शिव का सबसे प्रिय महीना, भोले की कृपा पाने का सबसे शुभ दिन और अगर ऐसे में आपने कर ली कुछ खास शिवलिंगों की पूजा तो इस सावन में आप पर बरसेगी महादेव की कृपा.
भोले में समायी है सारी दुनिया, जगत के कण कण में है महादेव का वास. तभी तो महादेव हर रूप में भक्तों का कल्याण करते हैं. फिर चाहे महादेव की प्रतिमा की पूजा हो या फिर लिंग रूप उनकी आराधना.शिवलिंग को शिव का साक्षात रूप माना जाता है तभी तो शिवलिंग के दर्शन को स्वयं महादेव का दर्शन माना जाता है. और इसी मान्यता के चलते भक्त शिवलिंग को मंदिरों में और घरों में स्थापित कर उसकी पूजा अर्चना करते हैं.
कहते हैं कि शिवलिंग के अनेक रूप आपकी कई मनोकामनाओं को पूर्ण करने की शक्ति रखते है. फिर चाहे वो पारे का शिवलिंग हो, काले पत्थर, सोने-चांदी या फिर मामूली सी दिखने वाली मिट्टी का. अगर आपने खास तरह के शिवलिंग का निर्माण कर उसे घर में स्थापित कर दिया तो आपकी मनोकामनाओं की पूर्ति होते देर नहीं लगेगी.
अलग अलग प्रकार के शिवलिंग बनाकर शिव आराधना की ये परंपरा कब से शुरू हुई, महादेव को देवता और दैत्य दोनों ही अपना आराध्य मानते थे. लेकिन देवता हमेशा दैत्यों को बुद्धिबल से हरा दिया करते थे. ये समस्या लेकर दैत्य गुरू शुक्राचार्य मां पार्वती के पास हल जानने पहुंचे. मां पार्वती ने गुरू शुक्राचार्य को एक गुप्त विद्या बतायी जिससे दैत्यों की विजय निश्चित थी. ये जानकर परेशान देवता महादेव की शरण में आए. महादेव को समाधि में लीन देखकर वे जगत के पालनहार भगवान विष्णु के पास पहुंचे. भगवान विष्णु ने देवताओं को आश्वासन देते हुए कहा कि जितना बल और सामर्थ्य रहस्य विद्या में हैं. उतना बल केवल शिवलिंग के पूजन से देवता सहज ही प्राप्त कर सकते हैं.
तभी से ऋषि मुनियों ने शिवलिंग के पूजन और महत्व को जाना और आम भक्तों को भी इसके पूजन का महत्व समझाया. कहते हैं अगर खास तरह के शिवलिंग का निर्माण कर रूद्राभिषेक कर लिया जाए तो भोले की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होते देर नहीं लगती.
वैसे तो साल का हर दिन पावन होता है लेकिन सावन मास में शिवलिंग के दर्शन पूजन का अलग ही महत्व माना गया है. तो कौन सा शिवलिंग आपको करना है अपने घर में स्थापित और कैसे एक छोटी सी पूजा से पूरी हो सकती है आपकी हर मुराद. पढ़िए नीचे.
1. विपत्ति के नाश और मानसिक शांति के लिए ऐसे करें महादेव को खुश
मिटटी का शिवलिंग घर लेकर आएं. शिवलिंग का आकार 3 अंगुल से लेकर 12 अंगुल तक रखें. थाली या तांबे के पात्र में शिवलिंग की स्थापना करें. धूप दीप नैवेद्य से शिवलिंग की पूजा करें और अखंड दीपक जलाएं, पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें.
ऊं ह्रौं चं चंद्र मौलेश्वराय सशक्तिकाय नम: मंत्र का जाप करें. फल, फूल, प्रसाद चढ़ाते हुए ऊं नम: शिवाय का मानसिक जाप करें. पूजा के बाद बेलपत्र, पुष्प अवश्य अर्पित करें. पूजा स्थल पर कुमकुम से त्रिशूल की आकृति जरूर बनाएं. राह में आ रही बाधाएं दूर होंगी, मानसिक शांति की प्राप्ति की होगी.
2. पितृ व ग्रह दोषों से मुक्ति पाने के लिए शिव की ऐसे करें अराधना
काले पत्थर का 7 अंगुल से लेकर 16 अंगुल तक का शिवलिंग घर लेकर आएं. थाली या तांबे के पात्र में शिवलिंग की स्थापना करें. धूप दीप नैवेद्य से शिवलिंग की पूजा करें. अखंड दीपक जलाएं, पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें.
ॐ ह्रौं वं महाकालेश्वराय सशक्तिकाय नम मंत्र का जाप करें. फल, फूल, प्रसाद चढ़ाते हुए ॐ शिव ॐ हंस: का मानसिक जाप करें. पूजा के बाद आक के पत्ते, पुष्प अवश्य अर्पित करें. पूजा स्थल पर कुमकुम से नंदी की आकृति जरूर बनाएं. ग्रहों के बुरे प्रभाव से मुक्ति मिलेगी और पितृदोष के कारण आ रही समस्याओं का नाश होगा.
3. गृहस्थ एवं दाम्पत्य सुख के लिए शिव की भक्ति
संगमरमर का शिवलिंग घर लेकर आएं. शिवलिंग का आकार 3 अंगुल से लेकर 11 अंगुल तक रखें. थाली या तांबे के पात्र में शिवलिंग की स्थापना करें. धूप दीप नैवेद्य से शिवलिंग की पूजा करें. अखंड दीपक जलाएं, पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें.
ॐ वं चंद्रेश्वराय सशक्तिकाय नम: मंत्र का जाप करें. फल, फूल, प्रसाद चढ़ाते हुए ॐ रुद्राय नम: का मानसिक जाप करें. पूजा के बाद भस्म, पुष्प अर्पित करें. पूजा स्थल पर कुमकुम से चन्द्रमा की आकृति अवश्य बना लें.
4. शिक्षा में सफलता के लिए ऐसे करें शिव को प्रसन्न
स्फटिक का 5 अंगुल से लेकर 11 अंगुल तक का शिवलिंग घर लेकर आएं. थाली या तांबे के पात्र में शिवलिंग की स्थापना करें. धूप दीप नैवेद्य से शिवलिंग की पूजा करें. अखंड दीपक जलाएं, पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें.
ॐ ह्रौं वं शिवाय सशक्तिकाय नम: मंत्र का जाप करें. फल, फूल, प्रसाद चढ़ाते हुए ॐ शिवाय नम: का मानसिक जाप करें. पूजा के बाद चंदन, पुष्प अवश्य अर्पित करें. पूजा स्थल पर कुमकुम से त्रिपुंड की आकृति जरूर बनाएं. शिक्षा में उन्नत्ति होगी, प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिलेगी.
5. अकाल मृत्यु भय से उबारेंगे भोले भंडारी
चांदी का 3 अंगुल से लेकर 9 अंगुल तक का शिवलिंग घर लेकर आएं. थाली या तांबे के पात्र में शिवलिंग की स्थापना करें. धूप दीप नैवेद्य से शिवलिंग की पूजा करें. अखंड दीपक जलाएं, पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें.
ॐ ह्रौं वं उमा नाथाय सशक्तिकाय नम: मंत्र का जाप करें. फल, फूल, प्रसाद चढ़ाते हुए ॐ अवाधूतेशाय नम: का मानसिक जाप करें. पूजा के बाद धतूरा\धतूरे के फूल, पुष्प अवश्य अर्पित करें. पूजा स्थल पर कुमकुम से जमरू की आकृति जरूर बनाएं. अकाल मृत्यु दोष से छुटकारा मिलेगा और सौन्दर्य की प्राप्ति होगी.
6. संपत्ति की प्राप्ति के लिए शिव को ऐसे करें खुश
सोने का 3 अंगुल से लेकर 12 अंगुल तक का शिवलिंग घर लेकर आएं. थाली या तांबे के पात्र में शिवलिंग की स्थापना करें. धूप दीप नैवेद्य से शिवलिंग की पूजा करें. अखंड दीपक जलाएं, पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें.
ॐ ह्रौं वं त्रिलोकीनाथाय सशक्तिकाय नम: मंत्र का जाप करें. फल, फूल, प्रसाद चढ़ाते हुए ॐ सर्वेश्वराय नम: का मानसिक जाप करें. पूजा के बाद भांग के पत्ते, गेंदे का पुष्प अवश्य अर्पित करें. पूजा स्थल पर कुमकुम से ऊं की आकृति जरूर बनाएं. धन का आगमन बढ़ेगा, उच्च पद की प्राप्ति होगी और भूमि, नए वाहन खरीदने का योग बनेगा.
7. मंगलीक और सर्प दोष से मिलेगी मुक्ति
पारे का शिवलिंग घर लेकर आएं. शिवलिंग का भार सवा ग्यारह रत्ती से लेकर 500 ग्राम के बीच रखें. थाली या चांदी के पात्र में शिवलिंग की स्थापना करें. धूप दीप नैवेद्य से शिवलिंग की पूजा करें. अखंड दीपक जलाएं, पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें.
ॐ पं पार्देश्वराय सशक्तिकाय नम: मंत्र का जाप करें. फल, फूल प्रसाद चढ़ाते हुए ॐ कौलेश्वराय नम: मंत्र का मानसिक जाप करें. पूजा के बाद केसर, भस्म, शहद, पुष्प अवश्य अर्पित करें. पूजा स्थल पर कुमकुम से कमल के पुष्प की आकृति जरूर बनाएं. आध्यात्मिक कार्यों में रूचि बढ़ेगी, सिद्धियों की प्राप्ति होगी.
8. भाग्योदय के लिए करें शिव अराधना
रत्नों से बना 3 अंगुल से लेकर 16 अंगुल तक का शिवलिंग घर लेकर आएं. थाली या तांबे के पात्र में शिवलिंग की स्थापना करें. धूप दीप नैवेद्य से शिवलिंग की पूजा करें. अखंड दीपक जलाएं, पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें.
ॐ वं नील कंठाय सशक्तिकाय नम: मंत्र का जाप करें. फल, फूल, प्रसाद चढ़ाते हुए ऊं भैरवाय नम: का मानसिक जाप करें. पूजा के बाद भस्म, कस्तूरी, केसर, पुष्प अवश्य अर्पित करें. पूजा स्थल पर कुमकुम से त्रिशूल की आकृति जरूर बनाएं. हर तरह के रोगों से मुक्ति मिलेगी और व्यापार में वृद्धि के संकेत मिलने के साथ ही शत्रुओं से बचाव होगा, हर कार्य में सफलता मिलेगी.
9. मनोकामना पूर्ति
अष्ट धातु से बना 5 अंगुल से लेकर 14 अंगुल तक का शिवलिंग घर लेकर आएं. थाली या तांबे के पात्र में शिवलिंग की स्थापना करें. धूप दीप नैवेद्य से शिवलिंग की पूजा करें. अखंड दीपक जलाएं, पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें.
ॐ ह्रौं वं नीलकंठाय सशक्तिकाय नम: मंत्र का जाप करें. फल, फूल, प्रसाद चढ़ाते हुए ॐ नदेश्वराय नम: का मानसिक जाप करें. पूजा के धतूरा, आक, चंदन, भांग, पुष्प अवश्य अर्पित करें. पूजा स्थल पर कुमकुम से स्वास्तिक की आकृति जरूर बनाएं. हर तरह के सुख की प्राप्ति होगी.