अफ्रीका महाद्वीप के उत्तरी प्रदेश मिस्र में प्राचीन काल में मृतक शरीरों पर चिन्ह लगाकर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखकर उनके ऊपर समाधियां बना देते थे. वहां के रहनेवालों का विश्वास था कि इन समाधियों में से आत्माएं फिर लौट आती हैं. इन समाधियों में सबसे अधिक सुरक्षित और प्रसिद्ध स्थान पिरामिड थे. ये पिरामिड बादशाहों के मृतक शरीरों को गाड़ने के लिए बनाए जाते थे.
इन पिरामिडों में सबसे बड़ा गिजा का पिरामिड है. इसे आज से पांच हजार से अधिक वर्ष पहले नील नदी के मरुस्थल में बहुत-से दासों ने बनाया था. क्षेत्रफल में यह साढ़े बारह एकड़ और ऊंचाई में 451 फुट है. आज भी इसमें इतने पत्थर लगे हैं कि उनसे एक बड़ा नगर बन सकता है. इस विशाल भवन का नक्शा इतना सही था कि आज भी इसके आधार पर चारों भुजाओं की लंबाई में दो अंगुल से अधिक का अंतर नहीं है.
इन पिरामिडों के भीतरी भाग में ऐसे अनेक बरामदे हुए हैं, जिनमें होकर उन स्थानों में जाते हैं, जहां मिश्र के प्राचीन बादशाह और बेगमें अनंत निद्रा में सोए हुए हैं. इन विशाल पिरामिडों को बहुत-से दासों ने खून-पसीना एक करके वर्षो में बनाया था. इनके लिए नील नदी के किनारे से पत्थर लाए गए थे. नील नदी यहां से नौ मील की दूरी पर है. अकेला गिजा का पिरामिड बीस वर्ष में बन पाया था.
मिस्र के पिरामिड संसार की सात आश्चर्यजनक वस्तुओं में से है. आज भी ये सारे संसार में प्रसिद्ध हैं और दुनिया के कोने-कोने से लोग उन्हें देखने के लिए बड़ी उत्सुकता से आते हैं. इन पिरामिड का कला कौशल वास्तव में निराला है.