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दुनियाभर में 22 साल के कनाडाई मूल के एक्टर सेंट वॉन कोलुसी (Saint Von Colucci) को लेकर एक खबर फैली, जिसमें दावा किया गया कि उनकी मौत हो गई है. साथ में यह भी कहा गया कि कोलुसी ने फेमस BTS सिंगर जिमिन (Park Ji-min) जैसा दिखने के लिए करीब दर्जन भर कॉस्मेटिक सर्जरी कराई थीं. इन सर्जरी का उन पर रिएक्शन हुआ और उनकी हालत बिगड़ गई. बाद में अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया. लेकिन सच्चाई कुछ और है... आइए जानते हैं.
दरअसल, ब्रिटिश न्यूज वेबसाइट 'डेली मेल' ने खबर छापी कि साउथ कोरियन सिंगर Jimin जैसा दिखने के लिए कोलुसी ने जबड़े से लेकर नाक, आइब्रो, लिप्स, फेस तक की सर्जरी कराई थी. कुल मिलाकर उन्होंने 12 सर्जरी कराई और इसके लिए 1 करोड़ 80 लाख रुपये से अधिक खर्च कर दिए.
लेकिन कुछ ही महीने बाद इन कॉस्मेटिक सर्जरी के रिएक्शन सामने आने लगे. खासकर जबड़े की सर्जरी (Jaw Implant Surgery) के. ऐसे में जब हालत खराब हुई तो कोलुसी ने पिछले साल नवंबर में इम्प्लांट किए गए अपने जबड़े को हटवाने का फैसला लिया.
इसके लिए वो बीती शनिवार रात को अस्पताल में भर्ती हुए, जहां उनकी सर्जरी की गई. मगर अगली सुबह यानी रविवार को कोलुसी की मौत हो गई. बताया गया कि उनके शरीर में संक्रमण फैल गया था. उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी. हालांकि, बाद में 'डेली मेल' ने ये खबर डिलीट कर दी.
इस खबर पर कोलुसी के सहयोगी एरिक ब्लेक ने भी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने घटना को 'बहुत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए कहा था कि महीनों पहले हुई कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं से जटिलताओं से पीड़ित होने के बाद कोलुसी का साउथ कोरिया के एक अस्पताल में निधन हो गया. उन्होंने बताया कि कोलुसी 2019 में साउथ कोरिया आए थे. यहां वह कई ड्रामा सीरीज में काम कर रहे थे. कोलुसी ने जून में कोरियन ड्रामा 'प्रिटी लाइज' की शूटिंग शुरू की थी, जो दिसंबर में पूरी हुई.
कोलुसी को लेकर फैली खबर में कितनी सच्चाई?
अल जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोलुसी के निधन की बात केवल किसी की कल्पना की उपज थी. संभवतः यह एक AI जनरेटिव प्रोग्राम का उपयोग करके निर्मित की गई थी. हाल के दिनों में AI (Artificial intelligence) जनित फोटोज और कंटेंट का चलन बढ़ा है.
इस मामले की शुरुआत तब हुई जब दुनिया भर के पत्रकारों को कोलुसी की मौत की घोषणा करने वाली एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई. विज्ञप्ति अंग्रेजी में लिखी गई थी, जिसे हाइप पब्लिक रिलेशंस नामक एक पीआर एजेंसी द्वारा रिलीज किया गया था. इसके साथ कोलुसी की कुछ फोटोज को भी जारी किया गया, जो काफी धुंधली थीं. जैसे उन्हें AI से निर्मित करवाया गया हो. इसके बाद कोलुसी की कहानी को यूएस, कनाडा, यूके, दक्षिण कोरिया, मलेशिया और फिलीपींस के दर्जनों मीडिया आउटलेट्स ने पब्लिश किया.
लेकिन जांच-पड़ताल करने पर पता चला कि प्रेस विज्ञप्ति में साझा किए गए दस्तावेज फर्जी थे. जैसे- कोलुसी किस अस्पताल में भर्ती थे. उनकी सर्जरी कहां हुई. उनकी फोटोज भी रियल नहीं थी. इतना ही नहीं शेयर किए लिंक भी ओपन नहीं हो रहे थे. जिसमें कोलुसी के कथित इंस्टाग्राम अकाउंट का लिंक भी शामिल है.
इन सबके अलावा किसी बड़े सेलिब्रेटी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से कोलुसी को लेकर कुछ नहीं लिखा था. सबसे बड़ी बात यह है कि साउथ कोरियाई मीडिया ने रिपोर्ट किया है कि पुलिस को प्लास्टिक सर्जरी की जटिलताओं के कारण मरने वाले कनाडाई एक्टर कोलुसी के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है.
इस तरह यह मामला केवल बड़े पैमाने पर गलत सूचना फैलाने के लिए AI के इस्तेमाल की आशंकाओं को पुख्ता करता है और इस बात पर प्रकाश डालता है कि तथ्यों की जांच और सत्यापन का कार्य तेजी से कठिन होता जा रहा है.