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अधूरा रह गया पाकिस्तान को भारत संघ में शामिल करने का सपना

भारत को विशाल आकार देने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल पाकिस्तानी क्षेत्रों को भी भारत में शामिल करने के इच्छुक थे और उनका मानना था कि एक दिन पाकिस्तानी लोगों को हिन्दुस्तान से अलग होने के दर्द का अहसास होगा और वे फिर से भारत संघ में शामिल हो जाएंगे.

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सरदार वल्लभ भाई पटेल
सरदार वल्लभ भाई पटेल

भारत को विशाल आकार देने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल पाकिस्तानी क्षेत्रों को भी भारत में शामिल करने के इच्छुक थे और उनका मानना था कि एक दिन पाकिस्तानी लोगों को हिन्दुस्तान से अलग होने के दर्द का अहसास होगा और वे फिर से भारत संघ में शामिल हो जाएंगे.

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गुजरात के नाडियाड में 31 अक्टूबर 1875 को जन्मे सरदार पटेल को सिर्फ भारत में ही लौह पुरुष नहीं माना जाता बल्कि विदेशी इतिहासकार भी उनके साहस के कायल हैं.

भारत-पाक विभाजन के अमेरिकी गवाह और केनेडी प्रशासन में पूर्वी तथा दक्षिण एशियाई मामलों के सहायक विदेश मंत्री रहे फिलिप्स टालबोट ने भारत पर लिखी अपनी एक पुस्तक में कहा है कि यदि आजादी के बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल को भारत का प्रधानमंत्री बनाया गया होता तो निश्चित तौर पर वह अत्यंत बेहतर प्रधानमंत्री साबित होते.

पुस्तक के अनुसार पटेल ने भारत के लिए एक ऐसा संविधान तैयार करने की योजना बनाई थी जिसमें पाकिस्तानी क्षेत्र भारत संघ में शामिल होने के लिए सहमत होते. उन्हें भरोसा था कि आजादी के एक साल के भीतर ऐसा हो जाएगा.

टालबोट 1939 से लेकर 1950 तक भारत में रहे थे. उन्होंने लिखा है कि पटेल ने उनसे कहा था कि वह भारत के लिए ऐसा संविधान बनाएंगे जिसमें मुस्लिम बहुल क्षेत्र पाएंगे कि वे अकेले नहीं रह सकते. उनके लिए यही सही रहेगा कि वे एकल संघ में शामिल हों.

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भारत में रहने के दौरान टालबोट ने शिकागो डेली न्यूज के लिए रिपोर्टर के रूप में भी काम किया था. उन्होंने लिखा है कि तीन जून 1947 को कांग्रेस और मुस्लिम लीग द्वारा देश के बंटवारे के साथ स्वतंत्रता पर सहमत होने से तीन महीने पहले मार्च 1947 में पटेल ने उन्हें अपनी पार्टी का रुख बताते हुए कहा था कि मोहम्मद अली जिन्ना ने भले ही बंटवारे की मांग की है लेकिन उनकी पार्टी संघीय देश चाहती है.

इतिहासकार पी. हरीश का कहना है कि भारत के एकीकरण में पटेल की वही भूमिका रही जो जर्मनी के एकीकरण में ओटो वान विस्मार्क की थी. पटेल के योगदान की वजह से ही भारत एक विशाल राष्ट्र बन पाया. हैदराबाद के निजाम को भी उन्होंने ही तैयार किया था.

उनका कहना है कि हालांकि पाकिस्तान को फिर से भारत में शामिल करने का पटेल का सपना पूरा नहीं हो पाया.

आजादी के बाद 565 अर्ध स्वायत्त रियासतों और ब्रिटिश युग के उप निवेशीय प्रांतों को भारत में मिलाने की पूरी जिम्मेदारी पटेल पर थी जिसे उन्होंने बखूबी अंजाम दिया.

भारत के प्रथम गृह मंत्री और प्रथम उप प्रधानमंत्री पटेल ने अपनी चाणक्य नीति से अपने कर्तव्य को निभाया और जरूरत पड़ने पर सैन्य शक्ति का इस्तेमाल करने से भी नहीं चूके. पटेल एक सफल वकील थे और उन्होंने गांधी जी के आंदोलनों में बढ़-चढ़कर भाग लिया.

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गुजरात के बारदोली तालुका के लोगों ने उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि से नवाजा और इस तरह उनका नाम सरदार वल्लभ भाई पटेल पड़ गया.

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