रेलवे ने पार्सल तथा सामान का शुल्क 25 प्रतिशत बढ़ाने का फैसला किया है. यह वृद्धि सभी तरह के सामान पर तत्काल रूप से प्रभावी होगी.
रेलवे के इस कदम से मुद्रास्फीति दबाव और बढने की आशंका है. रेलवे ने दो महीने पहले ही माल भाड़ा बढ़ाया था.
रेलवे ने इस फैसले से मौजूदा वित्त वर्ष में 370 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय का लक्ष्य रखा है. रेलवे को 2011-12 में पार्सल व सामान (लगेज) से 1600 करोड़ रुपये की आय हुई थी.
रेलवे मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, शुल्क दर ढांचे को युक्तिसंगत बनाने के प्रयासों के तहत हमने पार्सल व लगेज की दर को छह साल बाद संशोधित किया है. सभी तरह के सामान के लिए इसमें लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि की गई है और यह वृद्धि एक जून से प्रभावी हो गई. रेलवे ने पार्सल व लगेज की शुल्क दरों में इससे पहले 2006 में संशोधन किया था. नयी दरें समाचार पत्र व पत्रिकाओं सहित सभी तरह के सामान पर लागू होंगी.
रेलवे ने मार्च में माल भाड़े में 20 प्रतिशत वृद्धि की थी.
अधिकारी ने इस बढोतरी को उचित ठहराते हुए कहा, हमारी पार्सल शुल्क दर काफी कम है और माल भाड़े तथा पार्सल की दर में कुछ संगतता होनी चाहिए. रेलवे की पार्सल सेवा से आमतौर पर टायर, समाचार पत्र पत्रिकाएं, दवाएं, दाल तथा आटा भेजा जाता है.
अधिकारी ने कहा कि रेलवे कानून के तहत रेल मंत्रालय को किसी भी समय पार्सल शुल्क दर में बदलाव का अधिकार है. हालांकि यह वृद्धि विशेष पार्सल ट्रेन पर लागू नहीं होगी. ऐसी 19 ट्रेन हैं.