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देश की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता: ए के एंटनी

रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने सेना प्रमुख जनरल वी के सिंह द्वारा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखा पत्र मीडिया में लीक होने के मुद्दे पर संसद में कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री एवं अन्य पक्षों से विचार कर सरकार उपयुक्त कदम उठायेगी.

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मनमोहन सिंह और वीके सिंह
मनमोहन सिंह और वीके सिंह

रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने सेना प्रमुख जनरल वी के सिंह द्वारा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखा पत्र मीडिया में लीक होने के मुद्दे पर संसद में कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री एवं अन्य पक्षों से विचार कर सरकार उपयुक्त कदम उठायेगी. साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार देश की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है.

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एंटनी ने राज्यसभा में अपनी ओर से दिये गये बयान में कहा कि जनरल सिंह ने 12 मार्च को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में सुरक्षा संबंधी मुद्दों को उठाया था.

उन्होंने कहा कि इस तरह के मुद्दों को मीडिया में उठा कर राष्ट्रीय सुरक्षा का कोई हित नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि रक्षा से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक बहस का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए.

रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार रक्षा तैयारियों और सेना को आधुनिक हथियार उपलब्ध कराने और आधुनिकीकरण के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है.

एंटनी ने कहा कि हम देश की अखंडता और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेंगे. इस मामले में हम दोषी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे. उन्होंने सेना प्रमुख के राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पत्र के मीडिया में लीक होने पर विपक्ष के नेताओं द्वारा जताई गई चिंता को उचित ठहराते हुए कहा कि वह सदन में सभी दलों के नेताओं को इस बात के लिए धन्यवाद देना चाहते हैं कि देश की सुरक्षा के मामले पर सबने एकजुटता दिखाई.

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रक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार देश की प्रत्येक इंच भूमि की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी. उन्होंने कहा कि पिछले विवादों के बावजूद हम खरीद प्रक्रियाओं को दुरूस्त कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि दोषी लोगों के खिलाफ कई कार्रवाई की गई हैं. उनमें कंपनियों को काली सूची में डालना और सौदों को रद्द करने जैसे कठोर कदम शामिल हैं.

एंटनी ने भरोसा दिलाया कि सरकार सेनाओं की आधुनिक हथियार सहित सभी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और देश की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में सेना से जुड़ी जो खबरें आ रही हैं, वे चिंताजनक हैं. उन्होंने कहा कि देश की अखंडता एवं सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर हमें संयंम बरतना चाहिए और कोई भी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए. माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि मीडिया में जो खबरें आ रही हैं वे गंभीर चिंता का विषय हैं. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए.

येचुरी ने कहा कि जांच के आधार पर इस तरह के मामलों में सामूहिक जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, भले ही वह सैन्य कर्मी हों या सामान्य प्रशासनिक अधिकारी.

बीजद के प्यारी मोहन महापात्र ने कहा कि इस तरह की जांच से अनावश्यक विलंब होगा. फौरन कार्रवाई की जरूरत है. उन्होंने कई नियमों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में दोषियों को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए.

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जदयू के शिवानंद तिवारी ने कहा कि हमारे देश में फौज राजनीति से अलग रही है. पिछले कुछ दिनों से मीडिया में फौज से जुड़ी जो खबरें आ रही हैं, सरकार ने ऐसे मामलों में कोई कार्रवाई नहीं की तो गलत नजीर बन जाएगी.

इससे पहले सुबह सदन की कार्रवाई शुरू होते ही भाजपा के एम वेंकैया नायडू ने सेना प्रमुख के प्रधानमंत्री को लिखे पत्र का मुद्दा उठाया और सरकार से स्पष्टीकरण मांगा. अन्य दलों के सदस्यों ने उनकी मांग का समर्थन किया.

विपक्षी दलों के हंगामे के बीच एंटनी ने कहा कि वह इस मुद्दे पर विचार विमर्श कर संसद में बयान देंगे. लेकिन विपक्षी सदस्य इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए और हंगामा करते रहे.

हंगामे के कारण प्रश्नकाल नहीं चल पाया और बैठक एक बार के स्थगन के बाद दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.

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