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MP: पति ने बेटों के साथ मिलकर बनवाया ‘पत्नी का मंदिर’, कोरोना की दूसरी लहर में हो गई थी मौत

एमपी के शाजापुर ज‍िले से अनूठा मामला सामने आया है जहां एक पत‍ि ने पत्नी की मौत के बाद घर के बाहर ही उसका मंद‍िर बनवा द‍िया जहां तीन फीट की बैठी हुई प्रतिमा स्थापित की. उस प्रत‍िमा को रोज साड़ी पहनाई जाती है.

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शाजापुर ज‍िले में बना पत्नी का मंद‍िर.
शाजापुर ज‍िले में बना पत्नी का मंद‍िर.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • एमपी के शाजापुर ज‍िले से आया अनोखा मामला
  • घर के बाहर ही बनवा द‍िया द‍िवंगत पत्नी का मंद‍िर

लोग देवी-देवताओं की मंदिर बनाते हैं. महापुरुषों की मंदिर बनाते हैं. लेकिन एमपी के शाजापुर ज‍िले में पत्नी की मौत के बाद पति ने ‘पत्नी का मंदिर’ बनवा दिया. घर के ठीक बाहर बनाए इस मंदिर में दिवंगत पत्नी की तीन फीट ऊंचाई वाली बैठी हुई प्रतिमा स्थापित की गई है. प्रतिदिन बेटे अपनी मां को यहीं पर दर्शनकर तसल्ली करते हैं.
  
ग्राम सांपखेड़ा निवासी बंजारा समाज के नारायणसिंह राठौड़ अपनी पत्नी और बेटों के साथ परिवार सहित रह रहे थे. परिवार में सभी कुछ सामान्य चल रहा था लेकिन नरायणसिंह की पत्नी गीताबाई धार्मिक कार्यक्रमों में ज्यादा सम्मिलित रहती थी. भजन-कीर्तन में प्रतिदिन जाने के साथ ही वो भगवान की भक्ति में रमी हुई थी.

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नारायण सिंह की पत्नी गीताबाई.
नारायण सिंह की पत्नी गीताबाई.

ऐसे में परिवार के बेटे अपनी मां को देवी तुल्य ही समझते थे लेकिन कोरोना संक्रमण काल की दूसरी लहर के दौरान गीताबाई की तबीयत बिगड़ने लगी. परिजनों ने डॉक्टर से ट्रीटमेंट कराया तो पता लगा कि गीताबाई का ब्लडप्रेशर बढ़ता जा रहा है. गीताबाई के बेटे संजय उर्फ लक्की राठौड़ ने बताया कि डॉक्टरों ने मां का इलाज किया लेकिन इससे भी उनकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ. 

लाखों रुपये ट्रीटमेंट में खर्च करने और अच्छे से अच्छे डॉक्टर को दिखाने के बाद भी गीताबाई की जान नहीं बच पाई और 27 अप्रैल 2021 को उनका निधन हो गया. हमेशा मां के साए में रह रहे बेटे मां की कमी को सहन नहीं कर पा रहे थे. ऐसे में पिता नारायणसिंह के साथ विचार-विमर्श के बाद पिता और बेटों ने मिलकर गीताबाई की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया.
  
गीताबाई के तीसरे पर कर दिया प्रतिमा बनवाने का ऑर्डर 

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गीताबाई के बेटे लक्की ने बताया कि मां के चले जाने से पूरा परिवार टूट गया था. ऐसे में सभी ने तय करके मां की प्रतिमा बनवाने का निर्णय लिया. इसके चलते मां के निधन के बाद तीसरे के कार्यक्रम वाले दिन ही 29 अप्रैल को उनकी प्रतिमा बनवाने का ऑर्डर दे दिया. जिला मुख्यालय पर स्थित प्रतिमा का विक्रय करने वाले से मिलकर अलवर राजस्थान के कलाकारों को प्रतिमा बनवाने का ऑर्डर दे दिया. करीब डेढ़ माह बाद प्रतिमा बनकर तैयार हुई जिसे घर पर ले आए.

घर के बाहर ही बनवा द‍िया पत्नी का मंद‍िर.
घर के बाहर ही बनवा द‍िया पत्नी का मंद‍िर.

  
सिर्फ बोलती नहीं है, लेकिन हर समय मौजूद तो है 

लक्की ने बताया कि मां की प्रतिमा को बनवाने के बाद जब प्रतिमा घर पर आई तो एक दिन प्रतिमा को घर में रखा. इसी दौरान घर के ठीक बाहर मुख्य दरवाजे के समीप प्रतिमा की स्थापना के लिए चबूतरा बनवाया गया. दूसरे दिन विधिवत प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की गई. 

लक्की ने बताया कि अब प्रतिदिन वो सुबह उठते ही अपनी मां को प्रत‍िमा के रूप में देख लेता है. लक्की का कहना है कि अब मां सिर्फ बोलती नहीं है, लेकिन वो हर समय मेरे और पूरे परिवार के साथ मौजूद रहती है. बेरछा रोड स्थित ग्राम सांपखेड़ा में मुख्य मार्ग से ही गीताबाई की प्रतिमा का मंदिर दिखाई देता है. इस मंदिर में प्रतिमा को प्रतिदिन परिजन साड़ी ओढ़ाकर ही रखते हैं.

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इनपुट- शाजापुर से मनोज पुरोह‍ि‍त की र‍िपोर्ट 

 

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