गई. लिट्टे, जिसे तमिल टाइगर्स के रूप में भी जाना जाता था उसने प्रभाकरन के नेतृत्व में उत्तरी श्रीलंका में बड़े हिस्से को नियंत्रित कर लिया. इतना ही नहीं पूर्वी श्रीलंका में प्रभाकरन सरकार के खिलाफ अपना स्वतंत्र राज्य चलाने लगे. श्रीलंकाई सेना ने वार्ता असफल होने के बाद 2006 में लिट्टे को हराने के लिए एक सैन्य अभियान शुरू किया.
श्रीलंकाई सेना के अभियान शुरू करने के बाद प्रभाकरन ने कहा था, "मैं दुश्मन द्वारा जिंदा पकड़े जाने के बजाय सम्मान से मरना पसंद करूंगा", मई 2009 में श्रीलंकाई सेना के साथ लड़ाई में प्रभाकरण की मौत हो गई. उनके बेटे चार्ल्स एंथोनी भी श्रीलंकाई सेना के साथ लड़ाई में मारे गए थे. श्रीलंकाई तमिल राष्ट्रवाद की मुखर आवाज प्रभाकरन को अक्सर श्रीलंकाई तमिलों द्वारा एक शहीद के रूप में देखा जाता है, लेकिन आलोचकों उन्हें कुख्यात और परिष्कृत विद्रोही मानते हैं जिसने विश्व स्तर पर राजनीतिक आतंकवादी समूहों को प्रभावित करने वाली कई रणनीतियां बनाईं.