भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता मनोहर पर्रिकर ने शुक्रवार को गोवा के मुख्यमंत्री के रूप में पद व गोपनीयता की शपथ ली. वह भाजपा-नीत गठबंधन के अगुवा के रूप में उभरे हैं.
शपथ ग्रहण समारोह में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया. शपथ ग्रहण समारोह स्थानीय कैंपनन मैदान में संपन्न हुआ. राज्यपाल के. शंकरनारायणन ने मुख्यमंत्री के साथ दयानंद मांडरेकर, मथानी सल्दंहा, लक्ष्मीकांत पारसेनकर और फ्रांसिस डिसूजा को कैबिनेट मंत्री के रूप में पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई.
मंत्री पद की शपथ लेने वालों में दो नेता ईसाई समुदाय से हैं. भाजपा ने विधानसभा चुनाव में कुल 28 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे, इनमें से छह ईसाई समुदाय से थे. मतदान तीन मार्च को संपन्न हुआ था जबकि परिणाम छह मार्च का आए थे.
शपथ ग्रहण समारोह में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी, सुषमा स्वराज, रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर, राजीव प्रताप रूड़ी, शहनवाज हुसैन, गोपीनाथ मुंडे, वेंकैया नायडू, सदानंद गौड़ा और आरती मेहरा शामिल हुए.
बजट सत्र के बाद मुख्यमंत्री अपनी मंत्रिपरिषद का विस्तार कर सकते हैं.
गोवा में कांग्रेस को किनारे करते हुए बहुमत में आए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) गठबंधन ने सर्वसम्मति से पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को विधायक दल का नेता चुना था.
भाजपा-नीत गठबंधन ने बुधवार को राज्यपाल से भेंट कर सरकार बनाने का दावा पेश किया था.
राज्य की 40 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा-एमजीपी गठबंधन को 24 सीटें मिली हैं. वहीं, उसे दो निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन हासिल हुआ है. चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा. कांग्रेस के खाते में केवल नौ सीटें गईं, जबकि राकांपा अपना खाता खोलने में भी नाकाम रही.
पिछली विधानसभा में राकांपा के तीन विधायक थे. सात सीटों पर अन्य उम्मीदवार विजयी रहे. कांग्रेस के कई दिग्गजों को भी हार का सामना करना पड़ा. इनमें दो पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य के छह मंत्री भी शामिल हैं, जबकि कांग्रेस से जीतने वाले प्रमुख नेताओं में मुख्यमंत्री दिगम्बर कामत तथा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रताप सिंह राणे शामिल हैं.
उल्लेखनीय है पर्रिकर पहली बार 24 अक्टूबर 2000 को गोवा के मुख्यमंत्री बने थे. वह 27 फरवरी 2002 तक मुख्यमंत्री रहे. 5 जून 2002 को वह फिर से राज्य के मुख्यमंत्री बने. वह देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है.