मुंबई में 26/11 आतंकी हमलों के मामले में पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब के वकील अमीन सोलकर ने आज कहा कि कसाब को बंबई उच्च न्यायालय में अपनी अपील पर सुनवाई में कोई रुचि नहीं है और वह अपनी ही दुनिया में खो गया लगता है.
सोलकर ने शनिवार को आर्थर रोड केंद्रीय जेल की उच्च सुरक्षा वाली सेल में कसाब से मुलाकात की थी. उन्होंने कहा, ‘उसे 26/11 के मामले में कोई रुचि नहीं है.’ उन्होंने कहा, ‘हमने धर्म के बारे में तथा अन्य सामान्य बातें कीं लेकिन उसने बार बार विषय से दूसरी बातें कीं. मुझे लगता है कि वह अपनी ही दुनिया में खो गया है.’
सोलकर ने कहा, ‘कसाब स्वास्थ्य के लिहाज से फिट लगता है और उसने किताब पढ़ने में रुचि दिखाई. मैंने उसे उर्दू में कुछ कहानियों की किताबें देने का वादा किया क्योंकि वह उस भाषा में पारंगत है.’ जेल के अधिकारियों ने पहले ही कसाब को पवित्र कुरान दी है और वह नियमित उसे पढ़ता है.
सोलकर के मुताबिक, ‘मुझे उससे मुलाकात के बाद लगा कि उसे भांपा नहीं जा सकता. वह एक समय कुछ कहता है और अचानक से दूसरे मुद्दे पर चला जाता है.’
कसाब से मुलाकात का प्रयोजन पूछे जाने पर वकील ने कहा, ‘वह जिस तरह से अदालत और जेल में चिड़चिड़ा रहा है तो मैं उसकी दिमागी स्थिति को जानना चाहता था.’ इस बीच कसाब की अपील पर बंबई उच्च न्यायालय में दिवाली की छुट्टियों के बाद न्यायमूर्ति रंजना देसाई और न्यायमूर्ति आरवी मोरे के समक्ष सोमवार को सुनवाई फिर से शुरू होगी और उसके वकीलों ने दलीलों की तैयारी कर ली है.{mospagebreak}
सरकारी वकील उज्ज्वल निकम सोमवार को कसाब के इकबालिया बयान और निचली अदालत में अपराध कबूल करने की बात मजबूती से रखेंगे. निकम ने कहा, ‘मैं कसाब और नौ अन्य लोगों को सैन्य तथा खुफिया जानकारी देने की लश्कर ए तैयबा की साजिश पर ध्यान दूंगा, जो कि समुद्री रास्ते से आये और नरीमन हाउस तथा होटल ताज महल और ओबेराय में 166 लोगों की जान ली.’
सरकारी वकील कसाब के इकबालिया बयान पर जोर देंगे जिसमें उसने बताया था कि किस तरह पाकिस्तान के सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल मुंबई में हमले के लिए आतंकवादियों को प्रशिक्षित करने में किया गया था.
निकम छत्रपति शिवाजी रेलवे टर्मिनस में, कामा अस्पताल के अंदर और बाहर लोगों को मारने में तथा एक टैक्सी में एक बम रखने में कसाब की भूमिका पर पहले ही दलील दे चुके हैं.
वहीं बचाव पक्ष के वकील दलील देंगे कि अदालत में गवाहों द्वारा कसाब की पहचान का कोई प्रमाणित मूल्य नहीं है क्योंकि हमले के दिन की उसकी तस्वीरें अखबारों और टीवी पर प्रकाशित प्रसारित की गयीं थीं.