सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने राष्ट्रपति के पास एक दया याचिका भेजकर मौत की सजा का सामना कर रहे बलवंत सिंह राजोआणा को माफी देने की मांग की. उधर, पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि वह इस संबंध में शीघ्र ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलेंगे.
इसी से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में पटियाला जेल के अधीक्षक ने अदालत का दरवाजा खटखटाकर बब्बर खालसा के आतंकवादी की फांसी को टालने की मांग की. हालांकि, सीबीआई ने कहा कि फांसी की सजा पर तामील के लिए जारी वारंट को चुनौती देने का जेल अधीक्षक के पास अधिकार क्षेत्र नहीं है.
विधानसभा में बयान देते हुए बादल ने इस मुद्दे को संवेदनशील और ऐतिहासिक बताते हुए लोगों से राज्य में शांति, सांप्रदायिक सौहार्द और भ्रातृत्व की भावना कायम रखने की अपील की.
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने राष्ट्रपति को एक दया याचिका भेजी जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 1995 में की गई हत्या में संलिप्तता के लिए राजोआणा को सुनाई गई मौत की सजा को कम करने की मांग की.
एसजीपीसी सूत्रों ने बताया कि यह याचिका सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल की कोर कमेटी द्वारा कल रात किए गए फैसले के अनुरूप भेजी गई है.
याचिका में राजोआणा की मौत की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील करने की मांग की गई है. सदन में मुख्यमंत्री बादल ने कहा कि वह जल्द ही राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मिलेंगे और राजोआणा पर दया किए जाने की मांग करेंगे. राजोआणा को पटियाला सेंट्रल जेल में 31 मार्च को फांसी दी जानी है. उन्होंने कहा, ‘इस संबंध में हमारी सरकार सारे कानूनी विकल्प तलाशेगी. हमारा कदम राज्य में शांतिपूर्ण वातावरण सुनिश्चित करेगा.’
उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने कहा, ‘फांसी की सजा पर तामील नहीं होने जा रहा है.’ उन्होंने विधानसभा के बाहर संवाददाताओं से कहा, ‘हमारी जिम्मेदारी किसी भी कीमत पर कानून व्यवस्था को कायम रखने की है.’ सुखबीर ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल जल्द ही राज्य में काफी मुश्किल से हासिल की गई शांति को कायम रखने के लिए शिरोमणि अकाली दल जल्द ही राष्ट्रपति से मिलने के लिए समय मांगेगा.
यह पूछे जाने पर कि क्या राज्य सरकार राजोआणा के लिए माफी मांगकर कट्टरपंथियों को खुश करने की कोशिश कर रही है तो उन्होंने इसका सीधा उत्तर नहीं दिया. गौरतलब है कि राजोआणा ने खुद दया याचिका नहीं दायर की है.
उन्होंने कहा, ‘कानून व्यवस्था पर हमारी नीति स्पष्ट है. इसे भंग किए जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. इसके अलावा एक सह अभियुक्त का मामला शीर्ष अदालत के समक्ष लंबित है. किसी भी तरह से राजोआणा को फांसी नहीं हो सकती.’ सदन में दो पन्ने के अपने वक्तव्य में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मुद्दा ‘संवेदनशील और ऐतिहासिक’ है.
मुख्यमंत्री बादल ने कहा, ‘जो कदम राज्य सरकार उठाने जा रही है उसका हमारी भावी पीढ़ी पर भी इसका असर होगा.’ जब बादल ने यह बयान दिया तो उस वक्त पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह सदन में मौजूद नहीं थे. उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार को सहयोग और समर्थन देने का आश्वासन दिया था.
विशेष सीबीआई अदालत ने बेअंत सिंह हत्याकांड में एक अगस्त 2007 को राजोआणा और जगतार सिंह हवारा को मौत की सजा सुनाई थी.
बेअंत सिंह की हत्या की साजिश रचने के लिए लखविंदर सिंह, गुरमीत सिंह और शमशेर सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.
31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ में कड़ी सुरक्षा वाले पंजाब सिविल सचिवालय स्थित अपने कार्यालय से जैसे ही बेअंत सिंह बाहर निकले थे कि एक आत्मघाती हमलावर दिलावर सिंह ने विस्फोट में खुद को उड़ा लिया था. इसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री और 17 अन्य की मौत हो गई थी.
दिलावर के विफल रहने पर राजोआणा का इस मामले में दूसरे मानव बम के तौर पर इस्तेमाल किया जाना था.