भारत समेत तमाम देशों में अपराध के निपटारे के लिए सख्त सजाओं का प्रावधान है. फांसी या मृत्युदंड भी इन्हीं सजाओं में शामिल है. लेकिन देश दुनिया में कई मामले ऐसे देखे गए हैं जहां किसी दुर्दांत अपराधी की मौत की सजा पर मानवाधिकार के पुरोधाओं की तरफ से विरोध हुआ है.
वहीं ऐसा भी देखा गया है कि मौके बेमौके तमाम एथिकल ग्रुप्स ने दुनियाभर में मृत्युदंड के तरीकों की तीखी आलोचना की है.
ध्यान रहे कि हाल के वर्षों में दुनिया भर में मृत्युदंड के मामलों में वृद्धि देखी गई है. चाहे डेथ वैन से मारना हो या फिर क्रिमिनल्स को 'डेथ चैंबर' में फेंकना तमाम मुल्क अपराधियों के साथ ऐसा बहुत कुछ कर रहे हैं जो रूह को कंपा कर रख देने वाला है.
जिक्र अपराधियों को निर्मम तरीके से मारने का हुआ है तो बताते चलें कि मृत्युदंड के उपयोग के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका एक बार फिर आलोचना का शिकार हुआ है. यहां अपराधियों के लिए मौत के नए तरीकों (नाइट्रोजन गैस से मारने )का परीक्षण किया जा रहा है. जिसकी दुनिया भर के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने निंदा की है.
तो आइये जानें दुर्दांत अपराधियों के खात्मे के लिए क्या निर्मम तकनीक अपना रहे हैं अलग अलग मुल्क.
नाइट्रोजन गैस
इस साल की शुरुआत में अमेरिका में केनेथ यूजीन स्मिथ की फांसी, नाइट्रोजन गैस का पहला प्रयोग था. बताया जा रहा है कि 58 वर्षीय हत्यारे स्मिथ को नाइट्रोजन से मारने में 22 मिनट लगे.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इस दौरान स्मिथ को असहनीय दर्द हुआ और नाइट्रोजन के कारण वो तड़प-तड़प के मरा.
एक मानवाधिकार वकील ने दावा किया कि नई पद्धति का परीक्षण करने के लिए स्मिथ को 'मानव गिनी पिग' के रूप में इस्तेमाल किया गया था.
बताया ये भी जा रहा है कि स्मिथ के बाद अब एक अन्य अपराधी एलन यूजीन मिलर को भी नाइट्रोजन गैस से तड़पा कर मृत्युदंड दिया जाएगा.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने 'वैज्ञानिक साक्ष्य की कमी' का हवाला देकर मृत्यु के लिए इस्तेमाल की जा रही इस पद्धति की आलोचना की है.
बावजूद इसके फांसी देने के अनैतिक तरीके अभी भी दुनिया भर में जारी हैं, जिनमें सिर कलम करने से लेकर अपराधियों को 'डेथ चैंबर' में डालने और इलेक्ट्रिक चेयर में बैठाने तक तमाम चीजें शामिल हैं.
'डेथ चैंबर' या इलेक्ट्रिक कुर्सी
'डेथ चैंबर' या इलेक्ट्रिक कुर्सी किसी ज़माने में पूरे अमेरिका में अपराधियों के बीच खौफ का पर्याय था. जो अभी भी कुछ अमेरिकी शहरों में उपलब्ध है. हालांकि अब वक़्त बदल चुका है अब घातक इंजेक्शंस का इस्तेमाल कर अपराधियों को मौत के घाट उतार दिया जाता है.
अमरीका में अभी भी 4 राज्य अलबामा, फ्लोरिडा, केंटकी और टेनेसी ऐसे हैं, जहां बिजली की कुर्सी का इस्तेमाल कर अपरधियों को मौत की सजा दी जाती है.
लेकिन डेथ चैंबर और ग्रिम रूम, जिसमें काले पर्दों से सजी एक गद्देदार कुर्सी होती है, का उपयोग केवल तभी किया जाता है जब जहरीले इंजेक्शन को लेकर विरोध होता है. तमाम अलग अलग पोस्टमॉर्टम से पता चला है कि इलेक्ट्रिक चेयर से चोट लगना काफी कष्टदायी होता है.
चाइनीज डेथ वैन
कथित तौर पर हत्याओं को तेजी से अंजाम देने के लिए डेथ वैन चीन के चारों ओर घूमती हैं. माना जाता है कि ये वैन किसी भी वक़्त हत्या को अंजाम दे देती हैं.
2021 की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि देश भर में मौत की सजा जल्दी हो इसके लिए इस वैन को अस्तित्व में लाया गया है. कहा ये भी जाता है कि ये वैन फ़ौरन ही एक्शन लेती है जिससे अपराधियों का काम तमाम हो जाता है.
माना जाता है कि सामान्य पुलिस वैन की तरह दिखने वाले ये वाहन एक्सीक्यूशन चैंबर की तरह काम करते हैं, जिसमें वैन के आंतरिक भाग में सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं और वैन की दीवार पर एक बिस्तर लगा होता है.
बताया ये भी जाता है कि इस वैन से अपराधियों को मारने के बाद उनके शरीर से आंखें, गुर्दे, यकृत, अग्न्याशय, फेफड़े और शरीर के अन्य सभी उपयोगी अंग काट लिए जाते हैं जिनका इस्तेमाल वैज्ञानिक रिसर्च में होता है.
एंटी एयरक्राफ्ट गंस
जहरीले इंजेक्शन और फांसी पर लटकाने की बात हम कर चुके हैं. साथ ही हम ये भी जानते हैं कि कई जगहों पर अपराधियों को मृत्युदंड देने के लिए उनका सिर कलम कर दिया जाता है. लेकिन नार्थ कोरिया का मामला बिलकुल भी ऐसा नहीं है.
किम जोंग के मुल्क में जो भी अपराध करता है उसपर एंटी एयरक्राफ्ट गंस का इस्तेमाल किया जाता है. बताया जाता है कि दोषी पाए जाने पर अपराधियों को विमान भेदी ZPU-4 AA बंदूकों से छलनी कर दिया जाता है.
इन बंदूकों के विषय में रोचक तथ्य ये है कि न केवल इनकी आवाज इंसान के कान के पर्दे फाड़ देती हैं बल्कि जिस स्पीड से इनमें से गोली निकलती है इंसान के शरीर में कुछ बचता नहीं है.