क्रिकेट के भगवान सचिन तेंडुलकर ने औपचारिक तौर पर घोषणा की है कि टीवी विज्ञापनों में अभिनय करते वक्त वे अभिनेता हैं, न कि क्रिकेट खिलाड़ी. टीवी विज्ञापनों से होने वाली आय पर करीब 2 करोड़ रु. का आयकर बचाने के लिए तेंडुलकर ने आयकर ट्रिब्यूनल को बताया कि विज्ञापन फिल्मों में उनका पेशा अभिनय है, क्रिकेट नहीं.
ट्रिब्यूनल ने भी उनका तर्क स्वीकार कर लिया कि वे एक अभिनेता हैं, क्योंकि उन्हें विज्ञापनों में काम करने के लिए अपनी अभिनय योग्यता, कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता का इस्तेमाल करना पड़ा. तेंडुलकर पर 2001-02 और 2004-05 में ईएसपीएन स्टार स्पोर्ट्स, पेप्सिको और वीसा से विदेशी मुद्रा में होने वाली 5,92,31,211 रु. की कमाई पर 2,08,59,707 रु. का टैक्स लगाया गया था.
उन्होंने कमिश्नर ऑफ इन्कम टैक्स-अपील (सीआइटी-ए) के आदेश को चुनौती दी थी. 20 मई के एक आदेश में ट्रिब्यूनल ने फैसला सुनाया कि तेंडुलकर एक कलाकार के तौर पर अपनी मॉडलिंग से होने वाली आय पर छूट पाने का दावा कर सकते हैं. तेंडुलकर ने आयकर कानून की धारा 80 आरआर के तहत आयकर में छूट का दावा किया था. इस धारा में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति अगर नाटककार, कलाकार, संगीतकार, अभिनेता या खिलाड़ी है और वह अपने पेशे से कोई आय अर्जित करता है तो उस आय पर वह आयकर में छूट का दावा कर सकता है.
आकलन अधिकारी ने जब तेंडुलकर से अपना पेशा बताने के लिए कहा तो मास्टर ब्लास्टर ने जमा किए गए अपने कागज में बताया कि, ''वे एक प्रसिद्ध मॉडल हैं और विभिन्न कंपनियों के उत्पादों के विज्ञापनों में अभिनय करते हैं.'' उन्होंने कहा कि अभिनय से होने वाली आय को व्यापार और पेशे से होने वाली आय दिखाया गया था जबकि क्रिकेट से होने वाली आय को अन्य स्त्रोतों से होने वाली आय बताया गया था, क्योंकि वे गैर-पेशेवर क्रिकेट खिलाड़ी हैं.
तेंडुलकर ने बताया कि आयकर में छूट का दावा उनके अभिनय के पेशे के आधार पर किया गया था. आकलन अधिकारी ने तेंडुलकर के दावे को खारिज कर दिया और पेशेवर शब्द का अर्थ जानने के लिए वह शब्दकोश देखने लगा. अधिकारी ने पाया कि यह कहना सही है कि क्रिकेट उनके जीवन-यापन का स्त्रोत है और इसलिए वह उनका पेशा है. उसने आगे कहा कि, ''सचिन अगर क्रिकेट खिलाड़ी नहीं हैं तो क्रिकेट खिलाड़ी कौन हो सकता है.'' उसने लिखा कि तेंडुलकर ने इन कंपनियों को तमाम तरह की सेवाएं देने के लिए पारिश्रमिक हासिल किया है.
इन कंपनियों के साथ किए गए अनुबंध में उल्लिखित विभिन्न गतिविधियों का उनके अभिनेता होने के दावे से कुछ भी लेना-देना नहीं है. इसलिए अधिकारी ने कहा कि उनका दावा सही नहीं है. तेंडुलकर ने इन कंपनियों के साथ नाम, फोटो, मौलिक आवाज, पहनावा, जूते का उपयोग करने, उत्पाद के प्रवक्ता की भूमिका करने और मीडिया में दिखाई देने के लिए अनुबंध किया है.
अधिकारी ने लिखा, ''यह सही है कि विज्ञापन फिल्मों में दिखाई देने के लिए तेंडुलकर को खास तरह का पहनावा पहनना पड़ता है और निर्देशक के अनुसार बताई गई पटकथा का अनुसरण करना पड़ता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे अभिनेता हैं.
जिन विज्ञापनों में वे नज़र आते हैं, उन सभी में उन्हें एक क्रिकेट की शख्सियत के तौर पर पेश किया जाता है. यह ध्यान देने की बात है कि जो कंपनी तेंडुलकर को अपने विज्ञापन में लेती है, वह उनका इस्तेमाल इसलिए करती है कि वे क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंडुलकर हैं.''
जब उनके दावे को खारिज कर दिया गया तो तेंडुलकर ने दावा किया कि उन्हें धारा 80 आरआर के तहत कलाकार समझ जाए. उन्होंने कहा कि कलाकार का मतलब विज्ञापनों के अनुबंधों की शर्तों के अनुसार निकाला जाए. लेकिन सीआइटी-ए ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया. उसने फैसला सुनाया-तेंडुलकर मुख्य रूप से क्रिकेट खिलाड़ी हैं और इस बात को दरकिनार करते हुए कि वे पेशेवर हैं या नहीं, यह बात पर विवाद से परे है कि उनका पेशा क्रिकेट खेलना है.
तेंडुलकर को एक अभिनेता या कलाकार के रूप में उनके काम के लिए पैसा नहीं दिया जाता है. उनके अभिनय के स्वभाव और क्वालिटी या कलाकार के रूप में उनके काम से उन्हें ये अनुबंध कभी नहीं मिलते और न ही उन्हें मिलने वाले पैसे. तेंडुलकर ने इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की. ट्रिब्यूनल की ओर से अमिताभ बच्चन को आयकर में दी गई छूट के एक फैसले से तेंडुलकर के मामले में मदद मिली.
2004 में ट्रिब्यूनल ने फैसला दिया था कि कौन बनेगा करोड़पति के प्रस्तोता के तौर पर होने वाली आय पर धारा 80 आरआर के तहत आयकर में छूट दी जा सकती है क्योंकि उन्होंने इस टीवी शो में एक कलाकार के तौर पर अपनी योग्यता का इस्तेमाल किया था. ट्रिब्यूनल की न्यायिक सदस्य आशा विजयराघवन और एकाउंटेंट सदस्य आर.के. पंडा ने फैसला दिया-''विज्ञापनों में काम करते समय तेंडुलकर को लाइटों और कैमरा का सामना करना पड़ा.
एक मॉडल के तौर पर वे अपनी कल्पनाशक्ति, रचनात्मकता और सभी तत्वों का मेल कराने की योग्यता का इस तरह इस्तेमाल करते हैं कि मानवीय संवेदनाओं और भावनाओं को प्रभावित कर सकें और उनमें एक सौंदर्य की अनुभूति भी होती है. इसमें कोई शक नहीं कि एक सफल खिलाड़ी होने के नाते मॉडल के रूप में उनका ब्रांड महत्व बढ़ जाता है. लेकिन यह वास्तविकता है कि उन्हें अपनी अभिनय क्षमता, कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता का इस्तेमाल करना पड़ता है.
हर खिलाड़ी में लाइट और कैमरा का सामना करने में उस स्तर की प्रतिभा, योग्यता या रचनात्मकता नहीं होती है. मॉडलिंग और विज्ञापनों और इस तरह की दूसरी गतिविधियों से होने वाली आय को एक कलाकार के पेशे के तौर पर होने वाली आय के तौर पर देखा जा सकता है.''
तेंडुलकर ने अपने कर्मचारियों पर होने वाले कल्याणकारी खर्च, जिसमें उनकी चाय और नाश्ते का खर्च भी शामिल है, की मद में 57,969 रु., मनोरंजन खर्च और टेलीफोन खर्च के रूप में 50,000-50,000 रु. और कार पर खर्च के रूप में 1,42,824 रु. कर योग्य आमदनी में कटौती (डिडक्शन) का भी दावा किया था लेकिन ट्रिब्यूनल ने इसे खारिज कर दिया.
उसका कहना था कि टेलीफोन, कार और भोजन का खर्च उनके और उनके परिवार के लिए था. बल्लेबाजी के लगभग सभी रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कराने वाले तेंडुलकर ने इस काम में जैसे खुद को ही पीछे छोड़ दिया है.