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अंधभक्ति में हजारों मौतें! कहीं भूख से खुद को तड़पाया, तो कहीं जिंदा लोगों की सजी सामूहिक 'चिता'

केन्या में 'ईसा मसीह' से मिलने की चाहत में 100 से ज्यादा लोगों ने भूख से तड़पकर अपनी जान दे दी. लेकिन इससे पहले भी इसी तरह के मामले कई देशों से सामने आए हैं.

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अंधभक्ति की वजह से हुईं सैकड़ों मौत (तस्वीरें- सोशल मीडिया)
अंधभक्ति की वजह से हुईं सैकड़ों मौत (तस्वीरें- सोशल मीडिया)

अंधभक्ति और धार्मिक नेताओं पर आंख मूंद कर भरोसा करने की सजा दुनिया में तमाम लोग भुगत चुके हैं. इसके शिकार अधिकतर भोले भाले और अनपढ़ लोग होते हैं. जिनकी गरीबी, लाचारी का फायदा उठाकर आसानी से ब्रेनवॉश कर दिया जाता है. अफ्रीकी देश केन्या से हाल में ही खबर आई कि यहां 100 से ज्यादा लोगों के शव बरामद हुए हैं. 

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इनकी मौत भूख से तड़पने के बाद हुई थी. इन्हें एक पादरी ने कहा था कि अगर 'ईसा मसीह' से मिलना है, तो मरते दम तक भूखे रहो. आरोपी पादरी का नाम पॉल मकेंजी नथेंगे है. उसे 14 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया. वो 103 लोगों की मौत का जिम्मेदार है. 

पुलिस को किसी ने इस मामले की सूचना दी थी, जिसके बाद जांच करने पर मकेंजी के खेतों में कई कब्र मिलीं, जिनमें लोगों को ठीक से दफनाया तक नहीं गया था. इसके साथ ही भूख से तड़पते 15 लोग मिले, इनमें से 4 की बाद में मौत हो गई. जब खुदाई की गई, तो शवों के मिलने का सिलसिला थम ही नहीं रहा था. 

लोगों की भूख से हुई मौत (तस्वीर- सोशल मीडिया)
लोगों की भूख से हुई मौत (तस्वीर- सोशल मीडिया)

इस घटना ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. लेकिन इससे भी बड़ी बात ये है कि ऐसे मामले दुनिया के दूसरे हिस्सों से भी सामने आ चुके हैं. पॉल मकेंजी से पहले इस लिस्ट में जिम जोन्स, मार्शल एप्पलव्हाइट, शोको असहारा और डेविड कोरेश का नाम जुड़ चुका है. ये वो लोग हैं, जिनकी वजह से इनके दर्जनों या यूं कहें सैकड़ों अनुयायियों की मौत हो गई. मृतकों की गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने इन लोगों पर भरोसा किया. 
 
अमेरिका 

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जिम जोन्स नामक शख्स ने 1954 में 'डिसीपल्स ऑफ क्रिस्ट' नाम से एक धार्मिक संस्था का गठन किया. इसे ईसाई और कम्युनिस्ट विचारधारा का कॉम्बिनेशन बताया गया. इसके अनुयायियों की संख्या हजारों में थी. जोन्स ने 1978 में लोगों को सामूहिक आत्महत्या करने का आदेश दिया था. लोगों ने सायनाइड युक्त ड्रिंक पी ली थी. जिन्होंने पीने का विरोध किया, उन्हें इंजेक्शन के जरिए ये जहर दिया गया. इससे 900 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. इनमें अधिकतर बच्चे थे.

इनके शव दक्षिण अमेरिकी देश गुयाना में मिले थे. ये जमीन जोन्स ने लीज पर ली थी. जोन्स को हर महीने भारी मात्रा में सायनाइड मिल रहा था. उसने किसी ज्वेलर का लाइसेंस हासिल कर लिया था. वहीं ये सायनाइड सोना साफ करने के बहाने से मिलता था. जोन्स ने इस घटना को ऑडियो टेप में रिकॉर्ड कर लिया. इसमें बोला गया, 'अपनी जिंदगी अपने लिए ले रहे हैं. हम थक गए हैं. हम आत्महत्या नहीं कर रहे. हमने एक अमानवीय दुनिया की स्थितियों का विरोध करते हुए क्रांतिकारी आत्महत्या करने का काम किया है.'

युगांडा
 
युगांडा में क्रेडोनिया मर्विन्डे और जोसेफ किबवेटियर नामक महिला और पुरुष ने 1989 में एक धार्मिक ग्रुप का गठन किया. इन्होंने दावा किया कि इन्हें वर्जिन मैरी के दर्शन हुए हैं. ये वो वक्त था, जब इस देश में राजनीतिक और सामाजिक उथल पुथल मची हुई थी. लोगों का कैथोलिक चर्च से विश्वास कम हो रहा था. इन्होंने लोगों से 1990 के समय में दावा किया कि साल 2000 में कयामत आने वाली है. जिसके चलते इनके अनुयायियों ने तैयारी करना शुरू कर दिया.

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जिंदा जलाकर मारे गए थे लोग (तस्वीर- सोशल मीडिया)
जिंदा जलाकर मारे गए थे लोग (तस्वीर- सोशल मीडिया)

इनके समूह में शामिल लोगों ने अपना सामान बेच दिया और इन दोनों को सारा पैसा सौंप दिया. मगर जब 1 जनवरी 2000 को कुछ नहीं हुआ, तो लोगों का इन पर से विश्वास कम होने लगा. बस एक बार फिर लोगों को अपनी मुट्ठी में लाने के लिए इन्होंने दुनिया के अंत की तारीख 17 मार्च, 2000 बता दी.

फिर कुनुंगू शहर में एक बड़ी पार्टी का आयोजन किया. तभी पार्टी वाली इमारत में एक जोरदार धमाका हुआ और भीषण आग लग गई. इसमें शामिल होने आए सभी 530 लोगों की मौत हो गई. लोग चाहकर भी बिल्डिंग से भाग नहीं सके, इसके लिए खिड़की और दरवाजे बंद कर दिए गए. पहले इस मामले को सामूहिक आत्महत्या माना गया लेकिन बाद में सामूहिक हत्या करार दिया गया. इन दोनों में से कोई पकड़ा नहीं गया, सब भाग गए.

अमेरिका

हैवंस गेट नाम की एक और अमेरिकी धार्मिक मूवमेंट में शामिल लोगों के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ. इस ग्रुप को ईसाई, नई एज और यूएफओलॉजी की विचारधारा का मिश्रण बताया गया, वहीं इसे UFO रिलीजन (धर्म) नाम मिला. इनका मानना था कि ये अपने इंसानी स्वभाग को अगर नहीं मानेंगे, तो जीवित रहते हुए UFO पर चढ़कर स्वर्ग तक जा सकते हैं. ग्रुप की स्थापना करने वाले का नाम बोनी नेटल्स था. जो 1985 में कैंसर से मर गया. इनका मानना था कि इंसानी शरीर आत्मा के लिए महज एक वाहन है और चेतना दूर तक जा सकती है.

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अक्टूबर 1996 में कैलिफोर्निया के सांता फे में इस समूह के लोगों ने 9600 स्क्वायर फीट का घर किराए पर लिया. इसी महीने इन्होंने एलियन एब्डक्शन इंश्योरेंस (Alien Abduction Insurance) भी खरीदा. जिसका लाभ एलियंस द्वारा अपहरण करने पर मिलता है. ऐसा इसलिए क्योंकि तब एलियंस को लेकर काफी अफवाहें थीं और लोग अचानक गायब हो जाते थे और फिर दावा करते थे कि उनका एलियंस ने अपहरण कर लिया है. इसके बाद एलियन एब्डक्शन इंश्योरेंस लाया गया. 

मार्शल एप्पलव्हाइट इस ग्रुप का सह संस्थापक था. उसने आखिरी मैसेज का वीडियो टेप रिकॉर्ड कर लिया. इसमें वो कहता है कि सामूहिक आत्महत्या ही इस पृथ्वी को खाली करने का एकमात्र तरीका है. उसने कहा कि धूमकेतू Hale–Bopp आएगा.

इनका मानना था कि आत्महत्या करने वाले लोगों की आत्मा UFO की मदद से ट्रैवल करके स्वर्ग तक जा सकती है. एप्पलव्हाइट और उसके 38 अनुयायियों ने एप्पल सॉस और पुडिंग में फेनोबार्बिटल नामक ड्रग्स को मिलाकर खा लिया. इन्होंने काफी वोडका भी पी, ताकि ड्रग के असर को बढ़ाया जा सके. इसके साथ इन्होंने अपने सिर प्लास्टिक बैग्स से कवर कर लिए, ताकि इनका दम घुट सके. इन सबने काले रंग की शर्ट, स्वेट पैंट और काले सफेद जूते पहने हुए थे.  

जापान 

जापान में 1987 में शोको असाहारा नामक शख्स ने ओम शिनरिक्यो नाम से धार्मिक आंदोलन की शुरुआत की. इसे इन्होंने कई धर्मों का मिलाजुला रूप बताया. तमाम चेतावनियों के बाद भी जापान सरकार ने इसे 1989 में कानूनी मान्यता दे दी. फिर तो शिनरिक्यो टेलीविजन पर दिखने लगा. उसके अनुयायी बढ़ते जा रहे थे.

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ग्रुप के लोगों ने टोक्यो सब्वे पर किया था हमला (तस्वीर- सोशल मीडिया)
ग्रुप के लोगों ने टोक्यो सब्वे पर किया था हमला (तस्वीर- सोशल मीडिया)

1992 में उसने खुद को क्रिस्ट (ईसा मसीह) घोषित कर दिया. वो दावा करता था कि दूसरों के पाप को अपने सिर पर ले लेगा. उसने तीसरे विश्व युद्ध को लेकर भी उलटे सीधे दावे कर दिए थे. आज भी ये संगठन जापान में मौजूद है. इन्होंने 20 मार्च, 1995 में नर्व एजेंट की मदद से टोक्टो सब्वे पर हमला कर दिया था. जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई. जबकि इससे पड़ने वाले प्रभाव से हजारों लोगों को नुकसान उठाना पड़ा है.
 
वियतनाम

का वान लियाम नामक शख्स देख नहीं सकता था. वो खुद को पैगंबर और ता ही का राजा मानता था. ये जगह राजधानी हनोई से 180 मील की दूरी पर है. उसने गांव में रहने वाले अपने अनुयायियों से कहा कि अगर वो उसे पैसा देंगे, तो वो स्वर्ग तक जाने वाली सड़क बना देगा. उसे अक्टूबर, 1990 तक करीब 10 हजार डॉलर मिल गए थे.

ये पैसा अनपढ़ और गरीब लोगों की मेहनत का था. फिर उसने अपने 53 अनुयायियों से कहा कि एक दूसरे को मार दो. इसके लिए गन और अन्य हथियारों का इस्तेमाल किया गया. अभी तक ये कारण पता नहीं चला है कि उसने क्या बोलकर लोगों को ये आदेश दिया लेकिन ऐसा माना जाता है कि उसे अपनी धोखाधड़ी के पर्दाफाश होने का डर था. वो फरार हो गया और फिर कभी नहीं पकड़ा गया.

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