कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से बॉयोटेक्नोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएट एक युवती ने लाखों की सैलरी वाली जॉब छोड़कर एक जूकीपर बन गई. उसने बड़े बायोफार्मास्युटिकल कंपनी की हाई सैलरी कॉरपोरेट जॉब को ठुकरा कर चिड़ियाघर में जानवरों की देखभाल करने के काम को चुना.
पूर्वी चीन के जियांग्सू प्रांत की 25 वर्षीय मा या ने एक बायोफार्मास्युटिकल कंपनी में अपनी हाई सैलरी वाली नौकरी छोड़ने का साहसिक निर्णय लिया और अब वह फेमस शंघाई चिड़ियाघर में जानवरों की देखभाल करने का काम कर रही हैं.
बायोफार्मास्युटिकल कंपनी में थीं रिसर्चर
वह एक बायोफार्मास्युटिकल कंपनी में रिसर्चर का काम कर रही थी. बायोफार्मास्युटिकल कंपनियों में एक नए शोधकर्ता का औसत मासिक वेतन लगभग 10,000 युआन (1.20 लाख रुपया) है, जबकि एक चिड़ियाघर संचालक का वेतन इससे काफी कम होता है.
युवती के फैसले ने लोगों को किया हैरान
कई लोगों को मा का निर्णय हैरान करने वाला और अपरंपरागत लगा. विशेष रूप से उनकी प्रभावशाली शैक्षिक पृष्ठभूमि को देखते हुए, जिसमें इंपीरियल कॉलेज लंदन से जैविक विज्ञान में स्नातक की डिग्री और प्रतिष्ठित कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पशु चिकित्सा विज्ञान में मास्टर डिग्री शामिल है.
मा ने कहा कि चिड़ियाघर में उनकी भूमिका ने उन्हें स्वस्थ बना दिया है, क्योंकि वह यहां एक एक्टिव लाइफस्टाइल का आनंद ले रही हैं. उन्हें अब ऑफिस के सीमित माहौल में रहने को मजबूर नहीं होना पड़ रहा.
चिड़ियाघर में जानवरों को नजदीक से देखने का मिला मौका
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस काम से उन्हें पशुओं के जीवन को करीब से देखने का अवसर मिलेगा, जिससे उन्हें महत्वपूर्ण व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा. इससे पशुओं के पोषण और रोगों के उपचार के लिए शोध करने में काफी लाभ होगा. मा पिछले साल फरवरी में आधिकारिक तौर पर चिड़ियाघर में पूर्णकालिक कर्मचारी बन गई थीं.
वह आठ से पांच बजे तक काम करती हैं और उन्हें हाथियों, दरियाई घोड़ों, बंदरों, बाघों और लाल पांडा सहित कई तरह के जानवरों की देखभाल करने का यहां मौका मिला है और वर्तमान में उनपर हिरणों और बकरियों की देखभाल की जिम्मेदारी है.