राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ‘आईक्यू’ का स्तर क्या है? यह सवाल हम नहीं पूछ रहे बल्कि ‘सूचना का अधिकार’ कानून के तहत यह अटपटा सा सवाल पूछा गया है कि महात्मा गांधी का ‘आईक्यू’ स्तर क्या है.
सूचना पाने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए अहमदाबाद में रहने वाले एक शख्स ने अपनी याचिका में केंद्रीय सूचना आयोग से यह अजीबोगरीब सवाल पूछा लेकिन आयोग ने उसकी याचिका को खारिज कर दिया.
याचिका खारिज करते हुए आयोग ने कहा कि इस तरह की सूचनाएं मांगना यकीनन सूचना के अधिकार कानून के दायरे को काफी लंबा खींचना है.
याचिकाकर्ता ने महात्मा गांधी, कुछ पूर्व राष्ट्रपतियों और अन्य मंत्रियों के बारे में सूचना मांगी थी. उनके जन्म की सटीक तारीख, वक्त के अलावा उनका ‘ब्लड ग्रुप’ भी पूछा गया था. लेकिन, याचिका में सबसे पहला सवाल ‘आईक्यू’ के स्तर से जुड़ा था.
बहरहाल, केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी ने याचिकाकर्ता को सूचित किया था कि मांगी गयी सूचना राष्ट्रपति सचिवालय के पास उपलब्ध नहीं है. यह जवाब आने के बाद याचिकाकर्ता ने केंद्रीय सूचना आयोग में अपील की.
केंद्रीय सूचना आयुक्त सत्यानंद मिश्रा ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मंत्रियों या पूर्व राष्ट्रपतियों के ‘आईक्यू’ स्तर से जुड़ी सूचना मांगना निश्चित तौर पर सूचना के अधिकार कानून के दायरे को काफी दूर तक फैला रहा है.