भारत-चीन सीमा विवाद को सुलझाने में लग रहे समय और उसमें आ रहे गतिरोध के लिए भारत और उसके बहुदलीय प्रणाली को जिम्मेदार करार देते हुए चीन के सरकारी मीडिया ने कहा कि ‘संदेह और अविश्वास’ के कारण दोनों पक्ष एक ‘संतोषजनक’ समझौते पर पहुंचने से ‘बहुत दूर’ हैं और यह बात द्विपक्षीय संबंधों में विकास को भी बाधित कर रहे हैं.
‘पीपुल्स डेली’ के ऑनलाइन संस्करण में एक लेख के मुताबिक पिछले महीने की सीमा वार्ता के 15वें दौर के बाद द्विपक्षीय संबंधों में एक अच्छा दौर आया है लेकिन कुछ विसंगतियां और मामले अभी भी भारत-चीन के द्विपक्षीय संबंधों पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं.
संपदकीय पन्ने पर एक लेख ने लिखा गया है, ‘पहला मुद्दा चीन-भारत सीमा विवाद है. चीन और भारत ने इस मुद्दे पर विशेषज्ञों की 15 बैठकें आयोजित की हैं. बैठकों के कई साकारात्मक परिणाम आए हैं, लेकिन यह अभी भी एक संतोषजनक समझौते तक पहुंचने से बहुत दूर है.’
इसका कहना है कि इस मामले में मुख्य समस्या भारत की ओर से आ रही है. भारतीय मीडिया जोर दे रहा है कि भारत और चीन के बीच की सीमा ‘मैकमोहन रेखा’ होनी चाहिए. साथ ही वह कहते हैं कि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद केवल पूर्व के 90,000 वर्ग किलोमीटर पर ही नहीं यह विवाद पश्चिमी क्षेत्र के 30,000 वर्ग किलोमीटर पर भी है.
लेख के अनुसार, ‘यह गलत बहस है, जिसमें इतिहास को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है, अब भी भारत में इसके समर्थक हैं.’ इसके अनुसार, इस मुद्दे में विलंब की एक और वजह भारत की बहुपार्टी प्रणाली और समाज है जो बहुत पेचिदा है.’
लेख के मुताबिक, ‘भारत-चीन सीमा विवाद के मामले में विभिन्न भारतीय दलों के विचार अलग हैं, इसलिए, इस मामले में उनके लिए किसी एक बिन्दू पर पहुंचना बहुत मुश्किल है.’ उसमें चीन और पाकिस्तान के संबंधों को लेकर भारत की चिंताओं के बारे में भी लिखा गया है.
लेख में कहा गया है कि चीन-पाकिस्तान के संबंधों के बारे में अभी भी गलतफहमी है. 21वी सदी के आरंभ से ज्यादातर वक्त भारत सरकार मानती है कि चीन ने भारत और पाकिस्तान के साथ बराबरी का सलूक किया है. उसने ऐसा ना सिर्फ पाकिस्तान के साथ संबंधों के विकास में किया है बल्कि वह भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को भी बढ़ावा दे रहा है.
लेख में यह भी कहा गया है कि ग्वादर बंदरगाह और चीन की नौसेना के भारत के बिल्कुल पास आने को लेकर तथा ‘चीन से पाकिस्तान को मिल रही परमाणु प्रौद्योगिकी’ के बारे में भी चिंता जताई जा रही है.
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चीन के सैनिकों की मौजूदगी को लेकर भारत की चिंता के बारे में लिखा गया है कि पाकिस्तान में भूकंप राहत कार्यों में मदद के लिए चीन से सैनिकों को भेजा गया था.
लेख में कहा गया है, ‘संदेह और अविश्वास अभी भी भारत-चीन के बीच विकसित हो रहे मित्रवत संबंधों के बीच बड़ी बाधा है.’