scorecardresearch
 

'इजरायली मशीन': क्या बूढ़े को जवान बनाना संभव है? 2020 की स्टडी में वैज्ञानिकों ने बताई थीं ये बातें

सोशल मीडिया पर इजरायली टाइम मशीन के जरिए बुजुर्गों को जवान बनाने का दावा कर रही एक ठगी के मामले ने सबका ध्यान खींचा. राजीव दुबे नामक पति-पत्नी ने लोगों से 35 करोड़ रुपये की ठगी की, जिसमें उन्होंने एक इजरायली मशीन से लोगों को फिर से जवान करने का दावा किया. असल में, 25 करोड़ की बताई गई यह मशीन कानपुर के कबाड़ी मार्केट में सिर्फ 3 लाख रुपये में बनाई गई थी.ऐसे दावों के चलते सवाल उठ रहा है कि क्या वास्तव में उम्र को उल्टा किया जा सकता है.

Advertisement
X
क्या बूढ़े को जवान बनाना संभव है? Representative Image-AI
क्या बूढ़े को जवान बनाना संभव है? Representative Image-AI

सोशल मीडिया पर इजरायली टाइम मशीन के जरिए बुजुर्गों को जवान बनाने का दावा कर रही एक ठगी के मामले ने सबका ध्यान खींचा. राजीव दुबे नामक पति-पत्नी ने लोगों से 35 करोड़ रुपये की ठगी की, जिसमें उन्होंने एक इजरायली मशीन से लोगों को फिर से जवान करने का दावा किया. असल में, 25 करोड़ की बताई गई यह मशीन कानपुर के कबाड़ी मार्केट में सिर्फ 3 लाख रुपये में बनाई गई थी.ऐसे दावों के चलते सवाल उठ रहा है कि क्या वास्तव में उम्र को उल्टा किया जा सकता है.

Advertisement

लेकिन इसके इतर लोगों के मन में सवाल उठा क्या सच में ऐसा किया जा सकता है. क्या दुनिया में ऐसी कोई टेक्नॉलाजी बनी है. 2020 में इसी की इर्द-गिर्द जर्नल ऑफ एजिंग स्टडीज में एक स्टडी पब्लिश हुई. वैज्ञानिकों ने उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने की संभावना पर चर्चा की गई थी.

इस प्रमुख स्टडी में दावा किया गया है कि शुद्ध ऑक्सीजन के जरिए उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को रोका जा सकता है. इस स्टडी में लोगों को 100 प्रतिशत शुद्ध ऑक्सीजन मास्क के जरिए दी गई. ये प्रक्रिया 90 मिनट तक चली, जो हफ्ते में पांच दिन और तीन महीने तक की गई.

क्या है टेलोमेर्स का रोल?

स्टडी के परिणामों के अनुसार, शरीर के टेलोमेर्स (जो हमारे क्रोमोसॉम की सुरक्षा करते हैं) की लंबाई में 20 प्रतिशत तक वृद्धि हुई. टेलोमेर्स उम्र के साथ कम होते जाते हैं और उनकी कमी से गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है. साथ ही, शरीर में मौजूद सेंससेंट सेल्स, जो उम्र बढ़ने का संकेत होते हैं, की संख्या में भी 37 प्रतिशत की कमी पाई गई.

Advertisement

सेंससेंट सेल्स की कमी

इस प्रक्रिया से यह दावा किया गया कि उम्र बढ़ने की गति को थोड़ा धीमा करना संभव है, लेकिन इस स्टडी में ऐसा कोई दावा नहीं किया गया कि इससे आपकी त्वचा जवान हो जाएगी या झुर्रियां कम होंगी. यह मुख्य रूप से टेलोमेर्स की लंबाई और सेंससेंट सेल्स की संख्या पर केंद्रित था, जो उम्र बढ़ने की आंतरिक प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं.

तीन महीने में बड़े बदलाव

शोध में शामिल 64 साल के 35 स्वस्थ लोगों में तीन महीने के भीतर बड़े बदलाव देखे गए. रिसर्चर डॉ. आमिर का कहना है कि यह अब तक की सबसे प्रभावी प्रक्रिया है, जिससे केवल ऑक्सीजन थेरेपी के जरिए उम्र को धीमा किया जा सकता है. इससे पहले, ऐसे बदलाव सिर्फ जीवनशैली में सुधार और कठिन व्यायाम के जरिए ही मुमकिन थे.

हालांकि, यह स्टडी अभी व्यवहारिक रूप में सामने नहीं आ पाई है. वैज्ञानिक परीक्षणों के स्तर पर तो यह प्रक्रिया सफल रही है,लेकिन इसे आम जीवन में लागू करने और इसके प्रभावों को पूरी तरह से समझने के लिए अभी और शोध की जरूरत है.

Live TV

Advertisement
Advertisement