राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष के उम्मीदवार पीए संगमा ने रविवार को भोपाल में कहा कि उन्हें विश्वास है कि उन्हें ‘आत्मा की आवाज’ पर मत मिलेंगे और वह राष्ट्रपति चुनाव में विजय प्राप्त करेंगे.
राष्ट्रपति चुनाव के लिए भाजपा विधायकों और सांसदों से वोट मांगने यहां आये संगमा ने संवाददाताओं से कहा कि वे भगवान और चमत्कार में विश्वास रखते हैं तथा उन्हें पूरा विश्वास है कि उनके मतदाता ‘आत्मा की आवाज’ पर मत देंगे और उन्हें इस चुनाव में विजय प्राप्त होगी.
उनसे पूछा गया था कि राष्ट्रपति चुनाव में गणित पूरी तरह संप्रग उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी के पक्ष में दिखायी देता है और उनकी जीत पक्की दिखती है.
यह पूछे जाने पर कि इस पद के लिए खड़े होकर उन्होंने केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल अपनी पुत्री को धर्म संकट में डाल दिया है, संगमा ने कहा कि राष्ट्रपति पद का चुनाव दलीय आधार पर नहीं लड़ा जाता और यही कारण है कि राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने से पहले प्रणव मुखर्जी ने भी कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था.
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में संगमा ने कहा कि उनकी बेटी किसे मत देंगी, यह उन्हीं से पूछा जाये तो बेहतर होगा. कांग्रेस द्वारा उनका समर्थन करने पर आदिवासी नेता अरविंद नेताम को कांग्रेस पार्टी से निलंबित किये जाने संबंधी सवाल के जवाब में संगमा ने कहा कि कांग्रेस का यह कदम उसकी आदिवासी विरोधी नीति का परिचायक है, जबकि नेताम तो उनके मतदाता भी नहीं हैं. उन्होंने कहा कि आदिवासी फोरम ने भी कांग्रेस के इस कदम की निंदा की है.
इससे पहले लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव को लेकर संप्रग सरकार ने विपक्ष के साथ आम सहमति बनाने के लिए कोई चर्चा नहीं की और इसी के चलते पार्टी ने संगमा का समर्थन करने का निर्णय लिया.
सुषमा स्वराज ने कहा कि यह कोई पहला मौका नहीं है, जब राष्ट्रपति पद को लेकर चुनाव हो रहे हैं बल्कि इसके पहले 14 बार हुए राष्ट्रपति चुनाव में वर्ष 1977 में एक बार ही आम सहमति से चुनाव हुए थे, जबकि 13 बार तो चुनाव के माध्यम से ही राष्ट्रपति चुने गये हैं.
संगमा को वरिष्ठ आदिवासी नेता बताते हुए सुषमा स्वराज ने कहा कि वे नौ बार लोकासभा चुनाव जीतने के साथ-साथ दो बार विधायक चुने गये हैं और मेघालय के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं.