विश्वभर के तमाम सरकारी और गैर सरकारी संगठनों के ‘भागीरथ’ प्रयासों के बावजूद दुनिया में छह में से एक वयस्क व्यक्ति निरक्षर है और विश्व के विभिन्न हिस्सों में जारी हिंसा और गरीबी वैश्विक साक्षरता की राह में बड़ा रोड़ा साबित हो रहे हैं.
दुनिया भर में साक्षरता को बढ़ावा देने वाले संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने इस वर्ष 8 सितंबर को मनाये जाने वाले अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस की विषय वस्तु ‘साक्षरता और शांति’ रखा है.
यूनेस्को की महानिदेशक इरिना बोकोवा ने अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2011 के मौके पर दिये अपने संदेश में कहा, ‘इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस ने साक्षरता और शांति के आवश्यक रिश्ते पर विशेष ध्यान देने का मौका दिया है.’
बोकोवा ने कहा, ‘साक्षरता शांति की स्थापना के लिये पहली आवश्यकता है क्योंकि इससे कई लाभ होते है. साक्षरता मानवीय, सांस्कृतिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक दायरे से आगे निकलने में मदद करती है.’
उन्होंने कहा, ‘नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक 79 करोड 30 लाख वयस्कों में मूलभूत साक्षरता का अभाव है और वे पढ़ लिख नहीं सकते हैं. इनमें से ज्यादातर महिलायें और बच्चे हैं. करीब छह करोड 70 लाख बच्चे स्कूल से बाहर हैं और कई तो ऐसे भी हैं जो कभी-कभी ही स्कूल जाते हैं.’
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेशर तुलसी राम ने कहा, ‘अफ्रीका और दक्षिण एशिया में अशिक्षा के पीछे गरीबी एक बड़ा कारण है. इसके अलावा एक अन्य प्रमुख कारण वहां के छोटे-छोटे देशों जैसे सोमालिया, चाड, सूडान, कांगो में लंबे समय से हिंसा का दौर जारी है. वहां के कबीले बच्चों को लड़ाई के लिये सेना में शामिल कर रहे हैं जिससे वे शिक्षा से महरूम हो रहे हैं.’
यूनेस्को के मुताबिक विश्व के संघषर्रत इलाकों में दो करोड़ 80 लाख बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं. इन इलाकों में दी जाने वाली मानवीय सहायता में शिक्षा का हिस्सा मात्र दो प्रतिशत होता है. प्रोफेसर तुलसी राम ने कहा कि विश्वभर में साक्षरता को बढ़ाने के लिये राजनीतिक प्रतिबद्धता की जरूरत है.
उन्होंने कहा, ‘वेनेजुएला में ह्यूगो शावेज जब सत्ता में आये तो उन्होंने सबसे पहले क्यूबा के दो लाख शिक्षकों को अपने देश में आमंत्रित किया ताकि वे उनके देशवासियों को शिक्षित कर सकें.
शावेज के इस कदम से आज वेनेजुएला में बहुत बदलाव आया है और लोग तकनीक और कृषि के क्षेत्र में बहुत आगे हो गये हैं.’ उन्होंने कहा कि वेनेजुएला की तरह ही भारत सरकार को चाहिये वह देश में सरकारी स्कूलों की संख्या बढ़ाये तथा वहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करे. भारत में प्रशिक्षत शिक्षकों की बहुत जरूरत है.
दुनिया के सभी लोगों को साक्षर बनाने के लिये संयुक्त राष्ट्र ने 8 सितंबर के दिन को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के रूप में मनाये जाने की शुरुआत की. यह दिन सर्वप्रथम आठ सितंबर 1966 को पहली बार अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के रूप में मनाया गया था. संयुक्त राष्ट्र की इस संस्था के मुताबिक तमाम नकारात्मक आंकड़ों के बावजूद अच्छी बात यह है कि विश्व के करीब चार अरब लोग साक्षर हैं.
(8 सितंबर अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर विशेष)