scorecardresearch
 

पीएम व सोनिया से बात के बाद भी नहीं माने पवार

गठबंधन सरकार चलाने के कांग्रेसी तौर-तरीकों पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के ‘गंभीर एतराज’ जताने के कारण संप्रग सरकार के मतभेद सतह पर आ गए. राकांपा अध्यक्ष एवं कृषि मंत्री शरद पवार तथा भारी उद्योग मंत्री प्रफुल्ल पटेल के अपने मंत्रालय नहीं जाने से उनके इस्तीफे की अटकलों को और बल मिला.

Advertisement
X
शरद पवार
शरद पवार

गठबंधन सरकार चलाने के कांग्रेसी तौर-तरीकों पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के ‘गंभीर एतराज’ जताने के कारण संप्रग सरकार के मतभेद सतह पर आ गए. राकांपा अध्यक्ष एवं कृषि मंत्री शरद पवार तथा भारी उद्योग मंत्री प्रफुल्ल पटेल के अपने मंत्रालय नहीं जाने से उनके इस्तीफे की अटकलों को और बल मिला.

Advertisement

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी से पवार की बातचीत के बावजूद अब तक यह गतिरोध कायम है और राकांपा ने आगे की रणनीति तय करने के लिए पार्टी की बैठक सोमवार को बुलाई है.

दूसरी ओर, प्रधानमंत्री और कांग्रेस पार्टी दोनों ने ही पवार को अपना बहुत उपयोगी सहयोगी बताकर मामले को सुलझाने की कोशिश की. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नाराज शरद पवार से संपर्क किया और उन्हें ‘बेहद उपयोगी सहयोगी’ बताया लेकिन इस बात का कोई संकेत नहीं है कि कांग्रेस नेतृत्व राकांपा की चिंताओं के निराकरण के लिए क्या करने जा रहा है.

वहीं कांग्रेस ने राकांपा के साथ गतिरोध को ज्यादा तूल नहीं देते हुए कहा कि राकांपा प्रमुख शरद पवार संप्रग के एक वरिष्ठ और सम्मानित नेता हैं और पार्टी के साथ सभी मुद्दों को बातचीत के जरिये सुलझा लिया जायेगा.

Advertisement

पवार और उनकी पार्टी के सहयोगी प्रफुल्ल पटेल के विरोध स्वरूप मंत्रिमंडल की बैठक में हिस्सा नहीं लेने के एक दिन बाद राकांपा प्रमुख ने पार्टी की शिकायतों पर चर्चा के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की.

दिलचस्प बात यह है कि नाराज पवार संप्रग और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने अपनी सांसद बेटी सुप्रिया सुले की निजी कार से गए. इसे मंत्री पद से उनके इस्तीफे की अटकल को बल मिला. कृषि मंत्री पवार और उनके साथी भारी उद्योग मंत्री प्रफुल्ल पटेल शुक्रवार को अपने मंत्रालय नहीं गए.

पवार ने बाद में अपनी पार्टी के वरिष्ठ सहयोगियों के साथ मंत्रणा की. इसके बाद पटेल ने कहा कि राकांपा सरकार के कामकाज और गठबंधन के संचालन को लेकर नाखुश है और इसे कांग्रेस नेतृत्व को बता दिया गया है. पटेल ने कहा कि संप्रग-दो सरकार अपने कार्यकाल के अंतिम दो वर्षों’ में प्रवेश कर रही है और राकांपा चाहती है कि सरकार जनता से जुड़े मुद्दों पर ‘और निर्णायक’ तथा ‘अधिक प्रतिबद्ध’ बने.

उन्होंने कहा, ‘हमारे कुछ मुद्दे हैं जिसपर हम कुछ बदलाव चाहते हैं.’ उन्होंने कहा कि पार्टी संप्रग का हिस्सा बनी रहेगी. पटेल ने इन खबरों को खारिज कर दिया कि पवार सरकार में नंबर दो की हैसियत नहीं दिए जाने से नाराज हैं.

Advertisement

पार्टी की शिकायतों के निवारण के लिए गेंद को कांग्रेस के पाले में डालने के बाद पार्टी इस मुद्दे पर भावी नीति-रीति तय करने के लिए सोमवार को बैठक करेगी.

वहीं कांग्रेस ने राकांपा के साथ गतिरोध को ज्यादा भाव नहीं देते हुए कहा कि राकांपा प्रमुख शरद पवार संप्रग के एक वरिष्ठ और सम्मानित नेता हैं और पार्टी के साथ सभी मुद्दों को बातचीत के जरिये सुलझा लिया जायेगा.

कांग्रेस महासचिव एवं मीडिया विभाग के प्रमुख जनार्दन द्विवेदी ने संवाददाताओं से कहा, ‘हमारी नजरों में शरद पवार एक वरिष्ठ और सम्मानित नेता हैं. संप्रग में उन्हें इसी सम्मान के साथ देखा जाता है.’ द्विवेदी ने यह भी कहा कि कोई गंभीर समस्या नहीं है और समाधान निकल आयेगा.

पार्टी में असहजता को जाहिर करते हुए राकांपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि सहयोगी दलों के साथ विचार-विमर्श का अभाव है और उन मुद्दों का समाधान निकालने के लिए समन्वय समिति का अभाव है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के गठबंधन के साथियों को साथ लेकर नहीं चलने के कारण प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दे जमा होते गए. सिंह को बीती रात पवार की ओर से भेजे गए पत्र में इन बातों को शामिल किया गया था.

कांग्रेस के पुराने सहयोगी ने सवाल किया, ‘क्या गठबंधन के सहयोगी सिर्फ मंत्रालय या अपने महकमे तक सीमित हैं. क्यों किसी निर्णय में उन्हें शामिल नहीं किया जाता.’

Advertisement

उन्होंने कहा, ‘मेरी पार्टी को कभी महसूस नहीं हुआ कि जो मंत्रालय और महकमे हमारे पास हैं, सरकार में उससे इतर भी हमारी कोई भूमिका है.’

पार्टी नेता ने कहा कि संप्रग समन्वय समिति गठित करने के मुद्दे को भी राकांपा ने उठाया लेकिन उसपर अमल नहीं किया गया. इस्तीफे के बाबत पूछने पर पटेल ने कहा, ‘अभी तक हमने औपचारिक तौर पर न तो इस्तीफा दिया है और न ही उसे मंजूर करने का कोई सवाल है. मुद्दा इस्तीफा नहीं है. सिर्फ प्रधानमंत्री को पत्र भेजा गया है.’

पटेल ने पुरजोर तरीके से कहा कि उनके नेता पवार की अपनी शख्सियत है और सरकार में नंबर दो रहे प्रणव मुखर्जी के बाद उनका स्थान रहा है. उन्होंने कहा, ‘पवार इतने तुच्छ नेता नहीं हैं जो खुद इस तरह की छोटी बात करें. हमारे मुद्दे बड़े हैं. नंबर दो की हैसियत की बात बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जा रही है. अपनी शख्सियत के कारण ही पवार (संसद में) सोनिया गांधी के बाद और (मंत्रिमंडल की बैठकों में) प्रणव मुखर्जी के बाद बैठते रहे हैं.’

Advertisement
Advertisement